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28 अप्रैल 2011

डीबी स्टार नेटवर्क

ध्यान से देखिए यह तस्वीरें कुछ ख़ास हैं

 
 
 
                             दुनिया में कलाकारों की कमी नहीं है। ये लोग कला के नए-नए तरीके भी तलाशते रहते हैं। ऐसे ही हैं स्पेन के जुआन ओसबोर्ने। जुआन बोलने और लिखने में काम आने वाले शब्दों का इस्तेमाल तस्वीरें बनाने में करते हैं। अब तक हजारों शब्दों की मदद से वे दुनिया की कई मशहूर पेंटिंग्स की नकल तैयार कर चुके हैं।
पहले वे तस्वीर के विषय से जुड़े मशहूर शब्द तलाशते हैं। फिर नेटबुक और कस्टम सॉफ्टवेयर की मदद से उन्हें तस्वीर में पिरोते हैं। जुआन का कहना है कि शब्दों में ताकत होती है।
ये सीधे इंसान के दिमाग पर असर करते हैं। ये मेरी तस्वीरों को भी अलग पहचान देते हैं। इस तरह ये तस्वीरें कैमरे से ली गई तस्वीरों से अलग बन जाती हैं। इन तस्वीरों के बारे में जुआन बताते हैं कि इनमें एक कहानी भी होती है, जिसे पढ़ा जा सकता है। ये कहानी भी अनोखी होती है।
लोगों को यकीन नहीं होता कि जुआन सिर्फ नेटबुक और सॉफ्टवेयर से काम करते हैं, लेकिन यही सच है। एक तस्वीर तैयार करने में दो लाख से ज्यादा शब्दों की जरूरत पड़ती है। इतने शब्दों को एक साथ जोड़कर तस्वीर का रूप देने में काफी वक्त लगता है। फिर भी ये युवा कलाकार कहते हैं कि वे काफी समय से ये काम कर रहे हैं।
इसलिए उन्हें एक तस्वीर बनाने में सिर्फ कुछ दिन लगते हैं। फिलहाल उनकी बनाई सबसे बड़ी तस्वीर में पांच लाख शब्द थे। अब उनका लक्ष्य दस लाख शब्दों वाली तस्वीर बनाना है। इसमें एक समस्या आ रही है, उन्हें इतनी बड़ी तस्वीर छापने वाला प्रिंटर नहीं मिल रहा है।

19 अप्रैल 2011

great india

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सुविचार

   http://fristpage.blogspot.com/2010_10_03_archive.html



सुविचार
जो  तर्क  को  अनसुना  कर  दे , वह  कहर  है .
जो  तर्क  ही  नहीं  कर  सके , वह  मूर्ख  है .
और  जो   तर्क करने  का  साहस  ही  नहीं  दिखा  सके  वह, गुलाम  है.



