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25 जून 2011
मुझ से हर लिहाज से बड़े हैं आमिर खान : अमिताभ बच्चन
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन जब भी कुछ बोलते हैं तो उसमें वजन होता है। इस बार भी उनके मुंह से जो वाणी निकली है उसे सुनकर उनके बड़प्पन का एहसास होता है, शायद ये ही सोच रहे होंगे बॉलीवुड के सबसे समझदार एक्टर आमिर खान। जिनकी फिल्म देल्ही बेली और अमिताभ बच्चन की फिल्म बुड्ढ़ा होगा तेरा बाप 1 जूलाई को यानी एक ही दिन प्रदर्शित हो रही है।
जहां आमिर की फिल्म एक हॉट सेक्स कॉमेडी है, युवाओं पर आधारित है तो वहीं अमिताभ की बुड्ढ़ा...एक पूरी मनोरंजक फिल्म है जिसमें खुद वो रंगीले रसिया बने हुए नजर आ रहे है। एक एक्टिंग का किंग है तो एक मार्केट में चीजें किस तरह बेची जाती है उस चीज का बादशाह इसलिए अमिताभ-आमिर के बीच में तुलना शुरू हो गई है। जिसका खंडन खुद अमिताभ ने किया है।
बिग बी ने ब्लॉग पर लिखा है कि उनका और आमिर का कोई मुकाबला नहीं है। दोनों की फिल्में भले ही एक दिन प्रदर्शित हो रही हो लेकिन दोनों में ही कोई समानता नहीं है। आमिर खान मुझसे हर लिहाज में काफी आगे है। उनकी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी हमारी और हमारी प्रोडक्शन कंपनी से काफी बड़ी है, उन्हें मार्केट के बारे में काफी कुछ पता है जो मुझे नहीं आता । हमारी छोटी सी कंपनी है जिसने एक छोटे बजट की फिल्म बनाई है उम्मीद करता हूं कि लोग पसंद करेगें। लेकिन प्लीज मेरी और आमिर की फिल्म की तुलना बंद कर दीजिये।
खैर अमिताभ की इस बात सुनकर आमिर खान भी मंद-मंद मुस्कुरा रहे होगें। क्योंकि उनकी तारीफ जो बिग बी ने कर दी है। खैर दोनों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर क्या गुल खिलायेगी ये तो आने वाले दिनों में पता चल जायेगा। लेकिन इतना आपको बता दें दोनों ही फिल्मों के प्रोमोस ने इस समय टीवी पर धमाल मचाया हुआ है।
जहां आमिर की फिल्म एक हॉट सेक्स कॉमेडी है, युवाओं पर आधारित है तो वहीं अमिताभ की बुड्ढ़ा...एक पूरी मनोरंजक फिल्म है जिसमें खुद वो रंगीले रसिया बने हुए नजर आ रहे है। एक एक्टिंग का किंग है तो एक मार्केट में चीजें किस तरह बेची जाती है उस चीज का बादशाह इसलिए अमिताभ-आमिर के बीच में तुलना शुरू हो गई है। जिसका खंडन खुद अमिताभ ने किया है।
बिग बी ने ब्लॉग पर लिखा है कि उनका और आमिर का कोई मुकाबला नहीं है। दोनों की फिल्में भले ही एक दिन प्रदर्शित हो रही हो लेकिन दोनों में ही कोई समानता नहीं है। आमिर खान मुझसे हर लिहाज में काफी आगे है। उनकी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी हमारी और हमारी प्रोडक्शन कंपनी से काफी बड़ी है, उन्हें मार्केट के बारे में काफी कुछ पता है जो मुझे नहीं आता । हमारी छोटी सी कंपनी है जिसने एक छोटे बजट की फिल्म बनाई है उम्मीद करता हूं कि लोग पसंद करेगें। लेकिन प्लीज मेरी और आमिर की फिल्म की तुलना बंद कर दीजिये।
खैर अमिताभ की इस बात सुनकर आमिर खान भी मंद-मंद मुस्कुरा रहे होगें। क्योंकि उनकी तारीफ जो बिग बी ने कर दी है। खैर दोनों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर क्या गुल खिलायेगी ये तो आने वाले दिनों में पता चल जायेगा। लेकिन इतना आपको बता दें दोनों ही फिल्मों के प्रोमोस ने इस समय टीवी पर धमाल मचाया हुआ है।
22 जून 2011
अन्ना ने साधा केंद्र पर निशाना, शंकराचार्य ने उठाए आंदोलन पर सवाल
- मजबूत लोकपाल के लिए अन्ना अड़े, जनलोकपाल के कई मुद्दे सरकारी ड्राफ्ट से गायब
- रामदेव ने तोड़ा मौन, अन्ना का साथ देने के लिए दिल्ली आने का ऐलान
- लोकपाल: अंतिम बैठक में भी अड़ी रही सरकार, 6 मुद्दों पर मतभेद कायम
- कांग्रेस नेताओं को रामदेव के योग शिविर से दूर रहने की सलाह
- भारत के सबसे बुजुर्ग योग गुरु का रामदेव पर योग को बेच कर भ्रष्ट करने का आरोप
नई दिल्ली. अन्ना हजारे और सरकार के बीच लोकपाल बिल के मसौदे को लेकर जंग जारी है। बुधवार को केंद्र के खिलाफ अपने हमले तेज करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल विधेयक की ड्राफ्टिंग कमिटी के सदस्य अन्ना हजारे ने सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की मांग की। अन्ना ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए गंभीर नहीं है। अन्ना ने कहा कि सरकार की तरफ से पेश लोकपाल बिल के मसौदे में आम आदमी के हितों को नजरअंदाज किया गया है।
अप्रैल में अनशन करके सरकार को ड्राफ्टिंग कमिटी में सिविल सोसाइटी को शामिल करने पर मजबूर करने वाले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हजारे ने कहा कि देश में मौजूद भ्रष्टाचार पाकिस्तान से ज़्यादा बड़ा दुश्मन है। हजारे ने बुधवार को कहा कि सरकार लोगों को गुमराह कर रही है।
अन्ना ने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के उस आरोप का खंडन किया है, जिसमें कहा गया है कि वे एक समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं। अन्ना ने कहा कि हम एक मजबूत लोकपाल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लोकपाल सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की तरह स्वायत्त हो।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे १६ अगस्त से अनशन करेंगे। इससे पहले ३० जुलाई से राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे। वे कह चुके हैं कि एक मजबूत लोकपाल के बनने तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग कमिटी के सदस्य अरविंद केजरीवाल और पूर्व आईपीएस अफसर किरण बेदी ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने अब आम आदमी के हितों पर ध्यान देना बंद कर दिया है। बेदी ने कहा कि सरकारी मसौदे में गरीब आदमी के लिए कुछ भी नहीं है।
गौरतलब है कि मंगलवार को ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के सदस्यों और केंद्र सरकार के नुमाइंदों ने एक-दूसरे को अपना-अपना ड्राफ्ट सौंपा था। मंगलवार को ड्राफ्टिंग कमिटी की नौवीं और आखिरी बैठक के बावजूद दोनों पक्षों में कई अहम मसलों पर मतभेद कायम थे।
अब शंकराचार्य ने अन्ना के आंदोलन पर उठाए सवाल
मेरठ में मीडिया से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद ने अन्ना हजारे के आंदोलन पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने अन्ना के आंदोलन को मीडिया द्वारा प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा, अन्ना का अभियान मीडिया प्रायोजित है और एसएमएस और विज्ञापन के इस्तेमाल से दोनों की साझेदारी हो चुकी है।
आपकी राय
क्या सरकार लोकपाल के मुद्दे पर घिरती नज़र आ रही है? क्या अन्ना हजारे की टीम का सशक्त लोकपाल का सपना पूरा होगा? क्या सरकार के लिए अन्ना की मांगें दबाना आसान होगा? क्या सरकार को इस मुद्दे पर उभरती जनभावना को देखते हुए अन्ना हजारे की मांगें मान लेनी चाहिए? क्या अन्ना की कुछ मांगें संवैधानिक संकट पैदा कर सकती हैं? इन मुद्दों पर अपनी राय संतुलित शब्दों में जाहिर करें। आप अपनी टिप्पणी के लिए जिम्मेदार होंगे।
भारत के सबसे बुजुर्ग योग गुरु का रामदेव पर योग को बेच कर भ्रष्ट करने का आरोप
अप्रैल में अनशन करके सरकार को ड्राफ्टिंग कमिटी में सिविल सोसाइटी को शामिल करने पर मजबूर करने वाले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हजारे ने कहा कि देश में मौजूद भ्रष्टाचार पाकिस्तान से ज़्यादा बड़ा दुश्मन है। हजारे ने बुधवार को कहा कि सरकार लोगों को गुमराह कर रही है।
अन्ना ने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के उस आरोप का खंडन किया है, जिसमें कहा गया है कि वे एक समानांतर सरकार चलाना चाहते हैं। अन्ना ने कहा कि हम एक मजबूत लोकपाल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लोकपाल सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की तरह स्वायत्त हो।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे १६ अगस्त से अनशन करेंगे। इससे पहले ३० जुलाई से राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे। वे कह चुके हैं कि एक मजबूत लोकपाल के बनने तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग कमिटी के सदस्य अरविंद केजरीवाल और पूर्व आईपीएस अफसर किरण बेदी ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार ने अब आम आदमी के हितों पर ध्यान देना बंद कर दिया है। बेदी ने कहा कि सरकारी मसौदे में गरीब आदमी के लिए कुछ भी नहीं है।
गौरतलब है कि मंगलवार को ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल सिविल सोसाइटी के सदस्यों और केंद्र सरकार के नुमाइंदों ने एक-दूसरे को अपना-अपना ड्राफ्ट सौंपा था। मंगलवार को ड्राफ्टिंग कमिटी की नौवीं और आखिरी बैठक के बावजूद दोनों पक्षों में कई अहम मसलों पर मतभेद कायम थे।
