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24 मई 2011

आतंकी से बड़ा खतरा आईएसआई! फिरौती नहीं मिलने पर की हत्‍या

(फोटो कैप्शन: आईएसआई प्रमुख शुजा पाशा )
पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की हरकतें मुल्‍क के लिए खतरा बन सकती हैं। दुनिया भर में कुख्‍यात यह एजेंसी अब चौतरफा घिर रही है। अफगानिस्‍तान सरकार ने कहा है कि तालिबान सरगना मुल्‍ला उमर को आईएसआई ले गई है। अमेरिकी कोर्ट में आतंकी डेविड हेडली ने कहा है कि आईएसआई ने मुंबई में हमला कराने में लश्‍कर की मदद की। अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्‍तान में जहां छिपा था, वह जगह भी आईएसआई का ही अड्डा बताया जाता है। और तो और, मुल्‍क में भी आईएसआई हत्‍या, फिरौती जैसे धंधे में लगी है। मंगलवार को ही मुजफ्फराबाद के एक युवक की फिरौती नहीं मिलने पर आईएसआई द्वारा हत्‍या किए जाने की खबर आई है।
आईएसआई के बारे में अमेरिकी कोर्ट में हेडली के कबूलनामे (पूरी खबर पढ़ने के लिए रिलेटेड आर्टिकल के लिंक पर क्लिक करें) से पाकिस्‍तान के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा है। भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत और अमेरिका को मिलकर पाकिस्‍तान पर शिकंजा कसना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी में घुसपैठ है। भारत को इस बात पर जोर देना चाहिए कि अमेरिका इन सूचनाओं को सार्वजनिक करे।

बीजेपी ने भी आज संवाददाता सम्‍मेलन में कहा कि अब पाकिस्तान पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। पार्टी नेता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि पाकिस्‍तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है और यह दुनिया भर के लिए खतरा साबित हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद यह साबित हो गया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों का स्वर्ग बन चुका है। पाकिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों के नेवल बेस पर हमले के बाद यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का जखीरा सुरक्षित है?

शिकागो कोर्ट में डेविड हेडली ने 26/11 हमले के आरोपी आतंकवादी संगठन लश्‍कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्‍मद के पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से रिश्‍ते होने की बात कबूल की है। हेडली के इस कबूलनामे से आईएसआई और पाकिस्‍तानी सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गए। दरअसल आईएसआई एक खुफिया एजेंसी है और इसका काम खुफिया जानकारियां जुटाकर सेना और सरकार को देना है जिससे देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। लेकिन हेडली के कबूलनामे से साफ हो गया कि आईएसआई अपनी मुख्‍य भूमिका से भटक गया है।

पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठनों का मददगार होने के साथ आईएसआई के अधिकारियों पर अपहरण कर फिरौती वसूलने के भी आरोप लगते रहे हैं। आईएसआई अधिकारियों ने मुजफ्फराबाद के निवासी मोहम्‍मद सरवर के बेटे डॉ. रिजवान को बीते 7 मई को उसके घर से ही अगवा कर लिया और 23 मई को उसकी हत्‍या कर दी गई। हालांकि रिजवान के खिलाफ कोई मामला भी दर्ज नहीं किया गया और उसे आईएसआई के ‘प्रताड़ना शिविर’ में रखा गया। स्‍थानीय पुलिस ने रिजवान को रिहा करने के एवज में उसके घरवालों से 60 हजार रुपये मांगे थे। घरवाले हालांकि इस पैसे के इंतजाम में जुटे भी थे लेकिन तभी खबर आई कि निर्दोष रिजवान को मौत के घाट उतार दिया गया है।

आतंकवादियों ने पाकिस्‍तान के विभिन्‍न इलाकों में सुरक्षा बलों से जुड़े कई अहम ठिकानों पर हमले किए हैं। यहां तक कि पाकिस्‍तानी सेना के मुख्‍यालय पर भी हमला हुआ था जिसमें आतंकियों ने कई अधिकारियों को 24 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इसमें एक ब्रिगेडियर और एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत कई लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह की भयंकर चूक और लापरवाही होने के बावजूद किसी ने इसे चूक या खुफिया एजेंसी की नाकामी नहीं माना है।