17 अप्रैल 2011

movment

ऋतेष 
दुर्र्र्ग,16 अप्रैल ()। स्वाभिमान मंच ·ी सियासी असफलता एवं डा विनाय· सेन ·े पक्ष में जबर्दस्त आम जनसमर्थन यद्यपि दो अलग-अलग मसले है, ·िंतु गहरायी में जाने पर दो मसले से जुड़े दो अलग-अलग पहलू नजर आते हैँ। स्वाभिमान मंच ने स्थानीयता ·ा भ्रम तोड़ा है तो डा सेन ·े मसले ने क्षेत्रीय सर·ारों ·ी जद से अलहदा जा·र दुनियावी सूर्खियां पायी। दरअसल, जननाय· ·ुछ दिन या ·ुछ महीनों में ·ोई नहीं बनता। लंबे जनआंदोलन एवं बहुस्तरीय सांस्·ृति· चेतना से जुड़·र ही व्याप· लो·समाज ·ी तवज्जों मिल पाती है।
एमबीबीएस व एमडी ·ी डिग्री प्राप्त डा विनाय· सेन ·ो जिस तरह देश भर में समर्थन मिला और बुद्धिजीवी उन·े पीछे खड़े दिखे, उससे स्पष्ट आम धारणा बनी ·ि देशद्रोह ·े आरोप में जिस व्यक्ति ·ो ·ैद में डाल दिया गया, वह जनआंदोलन ·ा प्रती· ए·ाए· नहीं बना। वहीं दूसरी ओर शिक्ष·  ·े पेशे से राजनीति में आए ताराचंद साहू यदि 18 बरस त· सांसद व दस साल त· विधाय· रहने ·े बावजूद स्वाभिमान मंच ·ो स्थानीयता ·ी आवाज नहीं बना पाए, तो इस·े पीछे छुपी इबारत ·ो भी व्याप· परिप्रेक्ष्य में समझने ·ी दर·ार है। बदल रही दुनिया ·े साथ छत्तीसगढ़ व छत्तीसगढिय़ा ·ी भावना भी विस्तार पा चु·ी हैँं। अब वह समय नहीं रहा ·ि ·ोई नेता जनभावनाओं ·ा इस्तेमाल स्वहित साधने में ·रता रहे और उस·े पीछे चलने वाली भीड़ ·ो ·ुछ समझ न आए। आज स्पष्ट व बड़े उद्धेश्य बताए बिना व्याप· जनसमुह ·ो अपने पीछे देर त· नहीं चलाया जा स·ता। अलबत्ता, स्वाभिमान मंच ·ा हश्र ·ा आशय यह भी नहीं ·ि यहंा ·िसी क्षेत्रीय पार्टी ·े लिए ·ोई जगह नहीं बची है। छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय दलों ·ो अब त· सफलता इसीलिए नहीं मिली, क्यों·ि अब त· ·े सारे बड़े प्रयास सिर्फ अपने राजनीति· हितों ·ो साधने ·े बतौर ·िया गया। मुद्दों पर आधारित दूरगामी लड़ाई ·ी योजना ले·र ·ोई सच्चा योद्धा जब दृढ़ता से खड़ा होगा, तब जनता खुद-ब-खुद तीसरे मोर्चे ·ी जरूरत महसूस ·रेगी। वैसे अभी छत्तीसगढ़ में ऐसे हालात नहीं है और आगामी पांच-दस सालों त· संभावना भी नहीं दिखती। दूसरी ओर, डा विनाय· सेन जैसे लोग क्षुद्र राजनीति· महत्व·ांक्षा बिसार ·र जनहित में ·ष्ट उठाते है, सर·ार ·ी आंखों में ·िर·िरी बन जाते है और जेल में डाल दिये जाते हैं, तब जनता ·ो उनमें जनआंदोलन ·े नाय· ·ी छबि नजर आती है। देश व समाज ·ो आज ·ोरी लफ्फाजी ·रने वाले नेताओं से एलर्जी हो गई है। ·रप्शन ·े खिलाफ ·ई राजनीति· पार्टियां लंबे समय से आंदोलन खड़े ·रने ·ा प्रयास ·रती रही, मगर जनसमर्थन ·िसी ·ो नहीं मिला। मगर समाजि· ·ार्य·र्ता ·े तौर पर जब अन्ना हजारे ने शंख फंू·ी, तो उस·ी गूंज पूरे देश में शिद्दत से सुनाई पड़ी। यहंा त· स्वयं अन्ना ·ो ·हना पड़ा ·ि उन्होंने आंदोलन इतना बड़ा होने ·ी उम्मीद नहीं ·ी थी।
उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी सत्ता व वर्चस्व ·ी लड़ाई से आमजन ऊब चु·े हैँ। बदलाव तो चाहिए, पर सब समझ गए हैं ·ि राजनीति· ·ी राह से  वह नहीं आएगी। राजनीति· उठापट· से त्रस्त हो चली जनता ·ो अपने व्याप· सोशल पावर से बड़ी उम्मीद है।


15 अप्रैल 2011

Dusyant ji ki kavita

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13 अप्रैल 2011

nice line

चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे दर पर नहीं आए
तुम झुkते नहीं, और मैं चौंखटे ऊंची ·kaर पाता नहीं