अब शंकराचार्य ने अन्ना के आंदोलन पर उठाए सवाल
मेरठ में मीडिया से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य स्वरूपानंद ने अन्ना हजारे के आंदोलन पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने अन्ना के आंदोलन को मीडिया द्वारा प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा, अन्ना का अभियान मीडिया प्रायोजित है और एसएमएस और विज्ञापन के इस्तेमाल से दोनों की साझेदारी हो चुकी है।
आपकी राय
क्या सरकार लोकपाल के मुद्दे पर घिरती नज़र आ रही है? क्या अन्ना हजारे की टीम का सशक्त लोकपाल का सपना पूरा होगा? क्या सरकार के लिए अन्ना की मांगें दबाना आसान होगा? क्या सरकार को इस मुद्दे पर उभरती जनभावना को देखते हुए अन्ना हजारे की मांगें मान लेनी चाहिए? क्या अन्ना की कुछ मांगें संवैधानिक संकट पैदा कर सकती हैं? इन मुद्दों पर अपनी राय संतुलित शब्दों में जाहिर करें। आप अपनी टिप्पणी के लिए जिम्मेदार होंगे।
भारत के सबसे बुजुर्ग योग गुरु का रामदेव पर योग को बेच कर भ्रष्ट करने का आरोप
जहां प्रिंसिपल थे, वहीं भीख मांगते मिले
रांची। जिस मैक्लुस्कीगंज के लिए डीआर कैमरून ने पत्नी व बच्चों को त्याग दिया था, आज वही उनसे दूर हो गया है। मैक्लुस्कीगंज की यह जानीमानी हस्ती कोलकाता के उसी स्कूल के सामने भीख मांगती मिली, जहां के कभी वे प्रिंसिपल थे। पूछने पर बस यही कहते हैं, ’आई एम नॉट फाइन हियर। मुझे यहां से ले चलो। मैं मैक्लुस्कीगंज में ही दफन होना चाहता हूं। आप मुझे वहां ले चलेंगे न..।’
मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले कैमरून के बुरे दिन नब्बे के दशक के अंतिम वर्ष में शुरू हुए थे। बेरमो के पूंजीपति जगदीश पांडेय ने कैमरून से मैक्लुस्कीगंज के उनके गेस्ट हाउस ‘हाईलैंड’ और बंगले का सौदा किया था। सौदे के समय यह तय हुआ था कि जब तक कैमरून जिंदा रहेंगे, उन्हें गेस्ट हाउस का एक कमरा रहने के लिए निशुल्क दिया जाएगा। छह माह तो सब ठीक-ठाक रहा। इसके बाद उन्हें पीछे के एक बाथरूम में शिफ्ट कर दिया गया। वे बीमार हो गए। मई 2009 में जब यह बात ऑस्ट्रेलिया में उनके परिजनों को मिली, तो उन्होंने कैमरून को वहां बुला लिया।
कुछ दिन वहां रहने के बाद कैमरून का मन फिर मैक्लुस्कीगंज जाने के लिए बेताब होने लगा। फरवरी 2010 में वे मैक्लुस्कीगंज लौट आए। यहां उन्हें न ठौर मिला, न ठिकाना। वे इधर-उधर भटकने लगे। पैसे खत्म हुए तो मानसिक स्थिति भी गड़बड़ा गई। इसी क्रम में कोलकाता के खिदिरपुर पहुंच गए। यहां वे सेंट थॉमस स्कूल के आसपास भीख मांगने लगे। स्कूल की दाई रेहाना की नजर पर उन पर पड़ी, तो वह उन्हें पहचान गई। वह उन्हें अपने घर ले आई। इसके बाद उन्हें खिदिरपुर के ‘मेरी कुपर होम’ नामक वृद्धाश्रम में भर्ती करा दिया। इसकी जानकारी मिलने पर स्कूल की शिक्षिका श्रीमती घोष ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिजनों को कैमरून के बारे में बताया। सूचना पाकर उनका बेटा आया और वृद्धाश्रम का खर्च देने की बात कह कर लौट गया।
खदिरपुर वृद्धाश्रम में आसरा
दी ईस्ट इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से चलने वाले इस वृद्धाश्रम के अधीक्षक लियो जार्डन हैं। इनकी पत्नी थ्रेडा जार्डन हैं। दोनों मिल कर इनकी सेवा करते हैं।
सत्तर के दशक में सिंबल थे
सत्तर के दशक में एक समय था, जब कैमरून मैक्लुस्कीगंज के सिंबल थे। यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग उन्हें अंकल पुकारते थे। पर्यटक उनसे बिना मिले नहीं जाते थे।
मैक्लुस्कीगंज में बसती है जान
पेशे से शिक्षक कैमरून एंग्लोइंडियन हैं। उन्होंने देश-विदेश के कई नामी गिरामी स्कूलों में पढ़ाया। वे जहां भी रहे, लेकिन उनकी जान मैक्लुस्कीगंज में ही बसती थी। यही कारण है कि वे स्थाई रूप से यहीं बस गए। फैसले से नाराज उनकी पत्नी एंजेला आस्ट्रेलिया लौट गईं। कैमरून के तीन बेटे मार्क, जॉन और शेंड्रिक्स और एक बेटी मारिया है। सभी मैक्लुस्कीगंज छोड़ कर चले गए।
मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले कैमरून के बुरे दिन नब्बे के दशक के अंतिम वर्ष में शुरू हुए थे। बेरमो के पूंजीपति जगदीश पांडेय ने कैमरून से मैक्लुस्कीगंज के उनके गेस्ट हाउस ‘हाईलैंड’ और बंगले का सौदा किया था। सौदे के समय यह तय हुआ था कि जब तक कैमरून जिंदा रहेंगे, उन्हें गेस्ट हाउस का एक कमरा रहने के लिए निशुल्क दिया जाएगा। छह माह तो सब ठीक-ठाक रहा। इसके बाद उन्हें पीछे के एक बाथरूम में शिफ्ट कर दिया गया। वे बीमार हो गए। मई 2009 में जब यह बात ऑस्ट्रेलिया में उनके परिजनों को मिली, तो उन्होंने कैमरून को वहां बुला लिया।
कुछ दिन वहां रहने के बाद कैमरून का मन फिर मैक्लुस्कीगंज जाने के लिए बेताब होने लगा। फरवरी 2010 में वे मैक्लुस्कीगंज लौट आए। यहां उन्हें न ठौर मिला, न ठिकाना। वे इधर-उधर भटकने लगे। पैसे खत्म हुए तो मानसिक स्थिति भी गड़बड़ा गई। इसी क्रम में कोलकाता के खिदिरपुर पहुंच गए। यहां वे सेंट थॉमस स्कूल के आसपास भीख मांगने लगे। स्कूल की दाई रेहाना की नजर पर उन पर पड़ी, तो वह उन्हें पहचान गई। वह उन्हें अपने घर ले आई। इसके बाद उन्हें खिदिरपुर के ‘मेरी कुपर होम’ नामक वृद्धाश्रम में भर्ती करा दिया। इसकी जानकारी मिलने पर स्कूल की शिक्षिका श्रीमती घोष ने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिजनों को कैमरून के बारे में बताया। सूचना पाकर उनका बेटा आया और वृद्धाश्रम का खर्च देने की बात कह कर लौट गया।
खदिरपुर वृद्धाश्रम में आसरा
दी ईस्ट इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से चलने वाले इस वृद्धाश्रम के अधीक्षक लियो जार्डन हैं। इनकी पत्नी थ्रेडा जार्डन हैं। दोनों मिल कर इनकी सेवा करते हैं।
सत्तर के दशक में सिंबल थे
सत्तर के दशक में एक समय था, जब कैमरून मैक्लुस्कीगंज के सिंबल थे। यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग उन्हें अंकल पुकारते थे। पर्यटक उनसे बिना मिले नहीं जाते थे।
मैक्लुस्कीगंज में बसती है जान
पेशे से शिक्षक कैमरून एंग्लोइंडियन हैं। उन्होंने देश-विदेश के कई नामी गिरामी स्कूलों में पढ़ाया। वे जहां भी रहे, लेकिन उनकी जान मैक्लुस्कीगंज में ही बसती थी। यही कारण है कि वे स्थाई रूप से यहीं बस गए। फैसले से नाराज उनकी पत्नी एंजेला आस्ट्रेलिया लौट गईं। कैमरून के तीन बेटे मार्क, जॉन और शेंड्रिक्स और एक बेटी मारिया है। सभी मैक्लुस्कीगंज छोड़ कर चले गए।
क्या भारत वास्तव में आजाद है.
22 जून 1948 को भारत के दुसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न
शपथ ली l
शपथ ली l
"मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ की मैं सम्राट जार्ज षष्ठ
और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी
निभाऊंगा, एवं
और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी
निभाऊंगा, एवं
मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते
हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी की यथावत सव्वा करूँगा "
हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी की यथावत सव्वा करूँगा "
क्या भारत वास्तव में आजाद है.
भयंकर भूलें
-- भयंकर भूलें ....
वे अपने पूर्वजों के हिन्दू धर्म में लौटना चाहते हैं.महाराजा ने इसे स्वीकार भी कर लिया. जिस दिन मुसलमानों कि सामूहिक शुद्धी कि जनि थी, कुछ संकीरण विचारों के पंडित महाराजा के पास ए और कहा कि शुद्धी हुई तो वे सब आत्महत्या कर लेंगे तथा महाराजा को ब्रम्हहत्या का पाप लगेगा. महाराजा इस धमकी के आगे झुक गए और कश्मीर घाटी के मुस्लिम समाज को राष्ट्रियधारा में लाने का स्वर्णिम अवसर चला गया. * देश के विभाजन के समय जिन्ना कश्मीर को भारत में मिलाना चाहता था. महाराजा हरी सिंह ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया तो कबाइलियों के वेश में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया. २६.१०.१९४७ को महाराजा ने कश्मीर का भारत में विलय करने का पत्र लिख दिया, तो भारतीय सेना अपने इस अंग के बच्व में उतरी. पाकिस्तानियों के छक्के छुडाते हुए हमारे सभी जवानों ने आक्रान्ताओं को पीछे धकेलना शुरू कर दिया, तभी ०१.०१.१९४८ को तात्कालिक प्रधानमंतरी पंडित जवाहर लाल नेहरू इस मामले को यु.एन.ओ. में ले गए. यह दूसरी भयंकर भूल थी, जिसके कारण आज कश्मीर एक नासूर बन गया है. सुरक्षा परिषद् ने भारतीय सेना के बढते कदम रोक दिए और कश्मीरियों को यह निर्णय करने (जनमत संग्रह) का अधिकार दे दिया, कि वे भारत में रहे या पाकिस्तान में रहें.