हालां‍कि ऐबटाबाद की घटना के बाद आईएसआई को दुनिया की सर्वश्रेष्‍ठ खुफिया एजेंसी बताने की कोशिश की जा रही है। जबकि इस घटना ने पाकिस्‍तानी सेना की चौकसी और उनके खुफिया एजेंसियों की पोल खोल कर रख दी है। कई लोग आईएसआई को दुनिया की टॉप टेन खुफिया एजेंसियों में दूसरे या तीसरे स्‍थान पर रखते हैं। चोटी की 10 उम्‍दा खुफिया एजेंसियों में अमेरिका की सीआईए, ब्रिटेन की एमआई-6, इजराइल की मोसाद, जर्मनी की बीएनडी, रूस की एफएसबी, चीन की एमएसएस, फ्रांस की डीजीएसई, भारत की रॉ और ऑस्‍ट्रेलिया की एएसआईएस के नाम शामिल हैं।
पाकिस्‍तान के पश्चिमोत्‍तर प्रांत से सांसद और अवामी नेशनल पार्टी के नेता अफरसियाब खटक ने आईएसआई को तालिबान का संरक्षक करार दिया है। विकीलीक्‍स के खुलासे के मुताबिक खटक ने साल 2009 में अमेरिकी अधिकारी लिन ट्रेसी से बातचीत में कहा था कि स्‍वात घाटी से तालिबान को खदेड़े जाने के बाद आईएसआई ने ही उन्‍हें पनाह दी थी। खटक ने यह भी कहा कि पाकिस्‍तानी सेना अल कायदा के करीबी माने जाने वाले आतंकी संगठन हक्‍कानी नेटवर्क की मदद करते रहे हैं। पाक सेना ने तालिबान के नेताओं मुल्‍ला नजीर और हाफिज गुल बहादुर को भी संरक्षण दिया है।
आईएसआई अपने मुल्‍क में खुफियागीरी में लगातार नाकाम साबित हुई है। इसका ताजा सुबूत कराची के नौ‍सैनिक अड्डे पर हुए आतंकी हमले के रूप में आया है। ऐसे में यह एजेंसी मुल्‍क की बेहतरी में किसी भी तरह मददगार साबित नहीं हो रही है। एक ओर, जहां इसकी नाकामी के चलते आतंकी पाकिस्‍तानी हुक्‍मरान को हिला सकते हैं तो दूसरी ओर, इसकी करतूतों के चलते अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पाकिस्‍तान सरकार को मुश्किल झेलना पड़ सकता है।
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आपकी बातआईएसआई का असली चेहरा सामने आने के बाद पाकिस्‍तान सरकार पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। हालांकि भारत पहले से ही 26/11 मामले में आईएसआई की भूमिका से जुड़े सबूत देता आया है। क्‍या आईएसआई के अधिकारी आतंकियों से भी खतरनाक हैं? क्‍या ऐसे खुलासे के बाद अमेरिका को पाकिस्‍तान से रिश्‍ते तोड़ लेने चाहिए? भारत की अगली रणनीति क्‍या होनी चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें। किसी भी आपत्तिजनक टिप्‍पणी के लिए पाठक खुद जिम्‍मेदार होंगे।

बहुमूल्य धातुओं ने लगाई छलांग


बहुमूल्य धातुओं ने आज फिर छलांग लगाई और ऊंचाई पर पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के संकेतों से दोनों में आज तेजी देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में सोना-चांदी सटोरियों और डीलरों की लिवाली से मजबूत हुए। चांदी में 1,100 रुपए की जबर्दस्त बढ़त हुई और वह 54,300 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। सोना 110 रुपए प्रति दस ग्राम की बढ़कर 22,690 रुपए हो गया। शादियों के सीजन के कारण भी इसकी मांग बढ़ी।बाज़ार में आज तेजी की अवधारणा थी और दोनों ही बहुमूल्य धातुएं महंगी हो गईं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने-चांदी के दामों में मजबूती रही और इसका असर घरेलू बाज़ार पर भी पड़ा। यूरोप के कर्ज संकट का असर सोने की कीमतों पर पड़ा और इसकी मांग बढ़ गई।

kranti

17 मई 2011

पाकिस्तान में नहीं, महाराष्ट्र के थाणे में रहता है भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी!

मुंबई. भारत ने हाल ही में पाकिस्तान को जो पचास खूंखार आतंकियों की सूची सौंपी है उनमें से एक वजाहुल कमर खान पाकिस्तान में नहीं बल्कि भारत में रह रहा है। कमर महाराष्ट्र के थाणे में वागले एस्टेट इलाके में अपनी बीमार मां, पत्नी और पांच बच्चों के साथ रहता है। कमर के परिजनों का कहना है कि वो कभी पाकिस्तान गया ही नहीं है। कमर खान 2003 में हुए मुलुंद ट्रैन ब्लास्ट मामले में आरोपी है और फिलहाल जमानत पर रिहा है। पाकिस्तान को सौंपी गई सूची में उसका नाम खान वजाहुल कमर लिखा हुआ है हालांकि फिलहाल जमानत पर रिहा खान जमानत की शर्तों का पालन करते हुए अपने आप को नियमित रूप से कोर्ट के समक्ष पेश करता है।

खान को एटीएस ने 10 मई 2010 को मुंबई के कुर्ला इलाके से गिरफ्तार किया था। खान के परिवार का कहना है कि वो कभी पाकिस्तान गया ही नहीं है। धमाके में नाम आने के बाद से ही वो फरार था और उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एक साल तक छुप कर रहने के बाद वो वापस मुंबई आ गया और धारावी इलाके में व्यापार करने लगा।
वहीं पुलिस ने खान पर मुलुंद धमाको में शामिल होने से अलग तीन अन्य आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। जिन चार आतंकी वारदातों का खान को आरोपी बनाया गया है उनमें 16 लोगों की मौत हुई और 120 से अधिक घायल हुए।
खान पर फिलहाल गैर कानूनी रूप से हथियार रखने और आतंकी वारदातों में शामिल होने के मामले चल रहे हैं। इन मामलों की सुनवाई संयुक्त रूप से पोटा की विशेष अदालत में हो रही है।
वहीं भारत में रह रहे व्यक्ति की पाकिस्तान से मांग करने के बाद शर्मनाक स्थिति में पड़ी केंद्र सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जांच में 50 मोस्ट वांटेड अधिकारियों की सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को भी शामिल किया जाएगा और यह पता किया जाएगा कि 2010 में भारत में गिरफ्तार किया गए व्यक्ति का नाम मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में कैसे आ गया। जांच में उन अधिकारियों की पहचान भी की जाएगा जिनकी गलती के कारण ऐसा हुआ।
एक सूत्र के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं कट-पेस्ट का काम हुआ है। हम यह पता लगाएंगे की यह गलती कहां हुई।
गौरतलब है कि खान वजाहुल कमर का नाम पाकिस्तान से मांगे गए 50 आतंकियों की सूची में 41वें नंबर पर शामिल है। मार्च में भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच हुई वार्ता के दौरान यह सूची पाकिस्तान को सौंपी गई थी। इसमें लश्करे तैयबा के सरगना हाफिज सईद और आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी का भी नाम है।
वहीं गृह मंत्रालय ने खान के मामले में महाराष्ट्र पुलिस से भी रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में खान के मामले की मौजूदा स्थिति, उसके रहने के स्थान और पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी गई है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान को सौंपी गई आतंकियों की सूची को मुंबई पुलिस, एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरौ) की सहमति के बाद बनाया गया था।