09 अप्रैल 2011

nag ki virah

दुर्ग। माना जाता है ·ि नाग-नागिन ·ी जोड़ी में से यदि नाग ·ो ·ोई नु·सान पहुंचाता है अथवा मार देता है तो आगे चल ·र नागिन उस·ा बदला जरूर लेती है। ·हते हैं ·ि नागिन ·ी आंख में नाग ·ो मारने वाले ·ा अक्स स्थायी रूप से ·ैद हो जाता है। पता नहीं ·ैसे, पर ·हते हैं ·ि लाखों लोगों ·े बीच भी नागिन अपराधी ·ो पहचान लेती है और सजा भी देती है। महाभारत में तक्ष· नाग ·ी पौराणि· ·था से सभी वा·िफ हैँ।  नाग-नागिन ·ी जोड़ी से जुड़े ·ई मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं।
दुर्ग जिला मुख्यालय से 55 ·िलोमीटर ·े फासले पर अवस्थित ग्राम पंचायत भिंभौरी ·े शीतला तालाब में स्थित पुराने शिव चबुतरे में रहने वाला ए· नाग सांप बीते ढाई सालों से विरह वेदना में जल-जल·र अपने साथी ·ो यहां-वहंा तलाश रहा है। मगर, उस नागराज ·ी तलाश ·ब खत्म होगी, ·ोई नहीं जानता।
ग्राम भिंभौरी में रहने वाले वरिष्ठ शिक्ष· राधेश्याम पांडेय बताते हैं ·ि शीतला तालाब में अरसे से वह नाग-नागिन ·ो जोड़ा निवासरत् था। प्रेम ·्रीड़ा ·रते गाहे-बगाहे ग्रामीणों ·ो वे नजर भी आते थे। नाग-नागिन ·े इस जोड़े ने ·भी ·िसी ग्रामीण ·ो नु·सान नहीं पहुंचाया था।
ढाई बरस पहले उस गांव में ए· सपेरा आया था, पूछने पर गांव वालों ने उसे बताया ·ि गांव ·े शीतला तालाब स्थित शिवलिंग चबुतरे में नाग-नागिन ·ा ए· जोड़ा रहता है। प्रणय ·्रीड़ा ·रते वे ग्रामीणों ·ो नजर भी आते हैं। ·ुछ ग्रामीणों ·े साथ शिव चबुतरा पहुंच ·र सपेरे ने बिन बजानी शुरू ·र दी। ·रीब ढाई मिनट बाद दो अलग-अलग दिशाओं से नाग-नागिन ·ा जोड़ा उस·े नि·ट आ गए, बीन बजाना छोड़·र सपेरे ने अपने थैले से ·ुछ जड़ी-बुटी नि·ाल ·र नागिन पर फें·ा, जड़ी पड़ते ही नागिन बेसूध सी हो गई, वहीं नाग बिजली ·ी रफ्तार से चबुतरे में बने सुराख में छुप गया। बस्ती ·े बीच में ला·र सपेरे ने नागिन ·ा सामुहि· प्रदर्शन ·िया। यहंा त· ए· व्यक्ति ·े गले में नागिन ·ो लपेट दिया, मगर नागिन वैसी ही बेसूध पड़ी रही। तदुपंरात नागिन ·ो अपने साथ रख·र सपेरा रवाना हो गया, पर ·िसी ग्रामीण ने उस·ा विरोध नहीं ·िया।
इस वा·ये ·ो हुए ढाई साल गुजर गया। मगर प्रेमि·ा ·े बिछोह ·े विरह में उक्त नागराज आज त· तड़पता घूम रहा है। ग्रामीण बताते हैं ·ि शिव चबुतरे में बने अपने बिल से नि·ल ·र नाग छटपटाहट में आसपास घुमते नजर आता है। प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों ·े मुताबि· अ·ेले नाग ·ो देख·र यूं महसूस होता है, जैसे वह अपने संगनी ·ी शिद्दत से तलाश ·र रहा है। चैत्र नवरात्रि पर गांव ·े उक्त शीतला तालाब में भी दीप प्रज्जवलित ·िया गया है। गाहे-बगाहे नाग सांप ग्रामीणों ·ो नजर आ जाता है। ग्रामीण उस घड़ी ·ो ·ोसते हैं, उन·े गांव में ·ोई अनजान सपेरा आया और नागिन ·ो उठा ले गया। ग्रामीणों ·ो अब यह पीड़ा साल रही है ·ि उन्होंने क्यों सपेरे ·ो नाग-नागिन ·ी जोड़ी होने ·ी जान·ारी दी, और नागिन ·ो बंध· बना·र क्यों ले जाने दिया।
 बताते हैं ·ि नागिन में नैसर्गि· देवीय शक्ति अधि· होती है। उस·े बनिस्बत् नाग सांप में ·म। यदि नाग सपेरे ·ा शि·ार बनता तो नागिन उसे ढूंढ नि·ालती। अमूमन, इस·े प्रमाण नहीं है ·ि नाग सांप भी अपने दुश्मन से बदला लेता हो।
भिंभौरी में ·ंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाने वाले रा·ेश टि·रिहा ने तीन साल पहले नाग-नागिन ·ो ·लोल-·्रीड़ा ·रते हुए उन्होंने आटोमेटि· ·ैमरे से फोटो उतारी थी। रा·ेश ·े मुताबि· अ·ेला घुमता नागराज आज भी नजर आता है। खासतौर पर चैत्र व शरद नवरात्रि ·े दरम्यान वह ज्यादा नजर आता है। 

...आग जलनी चाहिए

                    ....आग जलनी चाहिए                         ( dusyant ki kavita)
 हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई
गंगा निकलनी चाहिए।   
आज यह दीवार, 
परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी
कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।   
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।  
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद
नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। 

  मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, 
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

WAH RE ! ATULYA BHARAT



new india




संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरनास्थल जंतर मंतर पर 5 अप्रैल से आमरण अनशन करके देश की आम जनता के हितों को रौंदने वाली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की निकम्मी सरकार को जनलोकपाल विधेयक को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने वाले देश के आधुनिक गांधी अण्णा हजारे को शतः शतः नमन्

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले समाज सेवी अन्ना हजारे ने कहा, 'मेरा काम देश की सेवा है। सत्ता के विकेंद्रीकरण से ही भ्रष्टाचार पर रोक संभव है। जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, तब मैं लोकपाल बिल के लड़ता रहूंगा। मुझे पैसे का लालच नहीं है। मैं पिछले 25 साल से घर नहीं गया हूं और मुझे जनता के समर्थन से शक्ति मिलती है।'

--अब देश को गांधी व जयप्रकाश नारायण के बाद एक ऐसा जननायक मिल गया जो जनविरोधी सरकारों की नाकों में नकेल डालने का काम करेंगे। आशा है अण्णा हजारे देश के साथ साथ उत्तराखण्ड की भ्रष्ट सरकार से भी जनता को मुक्ति दिलायेंगे।
  
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे वरिष्ठ गांधीवादी अन्ना हज़ारे शनिवार को अनशन तोड़ देंगे.शानिवार देर रात उन्होंने एलान किया कि सरकार ने उनकी सारी मांगें मान ली है. लेकिन जब तक सरकार के आदेश की कॉपी उनके हाथ में नहीं आ जाती तबतक उनका अनशन जारी रहेगा. उम्मीद है कि शनिवार की सुबह सरकार आदेश जारी कर देगी.