कश्मीर का पुराना इतिहास
* महर्षि कश्यप ने बसाया और उनके पुत्र नील कश्मीर
के पहले राजा थे.
* त्रेता युग में भगवन श्रीराम के पुत्र लव का शासन.
*
द्वापर में भगवन श्रीकृष्ण ने महारानी यशोमती का राज्याभिषेक किया.
* सम्राट
अशोक ने श्रीनगर बसाया और उनके पुत्र जालौक कश्मीर के शासक रहे.
* नागवंशी
नरेशों ने कुषाण राजा कनिष्क को निष्कासित किया.
* सम्राट समुन्द्र्गुप्त ने
मिहिरकुल को पराजित किया.
* ललितादित्य मुक्तपीड सबसे प्रतापी सम्राट बने.
*
अवन्तिवर्मन के शासन कल में कश्मीर समर्धि के शिखर पर.
* कश्मीर नरेश चन्द्रपीड
ने अरब हमलावरों को खदेड़ा.
* १४ वीं शताब्दी में मुस्लिम सुल्तानों का
अधिकार.
* महाराजा रणजीत सिंह ने विदेशियों को मर भगाया.
* सन १८४६ में डोगरा
वीर गोलब सिंह जम्मू कश्मीर के महाराजा बने.
कश्मीर का पुराना इतिहास
* महर्षि कश्यप ने बसाया और उनके पुत्र नील कश्मीर
के पहले राजा थे.
* त्रेता युग में भगवन श्रीराम के पुत्र लव का शासन.
*
द्वापर में भगवन श्रीकृष्ण ने महारानी यशोमती का राज्याभिषेक किया.
* सम्राट
अशोक ने श्रीनगर बसाया और उनके पुत्र जालौक कश्मीर के शासक रहे.
* नागवंशी
नरेशों ने कुषाण राजा कनिष्क को निष्कासित किया.
* सम्राट समुन्द्र्गुप्त ने
मिहिरकुल को पराजित किया.
* ललितादित्य मुक्तपीड सबसे प्रतापी सम्राट बने.
*
अवन्तिवर्मन के शासन कल में कश्मीर समर्धि के शिखर पर.
* कश्मीर नरेश चन्द्रपीड
ने अरब हमलावरों को खदेड़ा.
* १४ वीं शताब्दी में मुस्लिम सुल्तानों का
अधिकार.
* महाराजा रणजीत सिंह ने विदेशियों को मर भगाया.
* सन १८४६ में डोगरा
वीर गोलब सिंह जम्मू कश्मीर के महाराजा बने.
ओशो प्रभात
| यदि आप दुखी हैं, यदि आपको बोध होता है कि दुख है, तो उस दुख को झेलते मत चले जाइए, उस दुख को सहते मत चले जाइए। उस दुख के विरोध में खड़े होइए और उस दुख को विसर्जित करने का उपाय करिए। साधारण मनुष्य दुख को पाकर जो काम करता है वह, और साधक जो काम करता है वह, दोनों में बहुत थोड़ा-सा भेद है। जब साधारण व्यक्ति के सामने दुख खड़ा होता है, तो वह दुख को भुलाने का उपाय करता है। और जब साधक के सामने दुख खड़ा होता है, तो वह दुख को मिटाने का उपाय करता है। दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं। एक वे लोग, जो दुख को भुलाने का उपाय कर रहे हैं। और एक वे लोग, जो दुख को मिटाने का उपाय कर रहे हैं। परमात्मा करे, आप पहली पंक्ति में न रहें और दूसरी पंक्ति में आ जाएं। दुख को भुलाने का उपाय एक तरह की मूर्च्छा है। आप चौबीस घंटे दुख को भुलाने का उपाय कर रहे हैं। आप लोगों से बातें कर रहे हैं, या संगीत सुन रहे हैं, या शराब पी रहे हैं, या ताश खेल रहे हैं, या जुए में लगे हुए हैं, या किसी और उपद्रव में लगे हुए हैं, जहां कि अपने को भूल जाएं, ताकि आपको स्मरण न आए कि भीतर बहुत दुख है। हम चौबीस घंटे अपने को भुलाने के उपाय में लगे हुए हैं। हम नहीं चाहते कि दुख दिखाई पड़े। अगर हमें दुख दिखाई पड़ेगा, तो हम घबरा जाएंगे। तो हम दुख को भुलाने के और विलीन करने के उपाय में लगे हुए हैं। दुख भुलाने से मिटता नहीं है। दुख भुलाने से मिटता नहीं है, कोई घाव छिपा लेने से मिटता नहीं है। और अच्छे कपड़ों से ढांक लेने से कोई अंतर नहीं पड़ता है, वरन अच्छे कपड़ों से ढांक लेने से और घातक और विषाक्त हो जाता है। तो घावों को छिपाएं न। उन्हें उघाड़ लें और अपने दुख का साक्षात करें। और उसे भुलाएं मत, उसे उघाड़ें और जानें और उसे मिटाने के उपाय में संलग्न हों। वे ही लोग जीवन के रहस्य को जान पाएंगे, जो दुख को मिटाने में लगते हैं, दुख को भुलाने में नहीं। और मैंने कहा, दो ही तरह के लोग हैं। उन लोगों को मैं धार्मिक कहता हूं, जो दुख को मिटाने का उपाय खोज रहे हैं। और उन लोगों को अधार्मिक कहता हूं, जो दुख को भुलाने का उपाय खोज रहे हैं। आप स्मरण करें कि आप क्या कर रहे हैं? दुख को भुलाने का उपाय खोज रहे हैं? क्या आप सोचते हैं, अगर आपके सारे उपाय छीन लिए जाएं, तो आप बहुत दुखी नहीं हो जाएंगे? |
love & wine
शराब का नशा विनाश की ओर ले जाता है.
पैसे का नशा अंहकार की ओर ले जाता है.
जीवन का नशा मृत्यु की ओर ले जाता है.
ज्ञान का नशा सम्मान की ओर ले जाता है.
लेकिन प्रेम का नशा परमात्मा की ओर ले जाता है.
पैसे का नशा अंहकार की ओर ले जाता है.
जीवन का नशा मृत्यु की ओर ले जाता है.
ज्ञान का नशा सम्मान की ओर ले जाता है.
लेकिन प्रेम का नशा परमात्मा की ओर ले जाता है.
रचनाकार: अख़्तर अंसारी
साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं
मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं
एक तस्वीर-ए-मुहब्बत है जवानी गोया
जिस में रंगो की इवज़ ख़ून-ए-जिगर भरते हैं
इशरत-ए-रफ़्ता ने जा कर न किया याद हमें
इशरत-ए-रफ़्ता को हम याद किया करते हैं
आस्माँ से कभी देखी न गई अपनी ख़ुशी
अब ये हालात हैं कि हम हँसते हुए डरते हैं
शेर कहते हो बहुत ख़ूब तुम "अख्तर" लेकिन
अच्छे शायर ये सुना है कि जवाँ मरते हैं
मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं
एक तस्वीर-ए-मुहब्बत है जवानी गोया
जिस में रंगो की इवज़ ख़ून-ए-जिगर भरते हैं
इशरत-ए-रफ़्ता ने जा कर न किया याद हमें
इशरत-ए-रफ़्ता को हम याद किया करते हैं
आस्माँ से कभी देखी न गई अपनी ख़ुशी
अब ये हालात हैं कि हम हँसते हुए डरते हैं
शेर कहते हो बहुत ख़ूब तुम "अख्तर" लेकिन
अच्छे शायर ये सुना है कि जवाँ मरते हैं
एक कविताः बेटियां ( रचनाकार: डॉ . अमिता नीरव )
ना जाने कहां से आ जाती हैं ये
कुछ ना हो फिर भी खिलखिलाती हैं बेटियां ना प्यार की गर्मी और ना चाहत की शीतलता
फिर भी जीती जाती हैं बेटियां अभावों और दबावों के बीच भी
दिन के दोगुने वेग से बढ़ती जाती है बेटियां भीड़ भरे मेले में हाथ छूट जाए
फिर भी किसी तरह घर पहुंच जाती हैं बेटियां खुद को जलाकर भी
घरों को रोशन करती जाती हैं बेटियां सीमाओं के आरपार खुद को फैलाकर
पुल बन जाती हैं बेटियां शायद इसकी सजा पाते हुए
कोख में ही मारी जाती हैं बेटियां ... ।
कुछ ना हो फिर भी खिलखिलाती हैं बेटियां ना प्यार की गर्मी और ना चाहत की शीतलता
फिर भी जीती जाती हैं बेटियां अभावों और दबावों के बीच भी
दिन के दोगुने वेग से बढ़ती जाती है बेटियां भीड़ भरे मेले में हाथ छूट जाए
फिर भी किसी तरह घर पहुंच जाती हैं बेटियां खुद को जलाकर भी
घरों को रोशन करती जाती हैं बेटियां सीमाओं के आरपार खुद को फैलाकर
पुल बन जाती हैं बेटियां शायद इसकी सजा पाते हुए
कोख में ही मारी जाती हैं बेटियां ... ।
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समय का खेल है यारों समय के साथ जाना है.
जहाँ से सिखना है कुछ जहाँ को कुछ सिखाना है.
भले ही राह में दुःख हो उसे सहते ही जाना है
क्षितिज की चाह की है तो क्षितिज के पार जाना है.
नहीं कोई सफाई है, नहीं कोई बहाना है.
किया हमने जो वादा है, वही वादा निभाना है.
यही चाहत रहे अपनी, इसे हमको निभाना है.
नहीं जो कर सका कोई, उसे करके दिखाना है.
समय का खेल है यारों समय के साथ जाना है.
जहाँ से सिखना है कुछ जहाँ को कुछ सिखाना है.