http://fristpage.blogspot.com/2010_10_03_archive.html

सुलभ शौचालय में दारू का स्टॉक

रायपुर। सुलभ शौचालय परिसर को दारू के गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रहे पालसिंह ठाकुर को आबकारी विभाग ने मंगलवार तड़के गिरफ्तार किया। उसके पास से 41 बोतल शराब जब्त की गई, जिसे उसने कैंपस में पड़ी रेत में छिपा कर रखा था।
नए आबकारी एक्ट के अनुसार जब्त शराब की मात्रा पांच लीटर से ज्यादा होने की वजह से उसे अदालत से जमानत नहीं मिली। न्यायिक हिरासत में उसे जेल भेज दिया गया। विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि पालसिंह शराब की अवैध बिक्री में लगा हुआ है। पर शराब का स्टॉक कहां पर रखा जाता है, किसी को पता नहीं था।
मंगलवार को सुबह चार बजे से आबकारी विभाग की टीम गुढिय़ारी स्थित उसके मकान के आसपास मंडरा रही थी। सुबह करीब साढ़े पांच बजे टीम को कुछ लोग सुलभ शौचालय परिसर से शराब की बोतल लेकर निकलते दिखे। इसकी पुष्टि होते ही आबकारी विभाग ने छापेमारी की और रेत में छिपाई गई शराब की बोतलों को जब्त किया।

‘अगर मैं आईसीसी अध्यक्ष बना तो खत्म कर दूंगा भारत का वर्चस्व!’

अगर मैं आईसीसी

अध्यक्ष बना तो

खत्म कर दूंगा

भारत का वर्चस्व!’

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान टोनी ग्रेग आईसीसी में भारत के बढ़ते दबदबे को लेकर खासे परेशान हैं। ग्रेग की माने तो वे अगर आईसीसी के अध्यक्ष बने तो उनका शीर्ष एजेंडा आईसीसी में भारत के दबदबे को खत्म करना होगा। साथ ही उनका एक अन्य मुद्दा आईपीएल के लिये विंडो देने की सलाह को खारिज करना भी होगा।
एक इंटरव्यू में ग्रेग ने कहा कि आईसीसी पर भारत का दबदबा है। ऐसे में भारत के वर्चस्व को खत्म कर सबसे पहले आईसीसी को रास्ते पर लाने की कोशिश करनी होगी। भारतीय क्रिकेट के कर्ताधर्ता कुछ देशों को अपने इशारों पर चलाते हैं और वोट हासिल कर लेते हैं। जिससे आईसीसी दबाव में भारत के सामने झुक जाता है।
उन्होंने कहा कि आईसीसी में भारत के वर्चस्व को खत्म करना काफी मुश्किल होगा, लेकिन फिर भी इसे ठीक करना होगा।
ग्रेग ने कहा कि देश दुनिया के तमाम क्रिकेटर बहुत ज्यादा क्रिकेट खेल रहे हैं। ऐसे में भारत की घरेलू टी20 लीग को विंडो देना हास्यास्पद होगा। इसमें दो महीने का वह समय कम हो जायेगा जिसमें वे दुनिया भर में क्रिकेट खेल सकते हैं।

16 मई 2011

हार वामपंथ विचारधारा की या पश्चिम बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार की हार या वामपंथी विचारधारा की?

पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी दलों की ऐतिहासिक हार के बाद क्या भारत की संसदीय राजनीति में वामपंथ अप्रासंगिक हो गया है?
पश्चिम बंगाल में लगातार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वाममोर्चा की बाक़ी पार्टियाँ तीस वर्ष के बाद विधानसभा में विपक्ष की क़तारों में बैठेंगी. क्या वाममोर्चे की इस दारुण हार को पूरी वामपंथी विचारधारा की हार माना जा सकता है या फिर पश्चिम बंगाल की जनता ने सिर्फ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों को ख़ारिज किया है?

लोगों ने कहा राहुल गांधी अब दे पेट्रोल पंप पर धरना

नई दिल्ली. पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी से नाराज लोगों ने सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक पर भी सरकार को जमकर ताने मारे। एक जोरदार टिप्पणी तो यह भी आई कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अब उसी तरह धरने पर बैठ जाना चाहिए जैसे कि वे ग्रेटर नोएडा के एक गांव में जा बैठे थे।
मन अमन छिन्ना नामक यूजर ने लिखा, राहुल जी को तुरंत बाइक लेकर निकट के पेट्रोल पंप का दौरा करना चाहिए। इस पर पलटकर टिप्पणी आई, कांग्रेस का हाथ, गरीब के साथ है और बेचारे गरीब तो पेट्रोल खरीदते नहीं हैं।
एक अन्य यूजर चारू गुप्ता ने मजाक उड़ाते हुए कहा, संता को पेट्रोल की कीमत बढ़ने से फर्क नहीं पड़ता। वह तो पहले भी 100 रुपए का पेट्रोल भरवाता था और अब भी 100 रुपए का ही भरवाएगा।
आलोक कुमार नामक यूजर ने कीमत में बढ़ोतरी को राजनीतिक रंग देते हुए कटाक्ष किया, कांग्रेस भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता से लड़ रही है। इसके लिए पैसे की जरूरत है। लिहाजा पेट्रोल, दूध और अन्य छोटी मोटी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी सहन करना जारी रखें।

दिग्विजय सिंह को रामदेव पर गुस्सा क्यों ?