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कार्टून
 
 

meditation

योग करने वाले योगी कहलाते हैं और योगी कहते ही लंगोटधारी या गेरुए वस्त्र पहने संन्यासियों की छवि उभरती है। लेकिन आधुनिक युग में लाइफ का आनंद उठाते हुए भी ‘योगी’ हुआ जा सकता है।

जो लोग पंचसितारा सुविधाओं वाले सुइट के लिए लाखों रुपए ख़र्च कर सकते हैं, उनके लिए दुनियाभर की बेहद ख़ूबसूरत और मनमोहक लोकेशंस पर कई योगा र्रिटीट हैं। पेश है, भारत से बाहर और कुदरती ख़ूबसूरती के बीच योग का सुख देने वाले कुछ र्रिटीट्स की झलक-

ज़ंगल र्रिटीट

पेरु के वर्षा वनों में भीतरी क्षेत्र में स्थित जंगल र्रिटीट अपने नाम को सार्थक करता है। यहां आप न सिर्फ शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन को पुन: साध सकते हैं, बल्कि उनके और पर्यावरण के बीच भी तादात्म्य बना सकते हैं।

यहां गेस्ट स्थानीय सामग्रियों से तैयार बंगलों में रहते हैं, पास बहती नदी से पकड़ी गई ताजी मछलियां और स्थानीय स्तर पर उगाए गए ऑर्गेनिक उत्पाद खाते हैं और अमेजन नदी के ऊपरी ओर पत्तों से बने सेंटर में बैठकर योग करते हैं। यानी, प्रकृति के बीच शाही अंदाज।

माया तुलुम
क्विंटाना रू, मैक्सिको

समुद्र किनारे स्थित यह वेलनेस र्रिटीट और स्पा सेंटर हर साल 50 योगा इवेंट्स आयोजित करता है। किसी भी पांच या सात दिवसीय माइंड, बॉडी, स्पिरिट प्रोग्राम (एमबीएस) से जुड़ें, जिसमें वेजिटेरियन मील्स, मसाज, डे ट्रिप्स और एक स्पा भी शामिल है।

ख़ास बात यह कि शाकाहारी खाने को थोड़ा बदलने के लिए आप मछली भी ऑर्डर कर सकते हैं और स्पा में मायन क्ले मसाज से लेकर ट्रेडीशनल स्वीट लॉज तक, कुछ भी चुन सकते हैं। यहां दुनियाभर के सितारों का जमावड़ा होता है। यहां योगा सिर्फ़ अभ्यास नहीं, वे ऑफ लाइफ है, जिसे आप 41 सिंपल कबाना में रहते हुए एंजॉय करते हैं।

बिग स्काई योगा र्रिटीट

मैडिसन पर्वत श्रंखला में साढ़े सात हजार फुट की ऊंचाई पर, प्रकृति के बीच स्थित यह र्रिटीट अमेरिका के प्रसिद्ध यलोस्टोन नेशनल पार्क से एक घंटे की दूरी पर स्थित है। यह लॉज स्थानीय जंगलों की लकड़ी और नदी में पाए जाने वाले पत्थरों से बना है।

यहां 13 सुसज्जित गेस्ट रूम और कॉमन एरिया हैं। यह र्रिटीट योगा के साथ ही आउटडोर एक्टिविटीज भी ऑफर करता है। यानी, पहले योग करें और फिर जंगलो-पहाड़ों में घूमें या आधुनिक उपकरणों से लैस होकर पर्वतारोहण करें।

यहां के नजारे बड़े ख़ूबसूरत हैं और चांदनी रात के तो क्या कहने! इसके साथ ही माउंटेन थीम पर फूड और वाइन लिस्ट। सुविधाओं में गेम रूम, वर्कआउट रूम, एक बड़ा हॉट टब और वाटरफॉल भी शामिल हैं।

शिवानंदा आश्रम योगा र्रिटीट

यदि आप दुनिया के तमाम झमेलों से दूर, अपनी प्राणिक ऊर्जा को रीचार्ज करना चाहते हैं और योग के बारे में गंभीर भी हैं, तो बहामास में पैराडाइज आइलैंड से बेहतर जगह भला क्या हो सकती है!