फ़ॉर्मूला
ऐसा है पहले आप ऑरकुट न्यू वर्जन खोलो फिर वहा दाहिने तरफ जहा दोस्तों के नाम दिखाते है वहा जाओ वह आपको मैनेज लिखा होगा वहा आप क्लिक करो वह कोने में लिखा होगा एड फ्रेंड वह क्लिक करो जितने भी फ्रेंड के फोटो दिख रहे है वह क्लिक करो फिर सेव पर क्लिक करो फिर आप होम पे जाओ वह आपको मिलेगा अपडेट्स फ्राम वह क्लिक करो जिस नाम से अपने ग्रुप बनाया होगा वो नाम दिखाई देगा उसे सेलेक्ट करो फिर उसके बाद पोस्ट के ऊपर क्लिक करो फिर वही अपडेट्स फ्राम पे क्लिक करो फिर पोस्ट के ऊपर जोही आप क्लिक करोगे सरे लोगो का फोटो दिखने लगेगा फिर अपना स्क्रैप उसमे इंटर करो और पोस्ट कर दो देखने में इतना लम्बा स्टेप है करना आसन है ........................ फिर भी नहीं होगा तो मै फिर से बताउगा
ऐसा है पहले आप ऑरकुट न्यू वर्जन खोलो फिर वहा दाहिने तरफ जहा दोस्तों के नाम दिखाते है वहा जाओ वह आपको मैनेज लिखा होगा वहा आप क्लिक करो वह कोने में लिखा होगा एड फ्रेंड वह क्लिक करो जितने भी फ्रेंड के फोटो दिख रहे है वह क्लिक करो फिर सेव पर क्लिक करो फिर आप होम पे जाओ वह आपको मिलेगा अपडेट्स फ्राम वह क्लिक करो जिस नाम से अपने ग्रुप बनाया होगा वो नाम दिखाई देगा उसे सेलेक्ट करो फिर उसके बाद पोस्ट के ऊपर क्लिक करो फिर वही अपडेट्स फ्राम पे क्लिक करो फिर पोस्ट के ऊपर जोही आप क्लिक करोगे सरे लोगो का फोटो दिखने लगेगा फिर अपना स्क्रैप उसमे इंटर करो और पोस्ट कर दो
19 जून 2011
जब तक जिन्दगी है!!
जब तक जिन्दगी है तब तक हर रस्म निभाएंगे
आपको मनाने के लिए हम भगवान् के पास जायेंगे
जब तक दुआ पूरी न होगी तब तक वापस नहीं आयेंगे
हर आरजू हमेशा अधूरी नहीं होती है
दोस्ती में कभी दूरी नहीं होती है
जिनकी जिन्दगी मै हो आप जैसा दोस्त
उनको किसी की दोस्ती जरुरी नहीं होती है
किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा
आपको मनाने के लिए हम भगवान् के पास जायेंगे
जब तक दुआ पूरी न होगी तब तक वापस नहीं आयेंगे
हर आरजू हमेशा अधूरी नहीं होती है
दोस्ती में कभी दूरी नहीं होती है
जिनकी जिन्दगी मै हो आप जैसा दोस्त
उनको किसी की दोस्ती जरुरी नहीं होती है
किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा
vijay ki likhi ek kavita
15 जून 2011
चुडैल वाला कुआं
वैसे तो ये कुआं भी आम कुओं जैसा ही था, पर था बड़ा पुराना। कभी इसका पानी प्रयोग में आता होगा पर बरसों से इससे पानी नहीं निकाला गया था। इससे पानी लिया जाना कब बन्द किया गया था कोई निश्चित रूप से नहीं बता सकता। कहने का मलतब यह कि बरसो से वीरान पड़ा था ये कुआं। काफी गहरा और अंधेरा था ये कुआं। ऊपर से पत्थर गिराओं तो छपाक की आवाज होती थी जिससे लगता था कि कुयें की तली में थोड़ा बहुत पानी है।
बरसों पहले कुछ उत्साही युवकों ने इस कुये का पुन: चालू करने की मुहिम शुरू की थी। इसके लिये वे कमर में रस्सी बांध कर कुये के अंदर उतरे थे। ऊपर खड़े लोग इस रस्सी के दूसरे छोर को कस कर पकड़े थे कि जब नीचे से इशारा मिले तो वे रस्सी ऊपर खीच लें। इसके अलावा तीन-चार बाल्टियां भी रिस्सयों से बांध कर कुयें में लटकाई गयीं थीं। योजना ये थी कि नीचे उतरे युवक तली पर की गंदगी इन बाल्टियों में भर कर, रस्सी हिला कर जब ऊपर की ओर इशारा करेंगे तो ऊपर खड़े लोग इन बािल्टयों को को ऊपर खीच लेंगे और बाहर निकाल कर खाली कर देंगे। इसके बाद वे इन खाली बाल्टियों को दोबारा कुयें में उन युवकों के पास पहुंचा देंगे। इस तरह से एक बार अगर कुयें की सफाई हो जायेगी तो इसका पानी पीने के काम आ सकेगा। अन्दर गये युवकों को अगर कोई परेशानी होगी तो अपनी कमर में बंधी रिस्सयों को हिला कर वे संकेत देंगे ताकि उन्हें जल्दी से ऊपर खींचा जा सके।
कुये बाहर अपार जनसमुदाय जमा था, किसी मेले का सा माहौल था। गांव की पीने के पानी की समस्या जो दूर होने वाली थी। पर ऊपर खड़े लोग प्रतीक्षा करते रहे समय बीतता रहा। जब बहुत देर तक बाल्टी वाली कोई रस्सी न हिली और न युवकों की कमर में बंधी रस्सी ही हिली तो उन्हें फिक्र होने लगी। उन्होने कुये में झांक कर देखने की कोशिश की पर कुआं इतना गहरा था कि उसके अन्दर कुछ नजर ही न आता था। घबरा कर वे युवकों को आवाज देने लगे पर कुयें के अन्दर से कोई आवाज नहीं आई। उन्होने हड़बड़ाहट में रिस्सयां ऊपर खीचनी शुरू कीं। तीनों युवक ऊपर आ गये। पर ये क्या उनमें से कोई किसी तरह की हरकत नहीं कर रहा था। आनन-फानन में तीनों की कमर से रस्सी खोल कर उन्हें पास के अस्पताल में ले जाया गया जहां डाक्टरो ने दो को तो तुरंत मृत घोषित कर दिया। उत्सव का माहौल शोक में बदल गया।
तीसरे युवक को ठीक होने में समय लगा। पर मानसिक रूप से वह कभी स्वस्थ न हो पाया। अब वह पागलों की सी हरकतें करता है। कभी बोलता है तो बताता हैं कि कुये में कोई था जिसने सबकी गर्दन दबाई थी। कभी-अपनी ही गर्दन दबा कर कुये के अन्दर घटी घटना का विवरण देने की कोशिश करता है। उसकी बेतरतीब बातें सुन कर लोगों को यकीन हो चला है कि सचमुच कुये में कोई दैवी आत्मा निवास करती है जो नहीं चाहती कि कोई उस कुयें का पानी प्रयोग करे।
गांव की कुछ युवतियों ने जीवन से निराश होकर या किन्ही अन्य कारणों से जब से इस कुयें में कूद कर आत्म हत्या की है तब से तो लोगों का ये विश्वास पक्का हो गया है कि इस कुयें में कोई चुड़ैल निवास करती है। उनका कहना है कि लड़कियों ने आत्महत्या नहीं की थी वरन उनके अनुसार जब ये लड़कियां सबेरे शौच के लिये गयीं थी तो उन्होंने उस कुयें की मुडेर पर एक बूढ़ी स्त्री को बैठे देखा। उसने लड़की को अपने पास बुलाया। जब लड़की उस स्त्री के पास पहुंची तो उसने लड़की की आंखों में सीधे-सीधें झांका। बस फिर क्या था लड़की पूरी तरह से उसके बस में हो गयी। वह बूढी औरत कुयें में उतर गयी और अन्दर से आवाज देकर लड़की को अपने पास बुलाने लगी। लड़की तो जैसे अपने बस में नहींं थी सो कठपुतली की तरह आगे बढ़ी और झम्म से कुयें में कूद गई। यही एक-एक कर के उन सारी लड़कियों के साथ हुआ।
तरह-तरह से लोग उन लड़कियों से जुडी कहानियां सुनाते हैं और बाद में ये कहना नहीं भूलते कि वह औरत थोड़े ही थी वह तो कुयें के अन्दर की चुडैल थी जो अपने शिकार की तलाश में रोज सुबह की घुघलके में कुये की मुडेर पर आकर बैठती है। जितने मुंह उतनी बातें। पर कभी भी किसी ने ये सवाल नहीं किया कि इस घटना को खुद किसने अपनी आंखों से देखा था? अगर देखा था तो वह कैसे चुडैल के वश में आने से बच गया? क्यों नहीं उसने चीख पुकार मचा कर औरों का ध्यान खीचने की कोशिश की?
