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30 मई 2011

संसद की मानसून सत्र

संसद की मानसून सत्र पर अच्छी लिखी एक कविता आप सब की नज़र है:
सुनते हैं दाउद फिर चर्चा में आएगा
अयोध्या का मुददा गरमाएगा
सीबीआई का नाम उछलेगा
पाकिस्तान पर बहस होंगे.
संसद में हंगामा होगा
राष्ट्रमंडल खेलों की खबर होगी
खबर देश के विकास और चमक की होगी
कुछ और बेवजह के मुद्दे होंगे.
संसद के अंदर-बाहर बहस होगी
बहस नहीं तो स्थगन होगा
अखबार टीवी का सदानंद होगा
बस बहस में गरीबी बेरोजगारी नहीं होगी
मजदूरों का खटना और भूखों मरना
युवाओं का भूखों भटकना नहीं होगा.
बस बहस में गरीबी बेरोजगारी नहीं होगी
और सब होगा और सब होगा|
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.........osho

तुम अकेले में बेचैन होते हो। कहते हो क्या करें, कहां जाए, किसको मिले? मित्र खोजते हो, क्लब जाते हो, होटल में बैठते हो, सिनेमा देख आते हो, मंदिर पहुंच जाते हो, लेकिन तुम्हारी खोज दूसरे की खोज है। कोई दूसरा मिल जाए तो थोड़ा अपने से छुटकारा हो, नहीं तो अपने से घबड़ाहट होने लगती हैं। अपनी ही अपने से ऊब पैदा हो जाती है। तुम अपने को झेल नहीं पाते। तुम अपने से परेशान हो जाते हो। तो पत्नी को खोजते हो, पति को खोजते हो, बच्चे पैदा करते हो--भीड़ बढ़ाते जाते हो, इसमें उलझे रहते हो।
अब मेरे पास लोग आते हैं। अगर वे अकेले हैं, तो दुखी। वे कहते हैं, हम अकेले हैं। अगर परिवार में हैं, तो दुखी हैं। वे कहते हैं, परिवार है। अकेले हैं तो अकेलापन काटता है। अकेलेपन से बचन के लिए भीड़ इकट्ठी कर लेते हैं, तो भीड़ सताती है। फिर वे कहते हैं दबे जा रहे हैं, व्यर्थ मरे जा रहे हैं, बोझ ढो रहे हैं, कोल्हू के बैल बन गयी हैं। पत्नी है, बच्चे हैं, अब इनको पालना है, शिक्षा दिलानी है, शादी करनी है, अब तो फंस गए! जब तक फंसे नहीं थे तब तक लगता था, क्या करें अपने-आप? अपने साथ क्या करें? कुछ सूझता न था। अकेले-अकेले ऊब मालूम पड़ती थी कुछ चाहिए करने का।
साध असंगी संग तजै। साधु तो वही है जो असंग को साधता है, अकेलेपन को साधता है। जो कहता है कि मैं अपने अकेले मैं आनंदित रहूंगा। जो धीरे-धीरे अपने निजरूप में उतरता है। जो अपने ही भीतर गहरा कुआं खोदता है, और उसमें डूबता है। एक ऐसी घड़ी आती है जब अपने ही केंद्र पर कोई पहुंच जाता है, तो फिर किसी के साथ की कोई जरूरत नहीं रह जाती।
इसका यह मतलब नहीं कि तुम जंगल भाग जाओ। जंगल भी वही भागता है जो पहले अपन से भागने के लिए भीड़ में फंसा। अब भीड़ से बचने के लिए जंगल भागता है। जंगल में फिर अकेला हो जाएगा, फिर भागेगा।
                   .........osho

osho

चौबीस घंटे किसी भी एक चीज को मत पकड़ लेना।
जीवन में दो घाट हैं, दो किनारे हैं जीवन की सरिता के। श्रम है, विश्राम है; जागना है, सोना है। इसीलिए तो पलक झपती है, बंद होती है। इसीलिए तो श्वास भीतर आती है, बाहर जाती है। इसीलिए तो जन्म होता है, मौत होती है। इसलिए तो स्त्रियां हैं, पुरुष हैं। जीवन पर दो घाट हैं। और दोनों का जो संतुलन में संभाल लेता है वही परमात्मा को उपलब्ध होता है।
एक को मत पकड़ लेना। एक को तुमने पकड़ा तो तुमने चुनाव कर लिया, आधे का पकड़ा आधे को तुमने छोड़ दिया। वह आधा भी परमात्मा है। 

                                       ..........osho

का़बलियत किसी जाति,धर्म या लिंग से नही आती.