नसाउ के शिवानंदा आश्रम योगा र्रिटीट में सबकुछ पूर्व निर्धारित है। आप सुबह छह बजे जागते हैं, उगते सूर्य के साथ ध्यान लगाते हैं, टी-टाइम तक मंत्र जाप करते हैं और दस बजे के शाकाहारी खाने के पहले दो घंटे तक हठयोग करते हैं।

दोपहर में भी यही पैटर्न होता है, साथ ही कर्मयोग का भी एक सत्र होता है, जिसमें आप आश्रम के कार्यो में मदद करते हैं। यह सब होता है समंदर के नीले पानी, व्हाइट सैंड और लहराते पाम ट्रीज के तले।

जेटोबा टेरा प्राना लर योगा

ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस योगा र्रिटीट में वेल बीइंग से जुड़ी तकरीबन हर गतिविधि होती है। हर, यानी मेडिटेशन, मंत्र, कुंडलिनी योग, यिन योग, हठयोग, पार्टनर योगा, कर्म योग, साइलेंट वाक, पवित्र डांस, फायर रिचुअल्स और जोन शिआत्सु।
इन सबके साथ ही र्रिटीट में एक स्वीट लॉज, फ्रेश वाटर पूल और होममेड चीज, रोटी और दही के साथ शाकाहारी खाने की व्यवस्था भी है। सन् 2000 में अपने फार्म में इस र्रिटीट की स्थापना से पहले पूर्व डांसर लीला ने दुनियाभर में घूमकर योगा का अध्ययन किया था।
यहां उन्होंने बच्चों के लिए भी एक स्पेशल प्रोग्राम बनाया है और धरती से फिर से जोड़ने के लिए ऑर्गेनिक गार्डन में काम करने का मौक़ा भी है। क़रीब का झरना देखना न भूलें।

beyond 2020

भास्कर न्यूज. राजनंादगांव

प्रसिद्ध संत बर्फानी दादा ने भविष्यवाणी की है कि २०२० में तृतीय विश्वयुद्ध छिड़ सकता है। वर्तमान में विभिन्न देशों में जारी सत्ता के संघर्ष व विद्रोह का चरम उसी समय दिखेगा।

इस दौरान दो महाशक्तिओं के आपस में टकराने की वजह से जन-धन की हानि भी होगी। बर्फानी दादा ने बताया कि इस युद्ध में अखंड भारत का स्वरूप उभरेगा। देश में लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा और सत्ता का विकेंद्रीकरण होगा। फिलहाल कलयुग का प्रथम चरण चल रहा है। कलयुग में ही सतयुग, द्वापर, त्रेता जैसा वातावरण बनेगा।

चौथे चरण में जब घोर कलयुग आएगा तब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ेगा। उन्होंने जापान की तरह हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, मथुरा व मुंबई में भूकंप की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि ज्यादा जनहानि नहीं होगी। समुद्र के तटीय इलाके के शहरों में पानी आ जाएगा।

war to corruption

अन्ना हजारे का मुद्दा सही
अन्ना हजारे का मुद्दा सही है। लोकपाल बिल लाने के पहले कमेटी के पदाधिकारियों के विषय में विवाद है। इस मामले में वे कांग्रेस की नीतियों के साथ हैं। लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए फिलहाल जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए।
इंग्रिड मैक्लाउड, मनोनीत सांसद लोकसभा

भाजपा का रुख स्पष्ट है
लोकपाल विधेयक के संबंध में भाजपा का स्टैंड ब्लाक से लेकर संसद तक स्पष्ट है। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद व प्रकाश जावड़ेकर के बयानों से सभी भाजपाई सहमत हैं। भाजपा ने तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लोकपाल विधेयक भी पेश किया था।
दिलीप सिंह जूदेव, सांसद बिलासपुर लोकसभा

अपने सांसद को लिखें भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक पोस्टकार्ड
यदि आप भ्रष्टाचार के विरुद्ध दैनिक भास्कर महाभियान में शामिल होना चाहते हैं तो अपने सांसद को एक पोस्टकार्ड लिखिए। आपने उन्हें वोट देकर संसद में इसीलिए भेजा है कि वे भय, भूख, भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था आपको देंगे। पूछिए अपने सांसद से कि वे भ्रष्टाचार के विरुद्ध महाभियान में क्या कर रहे हैं? क्योंकि प्रधानमंत्री और मंत्रिसमूह तक अपनी बात पहुंचाने का रास्ता आपके सांसद ही हैं।

ऐसे करें भ्रष्टाचार की शिकायत
केंद्रीय विभागों के लिए
सीबीआई भिलाई: 0788-2242900 (कार्यालय),
94258-05672, 94258-05671, 94241-00682, 94241-00683 व 94241-00684

ऑनलाइन: सीवीसी डॉट एनआईसी डॉट इन
राज्य सरकार के विभागों के लिए
एंटी करप्शन ब्यूरो: एसपी आरएस नायक
94791-90020, 0771-2424148 (का.), डीएसपी अनिल पाठक 94252-36636, 07752-250362 (का.)

04 अप्रैल 2011

इतिहास ही दृष्टि

   चर्चिल ने कहा था 
   कि अतीत में जितना पीछे देख सकते हों,  
   देखें..., भविष्य के लिए राह मिलती है. 
       भविष्य के सपने बुनने में अतीत का इतिहास ही दृष्टि देने का काम करता है


15 मार्च 2011

nange panv satyagrah

             गाँधी के देश में नंगे पांव सत्याग्रह ..            