कभी-कभी कुछ लोग तो प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा भी करते हैं और बताते हैं कि वे इस लिये बच गये कि उस औरत को देखते ही उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया था। बीच में कछ नई विचारधारा के लोगों ने ऊपर से ही कुये के अन्दर झांकने की कोशिश की थी पर कुआं इतना गहरा था कि ऊपर से कुछ दिखाई ही नहीं दिया तब उन्होने दो तीन पेट्रोमेक्स तार में बांध कर कुयें के अन्दर डालने की कोशिश की। अचानक कुयें के अन्दर से नीली हरी रोशनी निकलने लगी फिर एक विस्फोट हुआ। सारे लोग सिर पर पांव रख कर भागे।
मीडिया ने इस खबर को काफी बढ़ा-चढा कर प्रसारित किया और ये सिद्ध करने में कोई कसर नहीं रखी कि कुयें में किसी चुडैल का निवास है। बहुत से वैज्ञानिक सोच वाले लोगों ने इसके खण्डन की कोशिश भी की पर जनसाधरण में आज भी ये मान्यता है कि उस कुयें में चुडैल रहती है। जो सबेरे के घुंधलके में तरह-तरह के रूप (इंसान से लेकर जानवर तक के) बनाकर अपनें शिकार के लिये कुये से बाहर आती है।
अब हाल ये है कि रात की तो बात दूर दिन में भी लोग उस कुये के पास से नहीं निकलते। अगर निकलना भी पडे तो वहां से गुजरते समय हुनमान चालीसा पढ़ते रहते हैं। लोग अब उसे बाकायदा चुडैल वाला कुआं कहने लगे हैं। संयोग से एक बार ऐसा हुआ कि कुयें के पास जिस किसान का खेत था उसे सबेरे के धुंधलके में उस खेत हल चलाते समय शायद सांप ने डंस लिया। चुडैल के डर से उसका इलाज नहीं करवाया गया था। तमाम झाड-फूंक के बाद उसकी मृत्यु हो गयी। गांव के लोगों ने उपचार के आभाव में हुई इस मृत्यु को कुयें वाली चुडैल के खाते में ही लिख दिया। अब तो हालत ये है कि लोग ये सोच कर डरे रहते हैं कि गांव पर कोई आपत्ति आने वाली है। जब भी गांव में कोई शादी-ब्याह, किसी के यहां बच्चे का जन्म या कोई और मांगलिक कार्यक्रम होता है तो लोग उस समय इस कुयें वाली चुडैल का हिस्सा निकालना नहीं भूलते। इस हिस्से को एक काले कपड़े में बांध कर शनिवार के दिन उस कुयें में डाल दिया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि माता हम पर कृपा रखना। हमारे इस मांगलिक कार्य में कोई विघ्न न डालना।
बरसों से इस कुयें वाली चुडैल के बारे में अनेक कथायें कहीं-सुनी जाती हैं। हर साल उनमें एक दो घटनायें और जुड़ जाती हैं। प्रशांत मूलत: इसी गांव का रहने वाला है।चूंकि उसके पिता सरकारी सेवा में हैं अत: वह अपने परिवार के साथ शहर में ही रहता है। वहीं के एक स्कूल में आठवी कक्षा में पढ़ता है। चूंकि ये शहर गांव से बहुत दूर है इसलिये वह अपने परिवार के साथ सिर्फ गर्मी की लम्बी छुट्टियों में ही गांव आता है। गांव आते ही उसे उसके ताऊ जी चेतावनी देते हैं, "खबरदार, चुडैल वाले कुयें की तरफ न जाना।"
उसने भी अपनी दादी और ताऊ के मुह से चुडैल की बहुत सारी कहानियां सुनीं है। लेकिन प्रशान्त का मन है कि मानता नहीं। वह देखना चाहता है कि आखिर चुडैल वाले कुये में है क्या ? उसे डर भी लगता है, एक तरफ तो चुडैल से तो दूसरी तरह उसे भी ज्यादा ताऊ जी से।
पिछली बार जब उसने अपने गांव में कही जाने वालीं ये चुडैल की कहानियां अपने विज्ञान के अध्यापक को सुनाईं थीं तो वे खूब हंसे थे। प्रशांत चिढ़ गया, "आप मानोगे नहीं पर ये सब सच है। मेरे गांव के कितने लोगों ने तो उसे देखा तक है।"
उसके विज्ञान अध्यापक काफी देर तक उसे समझाते रहे कि ये सब कहानिया कोरी गप्पें हैं पर प्रशान्त तर्क पर तर्क दिये जा रहा था। अतत: वे बोले, "ठीक है इस बार मैं भी चलूंगा तुम्हारे साथ, तुम्हारे गांव, तुम्हारी इस चुडैल आंटी से मिलने।"
इसी सिलसिले में वे एक दिन प्रशांत के परिवार के साथ उसके गांव गये। वे लोग जब गांव पहुंंचे तो शाम हो चुकी थी।
"कल दिन में ही चलेंगे कुयें पर," अध्यापक जी ने सुझाव दिया।
"हां यही ठीक रहेगा। क्योंकि सबेरे को तो चुडैल निकल कर कुये की मुडेर पर बैढ़ती हैं शिकार की तलाश में। खतरा उठाना ठीक नहीं," प्रशांत के ताऊ जी ने समर्थन किया।
अध्यापक जी हंसे, "नहीं वह बात नहीं। मैं तो दिन में इसलिये जाना चाहता था क्योंकि दिन में काफी रोशनी होती है। ऐसे में नजरों का धोखा होने की सम्भावना नहीं होगी।"
"मतलब आप समझते हैं कि ये बस हम लोगों की नजरों का धोखा है?"
"शायद।"
"और ये धोखा हम सालों से खाते आ रहे हैं?" प्रशांत के ताऊ जी चिढ़ गये।
"हो सकता है," अध्यापक जी ने शान्त स्वर में उत्तर दिया।
"सारे नफा नुकसान की जिम्मेदारी आपकी होगी, आप ही जानिये," ताऊ जी ने चेताया।
"कहें तो स्टाम्प पेपर पर लिख कर दे दूँ," अध्यापक जी ने जबाब दिया।
ताऊ जी पैर पटकते वापस चले गये।
रात को अध्यापक जी प्रशांत के साथ गांव के कुछ और बुजुर्गों से चुडैल वाले कुयें की जानकारी लेने निकले। लोगों ने चुडैल के बारे में एक से बढ़कर एक कहानियां अध्यापक जी का सुनाईं। कुछ ने तो उन्हें डराने की कोशिश भी की तो कुछ ने उन्हें समझाया कि वहां जाते समय अपने साथ लोहे का चाकू या और कोई लोहे की चीज जरूर लेते जायें, साथ में हनुमान चालीसा भी पढ़ते रहें।"
"हमारें शरीरों मे कुदरती तौर पर काफी लोहा होता है। क्या उतना काफी नहीं है आप लोगों की इस चुडैल के लिये," अध्यापाक जी ने मुस्करा कर जबाब दिया। कुछ लोगों ने तो उन्हें चेतावनी तक दे डाली, "आप बेकार में इस मसले टांग अड़ा रहे हैं। अगर चुडैल नाराज हो गयी तो हमारे गांव पर कहर बरपा कर देगी. . .गावं पर कोई मुसीबत आई तो इसके जिम्मेदार आप होंगे. . . अगर गांव पर मुसीबत आई तो छोंडेंगे हम आपको भी नहीं।" आदि धमकियां सुन कर वापस लौटते समय अध्यापक जी चुप थे।
प्रशांत ने ही चुप्पी तोड़ी, "यही ठीक रहेगा सर कि आप इसमें कुछ न करें।"
"कल देखा जायेगा, अभी तो चल कर सोते हैं, थकान काफी हो रही हैं," अध्यापक जी शांन्त थे।
उस रात प्रशान्त को काफी देर से नींद आई वह भी कुछ समय बाद कुत्ते भौंकने की आवाज से खुल गई। उसने उठ कर, अध्यापक जी जिस खाट पर सो रहे थे वहां आकर झांका, चारपायी खाली थी।
"कहां गये होंगे वे," उसने सोचा, "कहीं चुडैल उन लड़कियों की तरह अपने वशीभूत कर के तो नहीं ले गई उन्हें?"
उसे डर लगने लगा। उसने हड़बड़ाहट में ताऊ जी और अपने पिता को जगाया।
"मैंने पहले ही मना किया था इस मास्टर को, अब देखना क्या हो," वे भुंनभुना रहे थे।
तय ये हुआ कि आस-पड़ोस के आठ दस लोगों को लेकर चुडैल वाले कुयें की तरफ चला जाय और इस मास्टर को ढूंढा जाये। पर इसकी जरूरत नहीं पड़ी। इन सारे लोगों के जाने के लिये तैयार होने से पहले ही मास्टर जी लौट आये, हाथ में एक झोला लिये और एक टार्च पकडे।
"कहिये कैसी रही," ताऊ जी ने आगे बढ़कर व्यंग किया।
"हम लोग काफी डर गये थे हमें तो लगा था कि ..."