अन्ना हजारे की तरह कोई नहीं तुड़वाएगा

रामदेव का अनशन: दिग्विजय

कांग्रेस के महासचिव और अपनी बेबाक बयानी के लिए मशहूर दिग्विजय सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव को एक बार फिर निशाने पर लेते हुए कहा है कि उन्हें अपनी भूख हड़ताल की योजना को रद्द कर देना चाहिए क्योंकि इससे उनका अपमान होगा।
चार जून से रामदेव दिल्ली में भूख हड़ताल पर जाएंगे। मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा, 'अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए कई लोग सामने आए थे, लेकिन रामदेव के समर्थन में शायद ही कोई आए।' गौरतलब है कि योग गुरु बाबा रामदेव और कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के बीच काले धन और भ्रष्टाचार के मसले पर तीखी नोंकझोंक हो चुकी है।
पेट्रोल के दाम बढ़ने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने 2002 में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम को सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया था ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के दामों के अनुसान इसे तय किया जा सके। मौजूदा सरकार एनडीए की ही नीति को आगे बढ़ा रही है।

10 मई 2011

विकी india

नमस्कार,

मैं टिंग चेन, विकिमीडिया संस्थापन के न्यासी मण्डल का निदेशक।

दो महीने पहले, विकिमीडिया संस्थापन ने हमारे नए सम्पादक प्रचलन शोध के परिणाम प्रकाशित किए थे (आप परिणामों को यहाँ पढ़ सकते हैं), जिसने यह दिखलाया कि पिछले कई वर्षों के दौरान लोगों को विकिमीडिया परियोजनाओं पर सम्पादन करने में बहुत परेशानियाँ हो रही हैं। पिछले महीने बोर्ड ने इसपर एक विमर्श किया, और इसके पश्चात हम सब आपके हमसे जुड़ने के कथन पर एकमत हुए ताकि विकिमीडिया परियोजनाओं को और अधिक मुक्त और सहयोगपूर्ण बनाया जा सके।

कृपया हमारे संकल्प को पढ़ें, और मैं इसपर आपकी टिप्पणी चाहता हूँ और आप अपने विचारों को साझा करें।

शुभकामनाएँ, और विकिमीडिया परियोजनाओं में लिप्त होने के लिए धन्यवाद।

टिंग चेन
विकिमीडिया संस्थापन के न्यासी मण्डल का निदेशक

संकल्प: खुलापन

हम, विकिमीडिया संस्थापन बोर्ड वाले, यह विश्वास रखते हैं कि हमारे मिशन को पूरा करने की दिशा में हमारे परियोजना समुदायों को भली प्रकार से निरन्तर चलते रहना चाहिए। विकिमीडिया परियोजनाएँ खुलेपन की संस्कृति, भागीदारी, और गुणवत्ता पर स्थापित की जाती हैं जिसने मानव ज्ञान के विश्व के सबसे श्रेष्ठ भण्डार का निर्माण किया है। पर एक ओर जहाँ विश्वभर में विकिमीडिया की पाठक और समर्थक संख्या में वृद्धि हो रही है वहीं दूसरी ओर सम्पादक प्रचलन के हालिया शोधों से पता चला है कि नए सम्पादकों की भागीदारी और अवधारण में धीरे-धीरे कमी आ रही है।

जैसा की पञ्च-वर्षीय सामरिक योजना में तय किया गया था, और इन जाँच-परिणामों से स्पष्ट हुआ है, विकिमीडिया को नए और विविध सम्पादकों को आकर्षित और अवधारित, और अनुभवी सम्पादकों को अवधारित करने की आवश्यकता है। हमारी वर्तमान परियोजनाओं और हमारे आन्दोलन की दीर्घकालिक स्थिरता और गुणवता के लिए एक स्थिर समुदाय अति-महत्वपूर्ण है।

इस चुनौती को पूरा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम सभी योगदानकर्ताओं को इन परियोजनाओं पर दैनिक काम में इन मुद्दों के बारे में सोचने के लिए कहते हैं। हम इसे कर्मचारी शीर्ष प्राथमिकता बनाने के लिए कार्यकारी निदेशक का समर्थन करते हैं, और इस बात की सिफारिश करते हैं कि वे इस परेशानी के निदान के लिए, समुदायिक पहुँच, समुदाय के प्रयासों के प्रवर्धन, और तकनीकी सुधारों के द्वारा संस्थापन के संसाधनों का आवण्टन बढ़ाएँ।

हम उन विकासकर्ताओं, सम्पादकों, विकिपरियोजनाओं और अध्यायों का समर्थन करते हैं जो परियोजनाओं को और अधिक सुगम, स्वागतशील, और सहयोगात्मक बनाने में जुटे हुए हैं।

बोर्ड इन प्रयासों के समाधानों को आगे बढ़ाने में सहाई है, और संस्थापना की सहायता के लिए विशिष्ट अनुरोधों को आमन्त्रित करता है। हम अपने खुलेपन और व्यापक भागीदारी के लक्ष्य के लिए नए विचारों का स्वागत करते हैं और बढ़ावा देते हैं।

हम विकिमीडिया समुदाय से यह आग्रह करते हैं कि वे निम्नलिखित के द्वारा खुलेपन और सहयोग को बढ़ावा दें:

  • चूंकि आप इस बात से जागरुक हैं कि नए सम्पादकों को क्या परेशानियाँ हो सकती हैं इसलिए नए सम्पादकों के प्रति संयम, दया, और आदर दिखाएँ और अन्यों को भी यही करने के लिए प्रेरित करें;
  • परियोजनाओं पर संवाद को सुधारना; नीतियों और अनुदेशों का सरलीकरण; और सहकर्मियों के साथ मिलकर साँचो, चेतावनियों, और विलोपन सम्बन्धी नीतियों और प्रथाओं को सुधारना और उन्हें और अधिक अनुकूल बनाना;
  • उन फ़ीचर्स और टूल्स के विकास का समर्थन और रोलआउट करना जिनसे उपियोगिता और सुगमता में सुधार हो;
  • इन मुद्दों पर समुदाय की जागरुकता बढ़ाना और व्यक्तियों, समूहों और अध्यायों के प्रयासों का समर्थन करना;
  • सहकर्मियों के साथ मिलकर विवादों को कम करना और एक मित्रवत, सहयोगात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना जिसमें आभारी और अभिपुष्टि व्यवहार भी सम्मिलित है, और अच्छी प्रथाओं और समुदाय नेताओं को बढ़ावा देना; और
  • सहकर्मियों के साथ मिलकर विघटनकारी और शत्रुतापूर्ण व्यवहार को हतोत्साहित और ट्रॉलस और स्टॉकर्स को दूर करने की प्रथा विकसित करना।

सन्दर्भ

क्या आप जानते hai

दुर्ग junction

शादी-ब्याह व स्कूली छुट्टियोंं के चलते स्टेशन में रिजर्वेशन कराने व टिकट लेने वालों की भीड़ के अनुपात मेंं असामाजिक तत्वों की सक्रियता भी बढ़ गई है। मामले में स्टेशन मास्टर सहित अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के साथ-साथ आरपीएफ व जीआरपी स्टाफ के संरक्षण ने इन तत्वों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। हालत यह है कि टिकट लेने, रिजर्वेशन कराने अथवा किसी अन्य कार्य से स्टेशन जाने वाले जन सामान्य विशेषकर युवतियां और बुजुर्गों को कई बार मारपीट और गाली-गलौच जैसी अपमानजनक और विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

विडंबना यह कि स्टेशन परिसर में आम नागरिकों की परेशानी से किसी अधिकारी को कोई सरोकार नहीं है न उनकी शिकायतों का निराकरण करने वाला है। कथित माडल स्टेशन में व्याप्त भर्राशाही का ऐसा ही एक नजारा सोमवार की सुबह आरक्षण काउंटर पर देखने को मिला जहां टिकट दलालों ने कतार में लगे कुछ नागरिकों के साथ न सिर्फ हाथापाई की बल्कि एक व्यक्ति को पीट भी दिया। लोगों ने जब इसकी शिकायत करनी चाही तो उन्हें एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक कई चक्कर लगाने पड़े तब जाकर उनकी शिकायत दर्ज हुई। जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह आरक्षण काउंटर के सामने रोज की तरह लंबी कतार लगी हुई थी। तभी एक युवक वहां आया और सीधे खिड़की पर जा पहुंचा।

काउंटर पर बैठा क्लर्क युवक को ऐसा करने से मना करने की बजाए उसका सहयोग कर रहा था। यह देख कतार में लगे लोगों ने एतराज जताया जिसपर वह युवक भड़क गया और लोगों से अभद्र व्यवहार करने लगा। उसी दौरान युवक के कई साथी वहां आ पहुंचे और उन्होंने वहां जमकर उत्पात मचाया। केएस ओझा, रुपेश कुमार और आनंद पांडेय आदि कई लोगों से न सिर्फ उन्होंने हाथापाई बल्कि समीर तिवारी को पीट भी दिया।

श्री ओझा ने कहा कि टिकट दलालों के उत्पात से आहत लोगों ने जब इसकी शिकायत करनी चाही तो उन्हें यहां भी उन्हें अपमानित होना पड़ा। अधिकारियों ने उनकी पीड़ा को समझने की बजाए उन्हें एक कक्ष से दूसरे कक्ष के कई चक्कर लगवाए। यहां तक कि स्टेशन मास्टर प्रसाद राव ने भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। श्री ओझा ने बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान आरपीएफ व जीआरपी के जवान भी वहां मौजूद थे लेकिन वे भी मूकदर्शक बने रहे। श्री ओझा ने कहा कि स्टेशन परिसर में दो दर्जन से अधिक टिकट दलाल पूरे दिन सक्रिय रहते हैं। इस संबंध जानकारी के लिए डीसीएम श्री नायडू से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

रेलवे का दुर्ग junction

शादी-ब्याह व स्कूली छुट्टियोंं के चलते स्टेशन में रिजर्वेशन कराने व टिकट लेने वालों की भीड़ के अनुपात मेंं असामाजिक तत्वों की सक्रियता भी बढ़ गई है। मामले में स्टेशन मास्टर सहित अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के साथ-साथ आरपीएफ व जीआरपी स्टाफ के संरक्षण ने इन तत्वों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। हालत यह है कि टिकट लेने, रिजर्वेशन कराने अथवा किसी अन्य कार्य से स्टेशन जाने वाले जन सामान्य विशेषकर युवतियां और बुजुर्गों को कई बार मारपीट और गाली-गलौच जैसी अपमानजनक और विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

विडंबना यह कि स्टेशन परिसर में आम नागरिकों की परेशानी से किसी अधिकारी को कोई सरोकार नहीं है न उनकी शिकायतों का निराकरण करने वाला है। कथित माडल स्टेशन में व्याप्त भर्राशाही का ऐसा ही एक नजारा सोमवार की सुबह आरक्षण काउंटर पर देखने को मिला जहां टिकट दलालों ने कतार में लगे कुछ नागरिकों के साथ न सिर्फ हाथापाई की बल्कि एक व्यक्ति को पीट भी दिया। लोगों ने जब इसकी शिकायत करनी चाही तो उन्हें एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक कई चक्कर लगाने पड़े तब जाकर उनकी शिकायत दर्ज हुई। जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह आरक्षण काउंटर के सामने रोज की तरह लंबी कतार लगी हुई थी। तभी एक युवक वहां आया और सीधे खिड़की पर जा पहुंचा।