का़बलियत किसी जाति,धर्म या लिंग से नही आती. जयललिता, मायावती, शीला
दीक्षित आदि पहले भी मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. सभी ने देखा है कि उन्होंने
क्या किया. उनके प्रदेश में कल्याण की बात तो छोड़ ही दीजिए, उन्होंने
महिलाओं के उत्थान के लिए क्या किया है? वहीं एक मुख्यमंत्री नीतिश कुमार
हैं जिन्होंने महिलाओं का कल्याण करने के साथ-साथ हर क्षेत्र मे उनसे कहीं
बेहतर काम किया है.

फिर भी मेरा देश महान

 देश में घोटाला, खुले घूम रहें हैं बेईमान
 देश के नेता चोर व बेईमान,फिर भी मेरा देश महान
 गरीब रोटी को तरसे, आत्महत्या करे किसान
लूटों मेरे देश के गद्दारों, फिर भी मेरा देश महान
 कभी धर्म के नाम पर कभी जाति के नाम पर
करो राजनीति खुलेआम, फिर भी मेरा देश महान
 भाजपा हो, या हो कांग्रेस सब के सब चोर व बेईमान
कहीं रिश्वत तो कहीं घोटाला, फिर भी मेरा देश महान
 राजा ने की 2G स्पेक्ट्रम घोटाला खुलेआम, बेच डाला ईमान
येदुरप्पा ने की जमीं घोटाला सरेआम,  फिर भी मेरा देश महान
 किसी ने खाया कफ़न सहिदों का, किसी ने की रक्षा घोटाला
सहिदों को भूल गए सब बेईमान, फिर भी मेरा देश महान
 दंगा सियासतदां तुम कराओ और झुलसे जनता आम
हमारी जख्मो पर करो सियासत, फिर भी मेरा देश महान
 किसी को घूसखोरी की आज़ादी कोई करे कत्ल सरेआम
इन्हें हैं आज़ादी बाकी सब गुलाम, फिर भी मेरा देश महान
                       -----------      अली सोहराब

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती... भारत की बात करनी है

तो शुरुआत भारत यानी मनोज कुमार से करते हैं. भारत कुमार की 1967 में आई
फिल्म उपकार का यह गाना पिछले कई सालों से रिचुअल की तरह सिर्फ राष्ट्रीय
पर्वों-26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को ही सुनाई पड़ता है. 1967 और
1947 के बीच 20 साल का फासला.1962 में चीन से हुई लड़ाई भी हम हार चुके
थे. गांधी, नेहरू भी हमें छोड़ कर जा चुके थे. पर हमारा जोश और जज्बा अभी
हाल तक बरकरार था. उसमें कोई कमी नहीं आई थी. बहुत दिन नहीं हुए, जब देश
की आन-बान और शान के लिए जीना मरना फख्र की बात मानी जाती थी.

समय
बीता, हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के बीज पड़े. पंजाब में हरित क्रांति
का असर दिखने लगा तो गुजरात में आणंद श्वेत क्रांति का प्रतीक बन गया.
यानी मेरे देश की धरती अभी सोना उगल रही थी. खेत लहलहा रहे थे, खलिहान
अनाजों के ढेर से अटे पड़े थे. देखते ही देखते आणंद डेयरी का टेस्ट ऑफ
इंडिया फेम अमूल ब्रांड अमूल्य बन गया. एक बार फिर भारत की बात कर करते
हैं, क्योंकि उनकी क्रांति अभी तक नहीं आई थी.

1981
में आई इस फिल्म में सोना उगलने की कहानी तो नहीं थी, पर इसमें आजादी की
लड़ाई के बहाने अंग्रेजों से लड़ाई की बानगी जरूर पेश की गई थी. कहां तो
इस फिल्म से प्रेरणा मिलनी चाहिए थी, और कहां इसके बाद के दौर में बड़ी
खामोशी से स्वतंत्रता का मतलब ही बदल गया. स्वतंत्रता कब स्वच्छंदता में
तब्दील हो गई, किसी को पता ही नहीं लगा.