"चुडैल पकड़ ले गई मुझे यहीं न," प्रशांत के पिता की बात काट कर उत्तर देते हुये अध्यापक जी मुस्कराये।
"मुझे अभी वापस जाना है," अध्यापक जी ने एकाएक कहा।
"अभी इस रात में, सबेरे चले जाइयेगा," प्रशांत के ताऊ जी ने सुझाव दिया।
"नहीं अभी जाना जरूरी है। आप बस बस अड्डे तक पहुचवाने की व्यवस्था कर दें। वहां से कोई न कोई सवारी मिल ही जायेगी। मैं फिर चार-पांच दिन बाद आऊंगा।
अध्यापक जी को उसी समय भिजवाने की व्यवस्था कर दी गई।
"लगता हैं उस मास्टर की मुलाकात हो गयी है चुडैल से। तुमने उसका चेहरा देखा? लगता था कि चुडैल ने उठा-उठा कर पटका है उसे," ताऊ जी हंस रहे थे। "देखना वह मास्टर अब इस गांव की ओर दोबारा मुँह न करेगा," ताऊ जी फिब्तयां कस रहे थे, प्रशांत का चेहरा ग्लानि से लाल हो रहा था।
पर अध्यापक जी फिर वापस लौटे। अब की बार वे अकेले न थे। उनके साथ कई और लोग थे जिनमें कुछ वैज्ञानिक थे। वे अपने साथ एक क्रेन और खुदाई वाली मशीन भी लाये थे। उन लोगों ने गांव वालों से छाते मांगे। छाते खोल कर रिस्सयों में बांध कर उल्टे करके वे उन्हें कुयें में डालते फिर बाहर खींच लेते। करीब आधे घंटे ये क्रम चला। इसके बाद उन्होने बड़ी पावर के बल्ब तारों के सहारे से कुयें में लटकाये और बाहर से अपने साथ लाये जेनेरेटर से उनमें बिजली पहुंचाई। सारा कुआं रोशनी से भर गया। लोग कौतूहल से सब कुछ देख रहे थे। जिस-जिस को खबर लगती वह चुडैल वाले कुयें की तरफ दौड़ा आता। दोपहर होते -होते वहां हजारों की भीड जमा हो गयी।
पीठ पर आक्सीजन का सिलेन्डर लगा, मुंह पर मास्क लगा कर दो लोग अपनी कमर में रिस्सयां बांध कर उस जगमगाते कुये में उतर गये। इधर क्रेन के द्वारा लोहे की रस्सी में बंधी लोहे की बड़ी-बड़ी बाल्टियां कुये में लटकाई गईं। कुयें में उतरे लोगों ने इनमें कुये का कचरा भरना शुरू किया। धीरे-धीरे ढ़ेर सारा मलबा कुयें के अन्दर से निकाला गया। कुयें को उसके सोते तक खोदने का काम पूरा किया गया। इसमें काफी समय लगा।
ये सब होते -होते शाम हो गई। अध्यापक जी के साथ आये और लोग तो लौट गये पर अध्यापक जी उस दिन गॉव में ही रूक गये। सारे क्षेत्र में इस घटना की चर्चा थी। कहीं से भनक पाकर दूरदर्शन की एक टोली भी गांव में आ गई। आज मास्टर जी सबके हीरो थे। सब जानना चाहते थे कि आखिर मास्टर जी ने ये सब किया कैसे? कहां गई वह चुडैल? अगर वह चुडैल नहीं थी तो अब तक की सारी घटनायें क्या थीं। हर आदमी के मन में एक सवाल था।
शाम को दूरदर्शन की टोली के आग्रह पर प्रधान की चौपाल पर जमावड़ा हुआ। अध्यापक जी बताने लगे, "पहली बार जब प्रशांत ने इस कुयें के बारे में मुझसे बात की तो मुझे लगा था कि शायद कुयें में कोई ऐसी गैस भर गई हो जिससे कुयें में उतरने वाले व्यक्ति को सांस लेने के लिये आक्सीजन न मिल पाती हो और उनकी मौत हो जाती हो। मैने पढ़ा था कि जब कहीं भरा पानी सूखने लगता हैं तो नीचे दलदल बन जाती है। इस दलदल में जब पत्तिया, वनस्पतियां या जानवर गिर कर सड़ने लगते हैं तो यहां पर एक तरह की गैस बनने लगती है जिसे "मार्श गैस" या "दलदल की गैस" कहते हैं। इस गैस में मुख्यत: मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड होती हैं। इसे "प्राकृतिक या नेचुरल गैस" भी कहते हैं।"
"और शायद इन्हीं जहरीली गैसों की वजह से इस कुयें में उतरे लोगों की मौत हुई होगी," दूरदर्शन का ऐंकर अध्यापक जी की बात पूरी करने की कोशिश कर रहा था। "नहीं ये गैसें, खासकर मीथेन, जहरीली नहीं होती। कुयें में उतरे लोगों की मौत तो इसलिये हुई होगी कि वहां उन्हें सांस लेने के लिये आक्सीजन नहीं मिली होगी क्योंकि हवा की जगह तो वहां ये मार्श गैस भरी होगी।"
"पर उनमें से एक आदमी तो मरा नहीं था पर पागल हो गया था, वह तो कुछ और ही कहानी बताता है," एक ग्रामीण ने शंका जाहिर की।
"दरअसल जब सांस लेने लिये आक्सीजन न हो तो पहले दिमाग की कोशिकाओं में सूजन आती है, फिर वे गलने लगती हैं। उनका पर से नियंत्रण खत्म हो जाता है। चुंकि हमारा मस्तिष्क ही सांस लेने व दिल धड़कने की क्रियाओं को चलाता है फलत: ऐसा होने पर सांस और दिल धड़कने की क्रिया बंद हो जाती है और उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यदि ऐसे में किसी व्यक्ति को बचा भी लिया जाये तो कभी-कभी उसके मस्तिष्क को कुछ भागों की कोशिकायें आक्सीजन की कमी से हमेशा-हमेशा के लिये नष्ट हो जाती हैं या सूख जाती हैं। मस्तिष्क की कोशिकाओं की खासियत ये होती हैं कि एक बार नष्ट हो जाने पर वे पुनर्जीवित नहीं हो पातीं इसलिये मस्तिष्क का वह प्रभावित भाग हमेशा-हमेशा के लिये खराब हो जाता है। इसलिये ऐसा व्यक्ति तरह -तरह की असामान्य हरकतें करने लगता है जिसे आप पागल होना भी कहते हैं।"
"पर इस कुयें में लालटेन डालते ही पूरा कुंआ नीली रोशनी से भर गया था और वह विस्फोट," किसी ने पूछा।
खुली जगह पर जब दलदलों में ऐसी गैस बनती है तो वह हवा के साथ उड़ जाती है और किसी को इसका पता भी नहीं लगता पर कुयें जैसी बन्द जगहों में ये पानी के ऊपर पीले धुंधलके की तरह तैरती रहती है। अगर ऐसे में इसका सम्पर्क खुली आग से हो जाये, जैसा कि लालटेन अन्दर लटकाने के साथ हुआ होगा तो ये ऐसी बंद जगह में नीली लौ के साथ जलनें लगती है और इसमें विस्फोट हो जाता है।"
"पर आपने ये बात कैसे जाना कि ये गैस मीथेन ही है," एक दूरदर्शन संवाददाता शक जाहिर कर रहा था।
"शक तो मुझे पहले से ही था पर इसको परखना भी जरूरी था। दूसरे आप सब लोगों का कहना था कि सबेरे के धुंधलके में चुडैल से भी मुलाकात हो जाती हैं तो उससे मुलाकात करनी भी जरूरी थी।"
लोगों में हंसी की एक लहर दौड़ गयी।
"मैने सोचा कि चुडैल से मिलने और गांव वाले तो मेरे साथ जाने से रहे तो मैने अकेले ही भोर में कुयें पर जाने की योजना बनाई, साथ मे था ये पतला तार, पांच सेल की टार्च, 50 मिलीलीटर की डाक्टरी सिरिंज और इसके मुह पर लगी ये प्लाटिक की पतली ट्यूब।मैं इसको लेकर कुयें पर गया। मैने पहले पतले तार में बांध कर अपनी टार्च जलाकर कुयें में लटकाई। वहां न नीली रोशनी थी और न कोई विस्फोट हुआ क्योंकि टार्च में लालटेन की तरह कोई खुली आग तो होती नहीं। कोई और असमान्य बात भी नजर नहीं आई। फिर मैने उस प्लास्टिक की पतली ट्यूब के अलगे सिरे पर लकडी का टुकड़ा बांधकर कुयें में लटकाया।"
"लकडी का टुकड़ा क्यों," किसी ने पूछा।
"ताकि इस प्लास्टिक ट्यूब का अलगा हिस्सा मुड़े नहीं और ट्यूब आसानी से कुयें की तली तक पहुंच जाये। इसे मैने 50 मिलीलीटर की सिरिज में लगाकर नीचे से गैस सिरिज में भरने की कोिशश की। कई बार प्रयास करने पर जब मुझे लगा कि कुयें की गैस इस सिरिंज में आ गई होगी तो मैने तेजी से इसकें मुंह पर लगी सिरिज के मुंह से प्लास्टिक की नली हटाकर एक मोमबत्ती का टुकडा फंसा दिया ताकि इसमें भरी गैस वापस न निकल जाये। सिरिज के दूसरे हिस्से को भी मैने पिघली मोम से भरकर सील कर दिया। इस सिरिज को लेकर मैं तुरंत रात में ही अपनी प्रयोगशाला को चला गया ताकि गैस लीक न हो जाये। वहां मेरा शक सही निकला। परीक्षणों में पता चला कि सिरिंज में भरी गैस "मार्श गैस" ही है, मुख्यत: मीथेन।
"आपकी चुडैल से मुलाकात हुई उस दिन?" किसी ने चुटकी ली।
"हां हुई।"
"क्या!" कई लोगों ने आश्चर्य से कहा।
"हां, जब मैं कुयें की तरफ बढ़ रहा था तो अंधेरे में मुझे दो आंखें चमकती दिखाई दीं। मैनें टार्च की रोशनी उन पर डाली तो सारा मामला समझ में आया।"
"कैसा मामला?"