परिवर्तन राजनीती से नहीं आती
                                       यूथ पॉवर ही उसका संवाहक होता है
बदलाव के लिए नेता की नहीं अंतरबल की जरुरत होती है
   डॉ लोहिया देश को गर्माने की बात कहते थे.
                                                वे कहते थे कि भारत में अंदरूनी दुश्मन से लड़ना नहीं आता हमें .
याद आती है.उनकी बात
                    अब सवाल यह है   
                      कि निराशा कि इस
                    स्थिति में भी हमें
                    गुस्सा क्यों नहीं आता.

                                  हम इतने ठन्डे क्यूँ है ?
 क्या ..!!
आँखे बंद कर
अपनी बारी का
इंतज़ार आप करोगे ?
या फिर ...?? दूसरी रह देखोगे.?!!?

..ठीक इसी समय जेपी ने किया था आन्दोलन का शंखनाद ...
परिवर्तन की लहर चल पड़ी है
बदलाव आने को है
उसे कोई नहीं रोक सकता
... आइये हम खुद आपना भाग्य विधाता बने.

   छेड़ दे क्रांति का बिगुल.
                                          
                      
                                                     गाँधी के देश में            
                                      
                                                     नंगे पांव सत्याग्रह . ..   

--
        ऋतेष      
( 9407658285 )
दुर्ग, छत्तीसगढ़
   RITESH TIKARIHA  

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                                       thanx....
                                 ok then
                                                


                      
______

02 फ़रवरी 2011

census of india

       भारत के महारजिस्ट्रार के कार्यालय में हिंदी अनुभाग संविधान के अनुच्छेद ३४३ से ३५१ तक के प्रावधान के अनुरूप कार्य करते हुए संविधान की अपेक्षाओ की पूर्ति में संलग्न है । इसके लिए राजभाषा अधिनियम एवं नियमो के अनुरूप निदेशालय के मुख्यालय एवं महारजिस्ट्रार के अधीन विभिन्न जनगणना कार्य निदेशालय एवं भाषा प्रभाग कोलकाता में संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करता है । यथावश्यक मार्ग दर्शन भी उपलब्ध करता है । राजभाषा अधिनियम की धारा ३(३) के अंतर्गत आने वाले समस्त कागजातों तथा संकल्प, सामान्य आदेश नियम की अधिसूचनाएं, प्रशासनिक तथा अन्य रिपोर्टो, प्रेस विज्ञप्‍ति, संसद की किसी सदन या दोनों सदनों के समक्ष राखी जाने वाली रिपोर्टो, सरकारी कागजात, संविदाएं, करार, अनुज्ञप्‍तियां, अनुज्ञापन, टेंडर नोटिस तथा टेंडर फार्म आदि द्विभाषी जरी किये जाते है ।
हिंदी पखवाडा -२०१० :
पुरुष्कार वितरण समारोह के दौरान प्रतिभागियो को संबोधित करते हुए भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त डॉ सी. चंद्रमौलि साथ में बैठे हैं भारत के अपर महारजिस्ट्रार श्री रमेश चन्द्र सेठी
 
       केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों तथा उनसे संबंद्ध अधीनस्‍थ कार्यालयों एवं केन्‍द्र सरकार के स्‍वामित्‍व में या नियंत्रणाधीन निगमों/उपक्रमों/बैंकों आदि से राजभाषा विभाग के वार्षिक कार्यक्रम में दिए गए मूल पत्राचार के अनुरूप पत्राचार करता है। इस निदेशालय में ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ क्षेत्रों के साथ लगभग ९७% मूल पत्राचार हिंदी में किया जाता है जो लक्ष्‍य से थोड़ा कम है । यह कार्यालय राजभाषा नियम, ५ के अनुसार हिंदी में प्राप्‍त पत्रों का उत्‍तर हिंदी में देता है । फाइलों पर टिप्‍पणियां लक्ष्‍य के अनुसार हिंदी में लिखने का प्रयास महारजिस्‍ट्रार के कार्यालय द्वारा सतत् रूप में करने का प्रयास किया जाता है । हिंदी भाषा व हिंदी टाइपिंग व आशुलिपि की प्रशिक्षण के कार्यक्रमों को भी लक्ष्‍यानुसार चलाया जाता है । हिंदी में ई-बुक सहित महारजिस्‍ट्रार के कार्यालय में पुस्‍तकों की खरीद पर लक्ष्‍य के अनुरूप खर्च किया जाता है ।
       महारजिस्ट्रार के कार्यालय में कम्प्यूटर सहित सभी प्रकार के उपकरणों की खरीद राजभाषा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाती है । कम्प्यूटर में यूनीकोड के माध्यम से हिंदी सॉफ्टवेर डाउनलोड कर कम्प्यूटर पर हिंदी भाषा में काम करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है । वेबसाइट पर कार्यालय की महत्वपूर्ण सुचनाये व परिपत्र आदि देखे जा सकते है । महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा सूचना बोर्ड और होर्डिंग्स आदि नियमानुसार हिंदी/अंग्रेजी व क्षेत्रीय भाषाओ में बनाये जाते है ।
       जनगणना के प्रति देश के लोगों में जागरूकता एवं अभिरुचि पैदा करने के उद्देश्‍य से हिन्‍दी में श्‍लोगन तैयार किए गए जिसके माध्‍यम से जनगणना के वास्‍तविक लक्ष्‍य की ओर आम लोगों को आकर्षित किया गया। इस महत्‍वपूर्ण कार्य में जिलाधीशों व सरपंचों की भूमिका को समझते हुए उनका आहवान करने हेतु विशेष पत्र भारत के महारजिस्‍ट्रार की ओर से लिखे गए । इस प्रकार के पत्रों की सराहना हुई एवं परिणाम भी फलदायी रहा ।
       राजभाषा विभाग के निदेशों के अनुसार महारजिस्‍ट्रार के कार्यालय में वर्ष में चार बैठकें नियमित अंतराल पर की जाती है इन बैठकों में राजभाषा विभाग द्वारा जारी किए गए वार्षिक कार्यक्रम के लक्ष्‍यों के ऊपर विधिवत् चर्चा की जाती है और निर्णय लिए जाते हैं । तदनुसार कार्यालय में हिंदी कार्य को बढ़ावा देने की सतत् कोशिश की जाती है । बैठक में  लिए गए निर्णयों के कार्यान्‍वयन की जानकारी रिपोर्टों के माध्‍यम से ली जाती है और प्रत्‍येक बैठक में हर प्रभाग/अनुभाग की रिपोर्ट की गहनता से समीक्षा की जाती है ।
       लक्ष्‍य के अनुरूप महारजिस्‍ट्रार के कार्यालय  के अधीन कार्यरत जनगणना कार्य निदेशालयों में हिंदी के कार्यान्वयन की स्‍थिति का जायजा लेने के लिए संयुक्‍त निदेशक(रा.भा.) विभिन्‍न कार्यालयों का निरीक्षण करते हैं और निरीक्षण में पाई गई कमियों को दूर करने के लिए अनुवर्ती कार्रवाई के माध्‍यम से प्रयास करते हैं ताकि सभी कार्यालयों में प्रत्‍येक मद पर राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया जा सके । इसी क्रम में संयुक्‍त निदेशक(रा.भा.) ने उत्‍तर पद्रेश, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्‍थान, त्रिपुरा, उड़ीसा, तमिलनाडु आदि कार्यालयों का निरीक्षण किया । मुख्‍यालय के प्रशासन-1, प्रशासन-2, प्रशासन-3, प्रशासन-4, सामान्‍य अनुभाग, बजट अनुभाग, सीआरएस, सामाजिक अध्‍ययन प्रभाग, रोकड़ अनुभाग, जनगणना सैल, एमएनआईसी अनुभागों का निरीक्षण किया गया । निर्धारित लक्ष्‍य पाने की दिशा में मुख्‍यालय सहित सभी जनगणना कार्य निदेशालयों में 4 हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है जिनमें अधिकारियों/ कर्मचारियों को हिंदी में टिप्‍पण आलेखन, मसौदा लेखन व अन्‍य कार्य करने के संबंध में जानकारी दी जाती है और अभ्‍यास भी कराया जाता है ।
       भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों में हिंदी के प्रगामी प्रयोग की स्‍थिति का जायजा लेने के लिए संसदीय राजभाषा समिति विभिन्‍न कार्यालयों का निरीक्षण करती है और आवश्‍यक बिन्‍दुओं पर सुझाव देती है व आश्‍वासन भी लेती है । इसी क्रम में वर्ष के दौरान संसदीय राजभाषा समिति की पहली उप समिति ने जनगणना कार्य निदेशालय, पुड्डुचेरी, मध्‍यप्रदेश, सिक्‍किम, केरल का निरीक्षण किया और पुड्डुचेरी तथा मध्‍यप्रदेश स्‍थित जनगणना कार्य निदेशालयों में हिंदी में किए जा रहे कार्य की सराहना की है । संसदीय राजभाषा समिति को उक्‍त निरीक्षणों में दिए गए आश्‍वासनों को समय से पूरा करने के संबंध में आवश्‍यक कार्रवाई की गई ।