काउंटर पर बैठा क्लर्क युवक को ऐसा करने से मना करने की बजाए उसका सहयोग कर रहा था। यह देख कतार में लगे लोगों ने एतराज जताया जिसपर वह युवक भड़क गया और लोगों से अभद्र व्यवहार करने लगा। उसी दौरान युवक के कई साथी वहां आ पहुंचे और उन्होंने वहां जमकर उत्पात मचाया। केएस ओझा, रुपेश कुमार और आनंद पांडेय आदि कई लोगों से न सिर्फ उन्होंने हाथापाई बल्कि समीर तिवारी को पीट भी दिया।

श्री ओझा ने कहा कि टिकट दलालों के उत्पात से आहत लोगों ने जब इसकी शिकायत करनी चाही तो उन्हें यहां भी उन्हें अपमानित होना पड़ा। अधिकारियों ने उनकी पीड़ा को समझने की बजाए उन्हें एक कक्ष से दूसरे कक्ष के कई चक्कर लगवाए। यहां तक कि स्टेशन मास्टर प्रसाद राव ने भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। श्री ओझा ने बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान आरपीएफ व जीआरपी के जवान भी वहां मौजूद थे लेकिन वे भी मूकदर्शक बने रहे। श्री ओझा ने कहा कि स्टेशन परिसर में दो दर्जन से अधिक टिकट दलाल पूरे दिन सक्रिय रहते हैं। इस संबंध जानकारी के लिए डीसीएम श्री नायडू से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

Official google.org Blog: Health Speaks begins pilots in Arabic, Hindi and Swahili

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क्या सपादन यार
सब करने वाला भगवान उपर बैठा है।
बस तू ही है
सब तेरा है

दुश्मन का दिल दहलाने की तैयारी

‘विजयी भव’ का शंखनाद




नई दिल्ली/जोधपुर पाकिस्तान से सटी सीमा के नजदीक तपते थार रेगिस्तान में भारतीय सेना व वायुसेना ने सोमवार को संयुक्त युद्धाभ्यास ‘विजयी भव’ का शंखनाद किया। इसके साथ ही सेना ने जमीन और वायुसेना ने आसमान से दुश्मन पर जीत के लिए अपने दम-खम का आकलन किया। 14 मई तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान नए बैटल टैंक व आधुनिक हथियारों का ट्रायल करने के साथ ही दुश्मन से काल्पनिक जंग लड़ी जाएगी।
सूरतगढ़ के रेगिस्तानी इलाके में ‘विजयी भव’ की शुरुआत बैटल टैंक से दुश्मन की सेना को नेस्तनाबूद करने और हेलिकॉप्टर से दुश्मन की जमीन पर कमांडो उतार कर उनके ठिकाने नष्ट करने के जीवंत प्रदर्शन के साथ हुई। युद्धाभ्यास के आखिरी पड़ाव में युद्ध रणनीति कौशल व रात्रिकालीन विजन की मारक क्षमता का प्रदर्शन होगा। साथ ही इस काल्पनिक जंग में भारतीय सेना के जवानों के दम-खम और आधुनिक हथियारों की मारक क्षमता को भी परखा जाएगा।
गर्मी में होगा ताकत का आकलन
ऑपरेशन पराक्रम से सबक लेने के बाद सेना हर साल वारगेम के जरिए अपनी ताकत का आकलन करती है। वारगेम के दौरान तपते रेगिस्तान में आधुनिक बैटल टैंक व आर्टिलरी गन की मारक क्षमता को परखने के साथ ही सेना की ताकत का आकलन किया जाएगा। अभ्यास के दौरान इस बात पर भी फोकस रहेगा कि किस प्रकार कम से कम नुकसान झेलते हुए दुश्मन की सेना को अधिक से अधिक क्षति पहुंचाई जाए। काल्पनिक जंग में सेना की स्ट्राइक कोर भी अपनी ताकत व दक्षता दिखाएगी। भारतीय सेना हर साल शीतकालीन युद्धाभ्यास करती रही है, लेकिन पिछले साल से गर्मी में सैनिकों को जंग लड़ने का अभ्यास शुरू किया गया। इस अभ्यास में कम समय में मोर्चे पर तमाम साजो-सामान व गोला बारूद सहित पहुंचाने और कम नुकसान में दुश्मन को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने का टारगेट तय किया गया है।
पाकिस्तान से सटी सीमा के नजदीक सूरतगढ़ के तपते थार में भारतीय सेना व वायुसेना ने सोमवार को संयुक्त वारगेम ‘विजयी भव’ का शंखनाद किया। इसके साथ ही सेना ने जमीन पर और वायुसेना के जांबाज पायलटों ने आसमान से दुश्मन पर जीत के लिए अपना दम-खम दिखाना शुरू कर दिया है। १४ मई तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान नए बैटल टैंक व आधुनिक हथियारों का ट्रायल करने के साथ ही दुश्मन से काल्पनिक जंग लड़ी जाएगी।
युद्धाभ्यास पर एक नजर

रेगिस्तान के 45 डिग्री तापमान में सेना व वायुसेना कर रही अभ्यास
15 हजार से अधिक सैनिक व अधिकारी ले रहे हैं भाग
कम समय में ज्यादा से ज्यादा गोला बारूद सहित जरूरत का सामान लेकर मोर्चे तक पहुंचने की ट्रेनिंग
भारतीय सेना व वायुसेना का रेगिस्तान में संयुक्त अभ्यास विजयी भव 14 मई तक चलेगा। इसमें काल्पनिक जंग के दौरान आधुनिक टैंक, हथियारों व उपकरणों का ट्रायल भी होगा""
एस डी गोस्वामी रक्षा प्रवक्ता