"कुये पर पहले कभी घिर्री लगाने के लिये उसकी जगत पर दो खम्भे बनाये गये होंगे। वक्त के साथ एक खम्भा तो गिर गया है पर एक अभी खड़ा है।"
सबने स्वीकृति में सिर हिलाया।
"उसी खम्भे पर आकर बैठती थी ये बिल्ली"
"बिल्ली?" कई आवाजें एक साथ आईं।
"हां बिल्ली यानि कि आपकी चुडैल। बिल्ली की आंखों में एक खास किस्म का पदार्थ होता है जिससे उसकी आंखें अंधेरे में भी चमकती हैं। आप लोगो ने देखा होगा?" भीड में से बहुत से लोगों ने सहमति में सिर हिलाया।
"जब ये बिल्ली उस खम्भे पर चढ़कर आंखें चमकाती थी तो अंधेरे में ये खम्भा आपको नारी आकृति जैसा लगता था और उस पर बैठी बिल्ली की आंखे आपको उसकी आंखों जैसी दिखती थीं। टार्च की रोशनी पड़ते ही घबराकर भागी ये चुडैल।"
लोगों में एक बार फिर हंसी की लहर दौड़ गई।
"पर उन लडकियों की मौतें, उस किसान की मौत?" भीड़ में कुछ खिसियाये लोग ऐसे भी थे जो अभी भी हार मानने को तैयार नहीं थे।
"लड़कियों की मौत तो निश्चित रूप से आत्महत्या ही रही होगी। कारण तो उनके घर-परिवार वाले या मित्र-परिचित ही बेहतर जानते होंगे और उस किसान को तो आप भी जानते हैंं, सांप ने काटा था। अगर झाड़-फूंक की जगह उसका इलाज कराया होता तो शायद वह भी आज जिंदा होता।"
"कुदरत ने कैसा अजीब खेल खेला है इस गांव में," किसी ने टिप्पणी की।
"नहीं ये इस तरह की पहली घटना नहीं है। दलदली क्षेत्रों में तो ऐसी घटनायें आम हैं। जब कभी इस मार्श गैस मेंं आग लग जाये तो ये दलदल के ऊपर के पानी पर नीली लौ के साथ जलने लगती है। कई देशों में ऐसी घटनाओं पर बहुत सारी किंवदंंतियां प्रचलित हैं। जिनमें आयरलैंड, स्काटलैण्ड व इन्गलैण्ड के कुछ भागों में प्रचलित "विल ओ विस्प" और न्यूफाउन्डलेण्ड में दिखने वाली "जैक-ओ- लेन्टर्न" जैसी रहस्यमयी दलदली रोशनियां बहुत मशहूर हैं। हमारे देश में ही आपने कई बार अखबारों में पढ़ा होगा कि पुराने बरसों से बंद पड़े कुयें की सफाई करने लोग उसमें उतरे और उनकी मौत हो गई।"
दूरदर्शन के एंकर ने सहमति मे सिर हिलाया।
"ऐसे कुओं की सफाई करने से पहले उनमें खुले छातों को उल्टा लटका कर बार-बार बाहर खींचना चाहिये ताकि इस तरह से उनके अन्दर भरी मार्श गैस बाहर निकल सके। इसके बाद कुयें के अन्दर जलती आग डालें। अगर नीली रोशनी न दिखे या विस्फोट न सुनाई दे तभी कुयें में उतरा जाये। हो सके तो ऐसे कुओं की सफाई के लिये इस कार्य के विशेशज्ञों का सहारा लिया जाये।"
इसके बाद महफिल बर्खास्त हो गई।
इस घटना को कई साल हो चुके हैं। कुआं खूब पानी दे रहा है। गांव वालों की पीने के पानी की समस्या काफी हद तक हल हो गयी है। अब आदमी, जानवर, बच्चे उस कुये के आस-पास ही जमे रहते हैं। अब न दिन में, न रात में कोई भी उस कुये के पास जाने से नहीं डरता। सब कुछ बदल गया है। अगर नहीं बदला हैं तो उस कुयें का नाम। लोग अब भी उसे चुडैल वाला कुआं ही कहते हैं।
बिकनी पर बहुत हुआ हंगामा मल्लिका कुछ अभिनय भी दिखा
बॉलीवुड का हर निर्माता आजकल अपनी फिल्म को प्रदर्शित करने से पूर्व उसकी बातों को लेकर कुछ-न-कुछ ऎसा मसाला मीडिया को परोसते रहते हैं जिससे उनकी फिल्म चर्चा में चलती रही, दर्शकों का ध्यान उस पर अटका रहे और प्रदर्शन के प्रथम तीन दिन वे उसका फायदा उठा सकें। हालांकि यह फायदा उन्हीं फिल्मों को मिलता है जो वास्तव में ध्यानाकर्षण वाली होती हैं। ऎसी ही एक फिल्म आगामी 24 जून को प्रदर्शित होने वाली है जिसके प्रोमोज आजकल दर्शकों को हंसाने में कामयाब हो रहे हैं। इन प्रोमोज को देखने के बाद दर्शक यह कहता है कि जब झलक ऎसी है तो पूरी फिल्म क्या होगी। हम बात कर रहे हैं निर्देशक इन्द्रकुमार की फिल्म धमाल के सी`ल डबल धमाल की जिसमें बॉलीवुड की मçल्लका शेरावत जलेबी बाई बनकर आ रही हैं। कहा जा रहा है कि उनके जलेबी बाई की चर्चा खत्म होने से प्रचार में कुछ ठहराव सा गया था इसलिए अब फिल्म के प्रचारकर्ताओं ने उनके बिकनी दृश्यों को प्रचार का हथकंडा बना लिया है।
कहा जा रहा है कि फिल्म में संजय दत्त की पत्नी का किरदार निभाने वाली मçल्लका इस फिल्म में आधी बिकनी में नजर आने वाली हैं। इस वजह से वे फिर से चर्चा में आ गयी हैं और बॉलीवुड के साथ-साथ दर्शक भी यह देखने को बेताब हैं कि देखें आखिर वह किस अंदाज में नजर आने वाली हैं। वैसे एक अरसे बाद धमाल के जरिए मçल्लका दर्शकों को पूरे समय फिल्म में दिखाई देंगी। इस फिल्म में उनके साथ एक और अभिनेत्री कंगना राणावत भी हैं। बिकनी पहन कर हंगामा बरपाने वाली मल्लिका को चाहिए कि अब अपने करियर को वे वास्तव में संवारना चाहती हैं तो जिस्म की नुमाइश को बंद कर दें और अभिनय की नुमाइश शुरू करें जिससे दर्शक उन्हें सिर्फ आइटम गर्ल के रूप में याद न करके एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में याद करें। उन्हें इस बात को गहराई से समझ जाना चाहिए कि उनके सामने कंगना भी हैं जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को अपना बना रखा है ऎसा न हो कि दर्शक उनको जलेबी बाई के रूप में ही देख और बाकी सारा प्यार कंगना पर लुटा दे।
'मैं तो चाहता हूं कि ऐसे 10 सेक्स वीडियो लीक हो जाएं'
आनेवाली फिल्म 'भिंडी बाजार' में 'यह साली जिंदगी' और 'वैसा भी होता है-2' जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके प्रशांत नारायणन भी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं|उन्होंने इस फिल्म में एक पॉकेटमार की भूमिका निभाई है जो बहुत ही बड़ा आदमी बनना चाहता है| प्रशांत को गाने का बहुत शौक है और उन्होंने इस फिल्म में एक मालदार की जेब....गाना भी गया है| वैसे प्रशांत आजकल इस फिल्म के सेक्स सीन के वीडियो लीक होने की वजह से चर्चा में हैं|जहां इस लीक सेक्स सीन में उनके साथ नजर आई वेदिता प्रताप सिंह यह सीन लीक होने से दुखी हैं वहीं प्रशांत की राय उनसे थोड़ी अलग है| उन्होंने कहा कि मैं इस सीन के लीक होने से कुछ हक्का बक्का रह गया|मुझे नहीं पता मैं इसपर कैसे रिएक्ट करूं|यह क्लिप फिल्म का एक हिस्सा है और इसे फिल्म के रिलीज़ होने से पहले लीक नहीं होना चाहिए था|मैंने खुद इस वीडियो के लीक होने के दो तीन दिन बाद इंटरनेट पर देखा| मुझे सुनने में आ रहा है कि लोगों को यह वीडियो खूब पसंद आ रहा है|इसलिए अगर ऐसा हो रहा है तो अच्छा है,मैं बहुत खुश हूं और यही चाहूंगा कि ऐसे 10 और वीडियो लीक हो जाएं|आख़िरकार यह फिल्म का सिर्फ एक सीन है न कि सेक्स वीडियो स्कैंडल|
14 जून 2011
11 जून 2011
धरती में समा गए धरती मां के लाल, बहा आसुंओ का सैलाब
बागबाहरा.बस्तर संभाग के नारायणपुर से 25 किमी दूर ओरछा रोड पर झाराघाटी में गुरुवार की तड़के सुबह सीएएफ कैंप पर हुए नक्सली हमले में शहीद जवानों ताराचंद निर्मलकर और राजेंद्र दीवान को शुक्रवार की सुबह उनके गृहग्राम खुसरुपाली में गमगीन माहौल में अंतिम बिदाई दी गई।
गुरुवार की तड़के सुबह कैंप के बाहर जंगल की ओर नित्यकर्म के लिए निकले जवानों को निशाना बनाने के बाद मोर्चा नं. 6 में तैनात संतरी को भी नक्सलियों ने गोली मार दी थी। अपने गांव के लाडले सपूतों की शहादत की खबर ग्राम खुसरुपाली के ग्रामीणों को शाम तक मिली और पूरे गांव में शोक छा गया।
शहीदों को परिजनों को धीर-धीरे देर रात तक दी गई। गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात शहीदों का पार्थिव देह खुसरुपाली पहुंचा तो परिजनों समेत समस्त ग्रामीणों की आंखें नम हो गई। शहीद जवानों को परिजनों के आंसू थम नहीं रहे थे। उनके करुण क्रंदन ने पूरे ग्राम के ग्रामीणों को भावविह्वल कर दिया।
शुक्रवार की सुबह पूरा गांव शहीद जवानों का अंतिम दर्शन करने तथा उनको श्रद्धासुमन अर्पित करने उमड़ पड़ा था। सुबह 9 बजे दोनों शहीद जवानों की अंतिम यात्रा निकली। इसमें शरीक लोग सभी लोग भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी की जय जयकार कर रहे थे और शहीद तारा निर्मलकर व राजेंद्र दीवान अमर रहे तथा शहीदों का यह बलिदान याद रखेगा हिंदुस्तान के नारे लगा रहे थे।
अंत्येष्टि स्थल पर ही बाद में शहीद जवानो को दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस तरह धरती मां के पुत्र उनकी सेवा के संकल्प की पूर्ति करके धरती में समा गए।
विदित हो कि शहीद ताराचंद निर्मलकर और शहीद राजेंद्र दीवान दोनों ही ग्राम खुसरुपाली के सपूत थे। जिन्होंने एक साथ रहकर पढ़ाई की और दो वर्ष पहले ही छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस बल (सीएएफ) में भर्ती हुए थे।
डेढ़ माह पूर्व सीएएफ ने जब पूरी तैयारी के साथ यहां कैंप स्थापित किया था तब दोनों शहीद वहीं तैनात किए गए थे। दोनों शहीद ताराचंद उम्र 26 वर्ष व राजेंद्र उम्र 24 वर्ष अविवाहित थे और हाल ही में अपने परिजनों व ग्रामवासियों से मिलकर अपनी ड्यूटी पर लौटे थे।
ताराचंद्र के पिता रामाधार निर्मलकर कृषि कार्य करते हैं जबकि राजेंद्र के पिता रोशनलाल दीवान मजदूरी करते हैं। शासन की शहीदों की सम्मानपूर्ण अंत्येष्टि के लिए प्रत्येक परिवार को 31,240 रुपए की तात्कालिक राशि मुहैया कराई गई है।