       मुख्‍यालय में हिंदी के वातावरण को बनाए रखने के लिए सितम्‍बर महीने में 01 सितम्‍बर से 15 सितम्‍बर, 2010 तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया । 14 सितम्‍बर, 2010 को हिंदी दिवस के रूप में मनाया गया । पूरे पखवाड़े के दौरान हिंदी में हिन्‍दी निबन्‍ध (हिन्‍दी भाषी), हिन्‍दी निबन्‍ध (हिन्‍दीतर भाषी),हिन्‍दी वर्तनी, सुलेख एवं श्रुतलेख, हिन्‍दी टिप्‍पण/आलेखन, पखवाड़े के दौरान सर्वाधिक काम करने जैसी विभिन्‍न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें कार्यालय के लगभग 250 अधिकारियों/कर्मचारियों ने भाग लिया उनमें से 40 प्रतिभागियों को पुरस्‍कृत भी किया गया । इसी समय प्रश्‍न मंच प्रतियोगिता का आयोजन बड़ा ही उत्‍साहवर्धक एवं मनोहारी रहा जिसमें लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 60 प्रश्‍नों के उत्‍तरदाताओं को तत्‍काल नकद पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया  गया । कार्यालय में प्रतिवर्ष की भांति चलाई जा रही वार्षिक प्रोत्‍साहन योजना जैसी प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को भी पुरस्‍कार के लिए चुना गया । उक्‍त सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्‍मानित करने के लिए दिनांक 24.09.2010 को पुरस्‍कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया । इस समारोह के मुख्‍य अतिथि डॉ. सी. चन्‍द्रमौलि, भारत के महारजिस्‍ट्रार एवं जनगणना आयुक्‍त ने अपने कर-कमलों से सभी प्रतिभागियों को पुरस्‍कार प्रदान किया और उनकी सफलता के लिए उन्‍हें बधाई दी । महारजिस्‍ट्रार महोदय ने हिंदी पखवाड़े की इस सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से कार्यालय के सभी अधिकारियों/कर्मचारियों में हिंदी में कार्य करने की प्रेरणा जगती है ।
       वर्ष के दौरान अनुभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा भारत की जनगणना 2011 से संबंधित सभी कागजातों जैसे मकानसूचीकरण, मकानों को नम्‍बर देना, जनगणना 2011 के पूर्व परीक्षण से संबंधित मकान सूची और परिवार अनुसूची, राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर आदि का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया । इसके अलावा अन्‍य महत्‍वपूर्ण अनुवादों में परिवार अनुसूची को भरने के लिए अनुदेश पुस्‍तिका, मंत्रिमंडल टिप्‍पण, जनगणना-2011 के परिपत्र 1 से 24 तक, वार्षिक स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण (एएचएस) दस्‍तावेज, सारणी करण योजना संबंधी परिपत्र -1, ईडीपी  संबंधी जनगणना परिपत्र- 2,  भर्ती नियम, सिविल रजिस्‍ट्रीकरण प्रणाली, वार्षिक कार्य योजना, संक्षिप्‍त मकान सूची सार, मास्‍टर ट्रेनर फैसिलीटेटर गाइड, मास्‍टर ट्रेनर गाइड आदि शामिल हैं ।
       मुख्‍यालय तथा जनगणना कार्य निदेशालयों में तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों में रचनात्‍मक प्रतिभा को उभारने की दृष्‍टि से गृह पत्रिकाओं के प्रकाशन का कार्य किया जाता है। मुख्‍यालय का हिंदी अनुभाग जहां एक ओर अपने मार्ग दर्शन एवं सहयोग से विभिन्‍न जनगणना कार्यालयों में गृह पत्रिकाओं के प्रकाशन में सहभागी होता है वहीं दूसरी और मुख्‍यालय में भी गृह पत्रिका के प्रकाशन का कार्य संपन्‍न किया जाता है । पिछले दो वर्षों से जनगणना मंथन पत्रिका के प्रकाशन का कार्य इस दिशा में एक सराहनीय कदम है । जनगणना का प्रथम अंक जनवरी, 2010 तक प्रकाशित हुआ था । जनगणना मंथन का द्वितीय अंक भी दिसम्‍बर, 2010 में प्रकाशित हो गया । इस प्रकाशन के माध्‍यम से अधिकारियों/कर्मचारियों की सृजनात्‍मक अभिव्‍यक्‍ति को बढ़ावा देने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है ताकि सभी अधिकारियों/कर्मचारियों में हिंदी में लिखने और कार्य करने की प्रवृति बढ़े। इस प्रयास के चलते अधिकारी/कर्मचारी अपना काम मूलरूप से हिंदी में करने के लिए उद्यत हो रहे हैं ।
       इस प्रकार उक्‍त प्रयासों के माध्‍यम से महारजिस्‍ट्रार के कार्यालय का हिंदी अनुभाग राजभाषा हिंदी के कार्यान्‍वयन की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है । भारत के  महारजिस्‍ट्रार एवं जनगणना आयुक्‍त स्‍वयं राजभाषा नीति के कार्यान्‍वयन की दिशा में समय-समय पर विशेष रूप से पहल करते रहते हैं जिससे प्रेरणा लेकर बाकी अधिकारी/कर्मचारी भी इस ओर अभिरुचि दिखा रहे हैं । विगत वर्षों की तुलना में राजभाषा हिंदी का कार्य दिनों-दिन आगे बढ़ रहा है और आशा है कि निकट भविष्‍य में महारजिस्‍ट्रार का कार्यालय हिंदी कार्यान्‍वयन की दिशा में उन सभी लक्ष्‍यों को प्राप्‍त कर लेगा जो राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित किए गये हैं । कार्यालय के सतत् प्रयासों से हिंदी को आगे बढ़ाने की दिशा में संविधान की मंशा के अनुरूप कार्य संपन्‍न हो रहे हैं । आगे आने वाले समय में संविधान निर्माताओं की उन भावनाओं को पूर्ण करने का प्रयास होगा जिसके तहत उन्‍होंने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया है ।