08 मई 2011

आईएसआई ने किया ओसामा का सौदा













आईएसआई ने किया ओसामा का सौदा

जब पाकिस्तानी समय के अनुसार देर रात दो बजे ओबामा को ओसामा की मौत की खबरमिली तो उन्हें निश्चित रूप से भारी सुकून भरा अहसास मिला होगा। पिछले कुछ दिनों से परेशान ओबामा को आईएसआई की तरफ से इससे बेहतर कोई गिफ्ट नहीं हो सकता है। मीडिया पर जो बराक ओबामा की वीरता का बखान हो रहा है, वास्तव में वो वीरता न हो आईएसआई और अमेरिकी एजेंसियों का एक ज्वाइंट खेल था, जिसका शिकार ओसामा-बिन-लादेन हुआ। पिछले कुछ दिनों अपनी जन्मभूमि और धर्म को लेकर अमेरिका में झेल रहे आलोचना को दबाने के लिए आखिर बराक ओबामा ने आईएसआई का सहयोग लिया और ओसामा बिन लादेन को ढेर कर दिया।

इस कड़ी को समझने में कुछ ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबोटाबाद में रह रहा था। जिस मकान में रह रहा था, उस मकान के निर्माण को देख कोई भी समझ सकता है कि यह निर्माण सेना का है। साथ ही सेना की एक यूनिट भी थी। यह जगह इस्लामाबाद से काफी दूर नहीं है और पाकिस्तान की सेना के लिए यह महत्व इसलिए भी रखता है कि पूर्व तानाशाह अयूब खान भी यहीं के रहने वाले थे। हजारा जनजाति के बाहुल्य वाले इस इलाके में पश्तूनों और हजारा जनजाति के बीच संघर्ष भी होता है। मिली जानकारी के अनुसार ओसामा बिन लादेन आखिरकार पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के उस राजनीति का शिकार हो गई जिसके आधार पर ही आईएसआई ने अपने पूर्व में रहे बॉसों को भी नहीं बख्शा। वास्तव में लादेन काफी लंबे समय से आईएसआई के संरक्षण में ही सीमांत इलाके में था, जो सहूलियत के हिसाब से सारा कुछ करता था। लादेन की सारी एक्टिविटी सेना और आईएसआई को पता था। बस सही अमेरिकी दबाव का इंतजार था। इस दबाव को आईएसआई सह नहीं सकी और लादेन मारा गया।

इस पूरे खेल की शुरूआत तो छ महीनें पहले हो गई थी। अमेरिका को यह पता था कि आईएसआई के संरक्षण में ही लादेन है। अप्रैल महीनें में इस खेल की पूरी प्लांटिग कर दी गई। इस महीनें ही अमेरिका के दौरे पर शुजा पाशा पहुंचे। साथ ही परवेज कयानी भी निरंतर अमेरिका अथॉरिटी के संपर्क में रहे। शुजा पाशा के अमेरिकी दौरे के दौरान कुछ तल्ख बातचीत सीआईए और आईएसआई चीफ के बीच हुई थी। इस दौरे में पाकिस्तान में बिना वीजा रहने वाले अमेरिकी एजेंटों को लेकर विवाद हुआ था। यह मामला मीडिया में भी आया था। लेकिन इससे अलग एक गंभीर बातचीत लादेन को लेकर आईएसआई चीफ और सीआईए चीफ के बीच हुई थी। इस दौरान अमेरिका ने साफ तौर पर लादेन को खत्म करने संबंधी प्रस्ताव आईएसआई के सामने रखा। उधर आईएसआई पर यह प्रेशर और तब आ गया जब विकीलीक्स के खुलासे में आईएसआई संबंधी एक खबर सामने आई, जिसके मुताबिक अमेरिकी सूची में आईएसआई आतंकी संगठन है।पाकिस्तान के अब्बोटाबाद में वह घर जहां कथित तौर पर ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी एजंसियों ने मार गिराया

मिली जानकारी के अनुसार शुजा पाशा अपने खास सैन्य प्रमुखों से सलाह के बाद ओसामा बिन लादेन की बलि देने को तैयार हो गए थे। इसके पीछे आईएसआई के बड़े लोगों और पाकिस्तानी सेना की अपनी आर्थिक मजबूरी थी। यहीं से आपरेशन लादेन की शुरूआत हो गई थी। अप्रैल माह में ही एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल काबुल पहुंच गया था। इस प्रतिनिधमंडल के हेड प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी थे। लेकिन उनके साथ ही सेना चीफ परवेज कयानी और आईएसआई चीफ शुजा पाशा भी थे। वास्तव में जिलानी तो मुखौटा थे। वास्तव में यह दौरा कयानी और पाशा का था जिन्होंने अपने दौरे के दौरान विभिन्न अफगान जनजातियों और पीस काउंसिल के सदस्यों की राय ली। साथ ही यह भी आकलन किया कि आखिर लादेन को अमेरिका के हवाले कर दिया जाएगा तो उसका क्या प्रभाव पख्तून जनजातियों और तालिबान जैसे संगठनों पर पड़ेगा। इसके बाद ही अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पेशावर में पख्तो पीस काउंसिल की तरफ से विश्व पश्तो कांग्रेस का आयोजन किया गयाथा। इसमें पूरी तरह से पख्तूनों को शांतिप्रिय जनजाति बताया गया और अरबों को गाली दी गई। इस कांफ्रेंस में शामिल लोगों ने कहा था कि पख्तूनों पर अरब कल्चर को डाला जा रहा है और अरब कल्चर वाले पख्तूनों को हथियार देकर शांतिप्रिय जनजाति को हिंसा की तरफ ढकेल रहे है।