1984 में
इंदिरा गांधी ने भी अचानक साथ छोड़ दिया. फिर आया राजीव गांधी का जमाना.
कहां तो राजीव गांधी यह बता कर भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे थे कि केंद्र
सरकार द्वारा दिए गए 100 रुपये में से महज 15 रुपये ही आम आदमी तक पहुंचते
हैं, और कहां वह खुद ही भ्रष्टाचार के समुंदर में डूबने उतराने लगे. राजीव
गांधी पर स्वीडन की सबसे बड़ी हथियार निर्माता कंपनी बोफोर्स से तोप सौदे
में दलाली खाने का आरोप लगाकर विश्वनाथ प्रताप सिंह खुद तो राजर्षि बन गए,
पर राजीव गांधी की लुटिया डूब गई.

लगभग 16 मिलियन
डॉलर का यह घोटाला इसलिए भी बहुत अहम था, क्योंकि इसमें इमोशनल अपील थी और
यह देश की सेना व सुरक्षा से जुड़ा मसला था. इसी के बाद एक नारा बहुत
लोकप्रिय हुआ था, 100 में 90 बेईमान, फिर भी मेरा देश महान! फिर तो
घपलों-घोटाला का जैसे दौर ही शुरू हो गया. नए घोटाले होते, कुछ दिनों तक
मीडिया की सुर्खियां बनते, चर्चाएं, बहस मुबाहिसा होता और फिर अपनी कड़वी
यादें छोड़ वे इतिहास के पन्नों में समा जाते.

4000
करोड़ का हर्षद मेहता शेयर घोटाला, 1000 करोड़ का केतन पारेख शेयर घोटाला,
18 मिलियन डॉलर का हवाला घोटाला, 900 करोड़ का चारा घोटाला, ललित मोदी,
शशि थरूर का आईपीएल घोटाला, 14,000 करोड़ का सत्यम कंप्यूटर्स घोटाला और
20,000 करोड़ के तेलगी स्टांप घोटाले की अब कभी कभार सिर्फ चर्चा ही होती
है.

2010 को घोटालों का साल कहा जाए तो कोई
अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस साल सामने आए दो मामलों ने अब तक हुए सभी
घोटालों को बौना साबित कर दिया. राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 70,000 करोड़
का खेल हो गया. लगभग एक दशक तक वायुसेना में अफसर रहे सीडब्यूजी के
महाकप्तान सुरेश कलमाड़ी ने हजारों करोड़ रुपये हवा में उड़ा दिए. हवा में
उडऩे का तो उन्हें पहले से अनुभव था, अलबत्ता सीडब्ल्यूजी के बहाने हवा
में रुपये उड़ाने का उन्हें नया अनुभव हासिल हो गया. अब कितने रुपये किस
पहाड़ी, नदी या समुद्र में गिरे, यह पता लगाना आसान काम नहीं है.

अब
तो ज्यादा से ज्यादा यही हो सकता है कि उन्हें किसी भी चीज को उड़ाने की
इजाजत नहीं दी जाए. हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स में जब भारतीय खिलाडिय़ों ने
गोल्ड मेडल जीतना शुरु किया तो लगा कि अभी भी इस जुमले की प्रासंगिकता
थोड़ी बची हुई है कि मेरे देश की धरती सोना उगले... पर वह सब घोटाले के
गर्द-ओ-गुबार में न जाने कहां गुम हो गया. 

2011
में जब कुछ महीने बाकी रह गए थे तो घोटालों का सिलसिला कैसे खत्म हो सकता
था. नवंबर में सामने आया 1.76 लाख करोड़ का 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला. सीएजी
रिपोर्ट में कहा गया कि संचार मंत्री ए राजा ने 2जी लाइसेंस की नीलामी में
न केवल हर स्तर पर नियम-कानूनों की अनदेखी की बल्कि दूरसंचार कंपनियों को
कौडिय़ों की तरह लाइसेंस लुटा दिए. फिर तो दिल्ली और तमिलनाडु की राजनीति
में जैसे भूचाल आ गया. सोनिया गांधी-राहुल गांधी के इशारों पर चलने वाली
मनमोहन सिंह सरकार की जब ज्यादा फजीहत हुई, तो राजा को इस्तीफा देकर रंक
बन जाने के लिए कहा गया.