नम आंखों से शहीद चंदन को अंतिम विदाई
नारायणपुर जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर झरघाटी स्थित सीएसएफ 16वीं बटालियन के बेस कैंप में सेवाएं दे रहे जवानों पर सुबह 5 बजे नक्सलियों ने घात लगाकर कर दिया जिसमें 5 जवान शहीद हो गए। जिसमें गनेकेरा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम का 24 वर्षीय आदिवासी नवयुवक चंदनसिंह पिता मंगलसिंह पोर्ते भी शामिल था। चंदन के शहीद होने की जानकारी मिलते ही गांव में शोक फैल गया। वह अपने परिवार का सबसे छोटा सदस्य था। उसके बड़े भाई दुबे लाल व भाभी ममता पोर्ते शिक्षा कर्मी है।
परिवार के पास छह एकड़ भूमि है जिस पर उसके माता-पिता खेती किसानी करते हैं। नवागांव की आबादी एक हजार है उसके तीन सौ आदिवासी परिवार है। 8 जनवरी 1987 को जन्मे चंदन सिंह पोर्ते शुरू से ही मेधावी रहा। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व सीएसएफ 16 वीं बटालियन से जुड़ा।
बढ़ा महापौर और पार्षदों का मानदेय
.राज्य शासन ने महापौर, सभापति और पार्षदों का मानदेय बढ़ा दिया है। महापौर को अब प्रतिमाह 11 हजार रुपए मानदेय मिलेगा। अब तक उन्हें चार हजार रुपए मानदेय मिलता था। इसी प्रकार उनका सत्कार भत्ता 2500 रुपए कर दिया गया है।
अब तक उन्हें सत्कार भत्ता नहीं मिलता था। नगर निगम के सभापति को अब 9 हजार रुपए मानदेय मासिक मिलेगा। इन्हें तीन हजार रुपए मिलता था। इन्हें भी अब सत्कार भत्ता के रूप में 1400 रुपए मिलेगा। पार्षदों को 6000 रुपए मासिक भुगतान होगा। विभिन्न बैठकों में इन्हें 225 रुपए प्रति बैठक की दर से भुगतान होगा। पर महीने में यह राशि 900 रुपए से अधिक नहीं हो सकेगी।
राज्य के 24 नगर पालिका के अध्यक्ष को अब 3 हजार रुपए मानदेय व 1800 रुपए भत्ता मिलेगा। उपाध्यक्ष को 2400 रुपए मानदेय व 800 रुपए भत्ता मिलेगा तथा पार्षद को 1800 रुपए हर महीने मानदेय दिया जाएगा।
राज्य की 151 नगर पंचायतों के अध्यक्ष को 2400 रुपए मानदेय व 1100 रुपए भत्ता, उपाध्यक्ष को 2100 रुपए मानदेय व 800 रुपए भत्ता दिया जाएगा। साथ ही पार्षदों को 1400 रुपए मानदेय दिया जाएगा। राज्य शासन ने इनके वेतन में वृद्धि करने का निर्णय पहले लिया था।
इसी तारतम्य में आज नगरीय प्रशासन विभाग के अवर सचिव एम आर ठाकुर ने आदेश जारी किया। जन प्रतिनिधियों को बढ़ा हुआ वेतन राजपत्र में प्रकाशित होने के दिन के तत्काल बाद से मिलना शुरू हो जाएगा।
किसको कितना मिलेगा
महापौर 11000
सभापति 9000
पार्षद 6000
नगर पालिका अध्यक्ष 3000
नगर पालिका उपाध्यक्ष 2400
नगर पालिका पार्षद 1800
नगर पंचायत अध्यक्ष 2400
नगर पंचायत उपाध्यक्ष 2100
नगर पंचायत पार्षद 1400
अब तक उन्हें सत्कार भत्ता नहीं मिलता था। नगर निगम के सभापति को अब 9 हजार रुपए मानदेय मासिक मिलेगा। इन्हें तीन हजार रुपए मिलता था। इन्हें भी अब सत्कार भत्ता के रूप में 1400 रुपए मिलेगा। पार्षदों को 6000 रुपए मासिक भुगतान होगा। विभिन्न बैठकों में इन्हें 225 रुपए प्रति बैठक की दर से भुगतान होगा। पर महीने में यह राशि 900 रुपए से अधिक नहीं हो सकेगी।
राज्य के 24 नगर पालिका के अध्यक्ष को अब 3 हजार रुपए मानदेय व 1800 रुपए भत्ता मिलेगा। उपाध्यक्ष को 2400 रुपए मानदेय व 800 रुपए भत्ता मिलेगा तथा पार्षद को 1800 रुपए हर महीने मानदेय दिया जाएगा।
राज्य की 151 नगर पंचायतों के अध्यक्ष को 2400 रुपए मानदेय व 1100 रुपए भत्ता, उपाध्यक्ष को 2100 रुपए मानदेय व 800 रुपए भत्ता दिया जाएगा। साथ ही पार्षदों को 1400 रुपए मानदेय दिया जाएगा। राज्य शासन ने इनके वेतन में वृद्धि करने का निर्णय पहले लिया था।
इसी तारतम्य में आज नगरीय प्रशासन विभाग के अवर सचिव एम आर ठाकुर ने आदेश जारी किया। जन प्रतिनिधियों को बढ़ा हुआ वेतन राजपत्र में प्रकाशित होने के दिन के तत्काल बाद से मिलना शुरू हो जाएगा।
किसको कितना मिलेगा
महापौर 11000
सभापति 9000
पार्षद 6000
नगर पालिका अध्यक्ष 3000
नगर पालिका उपाध्यक्ष 2400
नगर पालिका पार्षद 1800
नगर पंचायत अध्यक्ष 2400
नगर पंचायत उपाध्यक्ष 2100
नगर पंचायत पार्षद 1400
लव सेक्स और धोखा: नाबालिग को मां बना कर छोड़ दिया
रायपुर..नाबालिग युवती से पहले प्यार फिर बलात्कार इसके बाद मां बना कर छोड़ दिया दर-दर को भटकने। यह घटना पखांजूर थानांतर्गत ग्राम पीवी 120 की है जिसमें अलग-अलग दौर से गुजर चुकी नाबालिग मां ने अंतत: पुलिस की शरण ली।
नाबालिग मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि पीवी 120 निवासी 19 वर्षीय तापस हालधर पिता प्रफुल्ल ने पहले उससे प्रेम किया। अप्रैल 2010 में प्रारंभ हुए इस प्रेम के बाद युवक ने नाबालिग युवती को शादी का प्रलोभन देकर जबरदस्ती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया।
युवक इसके बाद लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। कुछ दिन बाद युवती गर्भवती हो गई। युवती ने युवक से शादी करने को कहा तो प्यार में किए सारे वादों को दर किनार करते हुए युवक ने शादी से इंकार कर दिया।
प्यार में धोखा खाई युवती ने गांव के प्रमुखों को अपनी आपबीती बताई जिसके बाद गांव में बैठक आयोजित की गई। बैठक में युवक ने शादी करने की सहमति जताई तथा युवती को अपने साथ ले गया।
युवक ने कुछ दिन तक युवती को अपने साथ रखा। इस दौरान 16 वर्षीय नाबालिग युवती ने एक पुत्र को जन्म दिया। शिशु के जन्म के बाद युवक ने युवती से मारपीट कर घर से निकाल दिया। छह माह के शिशु के साथ दर-दर भटक रही नाबालिग मां ने घटना की शिकायत पुलिस में की।
हालांकि युवक ने युवती से शादी कर ली थी लेकिन युवती के नाबालिग होने के कारण पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाते हुए धारा 376 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया।
नाबालिग मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि पीवी 120 निवासी 19 वर्षीय तापस हालधर पिता प्रफुल्ल ने पहले उससे प्रेम किया। अप्रैल 2010 में प्रारंभ हुए इस प्रेम के बाद युवक ने नाबालिग युवती को शादी का प्रलोभन देकर जबरदस्ती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया।
युवक इसके बाद लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। कुछ दिन बाद युवती गर्भवती हो गई। युवती ने युवक से शादी करने को कहा तो प्यार में किए सारे वादों को दर किनार करते हुए युवक ने शादी से इंकार कर दिया।
प्यार में धोखा खाई युवती ने गांव के प्रमुखों को अपनी आपबीती बताई जिसके बाद गांव में बैठक आयोजित की गई। बैठक में युवक ने शादी करने की सहमति जताई तथा युवती को अपने साथ ले गया।
युवक ने कुछ दिन तक युवती को अपने साथ रखा। इस दौरान 16 वर्षीय नाबालिग युवती ने एक पुत्र को जन्म दिया। शिशु के जन्म के बाद युवक ने युवती से मारपीट कर घर से निकाल दिया। छह माह के शिशु के साथ दर-दर भटक रही नाबालिग मां ने घटना की शिकायत पुलिस में की।
हालांकि युवक ने युवती से शादी कर ली थी लेकिन युवती के नाबालिग होने के कारण पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाते हुए धारा 376 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया।
खुशखबरी: सस्ती हो गई BSNL की 3जी इंटरनेट सर्विस
देश की सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अपनी 3जी इंटरनेट दरों में जोरदार कटौती कर दी है। यानी अब अगर आप बीएसएनएल के डाटा कार्ड के जरिए इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे तो आपको बेहद कम कीमत चुकानी पड़ेगी। कंपनी के नए प्लान के मुताबिक अब 2000 रुपए में 22 जीबी तक इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
जानकारों का कहना है कि कंपनी के इस नए प्लान से प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी चुनौती मिलने वाली है। यह भी कहा जा रहा है कि बीएसएनएल के इस ताजा ऐलान के बाद प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां भी 3जी इंटरनेट सर्विस को लेकर लुभावने ऑफर्स का ऐलान कर सकती हैं।
10 जून 2011
आग जलती रहे, जलती रहे,
एक तीखी आँच ने
इस जन्म का हर पल छुआ,
आता हुआ दिन छुआ
हाथों से गुज़रता कल छुआ
हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा,
फूल-पत्ती, फल छुआ
जो मुझे छूने चली
हर उस हवा का आँचल छुआ !
...प्रहर कोई भी नहीं बीता अछूता
आग के सम्पर्क से
दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में
मैं उबलता रहा पानी-सा
परे हर तर्क से।
एक चौथाई उमर
यों खौलते बीती बिना अवकाश
सुख कहाँ
यों भाप बन-बनकर चुका,
रीता,
भटकता-
छानता आकाश !
आह ! कैसा कठिन
...कैसा पोच मेरा भाग !
आग, चारों ओर मेरे
आग केवल भाग !
सुख नहीं यों खौलने में सुख नहीं कोई,
पर अभी जागी नहीं वह चेतना सोयी-;
वह, समय की प्रतीक्षा में है, जगेगी आप
ज्यों कि लहराती हुई ढकनें उठाती भाप !
अभी तो यह आग जलती रहे, जलती रहे,
ज़िन्दगी यों ही कड़ाहों में उबलती रहे।
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