इस पूरे अध्ययन के बाद आखिरकार ओबामा के हाथ में ओसामा को सौंप दिया गया। जिस तरह से अमेरिकी एजेंसियों ने देर रात आपरेशन किया है, उसमें पाकिस्तान की भागीदारी न हो यह मुर्खता भरी बात है। पाकिस्तान की पूरी भागीदारी के साथ ही यह आपरेशन हुआ और ओसामा मारा गया। इस मामले में अन्य आतंकी संगठन जिसमें तालिबान के जलादुद्दीन हक्कानी नेटवर्क के लोग भी शामिल है, विश्वास में लिया गया है, बताया जा रहा है। वास्तव में पाकिस्तान सेना और आईएसआई के उपर हाल में जो अमरिका ने खुले आरोप लगाए उससे आईएसआई को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। दूसरा आईएसआई और सेना क पता है कि आखिरकार पाकिस्तान को अमेरिकी डालरों के बिना चलाना मुश्किल है। सेना की भी कमाई अमेरिकी सहायता राशि से आ रही है। उधऱ अमेरिकी दबाव और इधर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की चरमराहट पाकिस्तान को परेशान किए हुए था। पाकिस्तान को कुल जीडीपी का मात्र दस प्रतिशत ही टैक्स से आ रहा है। हालत यह है कि देश की सिर्फ एक प्रतिशत जनता ही टैक्स दे रही है। इन परिस्थितियों में अमेरिकी प्रतिरोध को पाकिस्तान सेना और आईएसआई झेलने को तैयार नहीं है। आखिर जो विकास के लिए पैसा आता है, उसमें भी भारी हाथ सेना ही मार जाती है। इसलिए कई मजबूरियां थी जिसके कारण लादेन ओबामा के हवाले कर दिए गए।





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06 मई 2011

इन्कलाब आने वाला है



अब शाहों का सिंहासन, जल्‍दी थर्राने वाला है,

मिजाजे आम हैं बिगड़ा, बवंडर आने वाला है।

बड़ी ही देर से सही, मगर आवाज तो आई,
यहाँ उजले लिबासों में छिपा हर हाथ काला है।

हया बेच कर खाई, अमीरों और वजीरों ने,
तमाशे हैं यहाँ सस्‍ते, मगर महगाँ निवाला है।

हमें ठंडा समझने की, तुमने कैसे की गुस्‍ताखी,
जवां हैं मुल्‍क हिन्‍दोस्‍तां, अभी तनमन में ज्‍वाला है।

जाओगे अब कहाँ बचकर, यहीं पर टेक लो माथा,
यहाँ आवाम मस्‍जिद हैं, यहाँ जनता शिवाला है

03 मई 2011

maa

तेरा चेहरा मुझको याद नही पर,
तेरी गोद मुझे याद है माँ !
तेरा प्यार याद नही रहा पर ,
उसका एहसास मुझे याद है माँ !
तेरे दुध से जीवन दान मिला ,
पर उस दूध की खुशबु याद नही माँ !
मेरे दिल पर तेरा हक़ है पर ,
मेरे शरीर को तेरा साथ नही माँ !
जब पैदा हुई तो तेरा आगोश था ,
पर अब जीवन में वह आस नही माँ !
तुझसे मिलना न मुमकिन है पर ,
तेरी याद पर मेरा अख्तियार नही माँ !
जब चाहां निगाहें झुका कर देख ली ,
मेरे दिल में इक तस्वीर है माँ !
तुम बिन ये घर सूना है ,
सुने घर में एक भी चिराग नही माँ !
तेरी बगिया में इक फूल खिला था ,
आज उस पर वीरानी -सी छाई है माँ !
तस्वीर में ज़िंदा है तू मेरे लिए,
तक़दीर को क्या समझाऊ मैं माँ !
हर शे में तुझको ढूंढा मैंने ,
इस भीड़ में केसे पहचानू मैं माँ !
इस कंक्रीट के जंगल में धायल ,
कब से दोड़ रही हूँ मैं माँ !
लहू लुहान कब तक मैं दोडू ,
बस ,एक सहारा मिल जाता माँ !
तेरे ममता का आंचल मिल जाता माँ !
तेरे प्यार का सागर मिल जाता माँ !
इस किश्ती को साहिल मिल जाता माँ

वनदे मातरम

भगत सिंह का अंतिम पत्र :

भगत सिंह का अंतिम पत्र : 22 मार्च,1931

साथियो,

स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता. लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ, कि मैं क़ैद होकर या पाबंद होकर जीना नहीं चाहता. मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊँचा उठा दिया है - इतना ऊँचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊँचा मैं हर्गिज़ नहीं हो सकता. आज मेरी कमज़ोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं. अगर मैं फाँसी से बच गया तो वो ज़ाहिर हो जाएँगी और क्रांति का प्रतीक-चिन्ह मद्धिम पड़ जाएगा या संभवतः मिट ही जाए. लेकिन दिलेराना ढंग से हँसते-हँसते मेरे फाँसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरज़ू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देनेवालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी. हाँ, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थी, उनका हजारवाँ भाग भी पूरा नहीं कर सका. अगर स्वतंत्र, ज़िंदा रह सकता तब शायद इन्हें पूरा करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता. इसके सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच फाँसी से बचे रहने का नहीं आया. मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा? आजकल मुझे ख़ुद पर बहुत गर्व है. अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतज़ार है. कामना है कि यह और नज़दीक हो जाए.

आपका साथी,

भगत सिंह