शुरुआती ना-नुकुर के बाद
आखिरकार ऊंट पहाड़ के नीचे आ गया. जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस घोटाले
की परतें खुलती जा रही हैं. नए नए नायक, सहनायक और खलनायक सामने आते जा
रहे हैं. साल खत्म होने में अभी कुछ दिन बचे हैं. महाघोटाले के तौर पर कोई
और घोटाला सामने आ जाए तो हैरान होने की जरूरत नहीं है. वैसे 2012 में अगर
कोई उपकार का सीक्वल यानी उपकार-2 बनाने की सोच रहा हो तो वह उसमें एक
गाना रख सकता है, मेरे देश की धरती सोना निगले, निगले हीरा-मोती.फिल्म और
गाना दोनों हिट होगा, इसकी गारंटी दे सकता हूं.

हम कब तक विकासशील देश बने रहेगे , हम कब विकसित देश बनेगे,

१-  हमारे देश में यह प्रचारित किया गया है  की भारत बहुत ही गरीब देश है, यदि यह देश  गरीब होता तो क्या जवाहर लाल नेहरू का कपडा पेरिस में धुलने जाता.
२-  दुनिया  भर के विदेशी आक्रमण क्या हमारी गुदड़ी चुराने के लिए हुए थे ,
३-  चंगेज खान ने ४ करोड़ लोंगो की हत्या करके क्या अपने घोड़ो पर ईट और पत्थर लाद कर  ले गया था.
४- सोमनाथ मंदिर को बार बार सोने से कौन भर देता था यदि हमारे पुरखे गरीब थे.
५- श्रम करने वाला कभी गरीब हो ही नहीं सकता है, हमारे किसान औसत १४ घंटे काम करते  है, यह गरीब क्यों है,
६- आज हमारे  देश से विदेशी कंपनिया आधिकारिक रूप से २३२००० करोड़ का शुद्ध मुनाफा लेकर वापस अपने देश जा रही है, बाकि सभी तरह का फर्जी   हिसाब, उनका आयातित कच्चा माल का भुगतान , चोरी आदि जोड़ा जाय तो एह रकम २५,००,००० करोड़ सालाना बैठता है. क्या कोई गरीब देश इतना टर्न ओवर पैदा करवा सकता है.
७- हमारे देश से दवाओ का सालाना  कारोबार १०,००,००० करोड़ का है, क्या यह गरीब देश का निशानी  है,
८- हमारे देश में सालाना ६,००,००० करोड़ का जहर का व्यापर विदेशी कंपनिया कर रही है, क्या या गरीबी निशानी है,
९- हमारे देश में १०,००० लाख करोड़ खनिज पाया जाता है और इसका दोहन भी विदेशी कंपनिया बहुत ही सस्ते भाव पर कर रही है, तो हम गरीब है,
१०-  यदि हमारे बैंक में ५,००,०००/- रूपया है तो हमारे जेब  में औसत ५०००/- रूपया से ज्यादा नहीं रहता है यानि पूरे पैसे का १ % तो फिर हमारी सरकार ने २५ळाख़ः  करोड़ का नोट क्यों छपवा रखा है और छपवाती ही जा रही है, इसका प्रयोग कौन कर रहा है और कैसे कर रहा है,
११- जब हम रॉकेट  और सैटेलाईट बना कर चाँद  पर पहुच  सकते है तो नोट छपने का काम उन विदेशी कंपनियों को क्यों दिया गया है जो हमारे पीठ में छुरा घोपकर उसी  डिजाइन  में थोडा सा न दिखने  वाला  परिपर्तन करके खरबों रुपये का नकली नोट छापकर विदेशी खुफिया तंत्रों को बेचकर हमें कंगाल बना रही है,
१२- यदि हम गरीब होते तो क्या अंग्रेज यहाँ खाक छानने आये थे. राबर्ट क्लाइव ९०० पानी वाले जहाज भरकर  सोना चांदी  हीरे सिर्फ कलकत्ता से कैसे ले गया था.
१३- यदि हम गरीब होते तो हमारे देश दे आजादी के बाद ४०० लाख करोड़ रुपया विदेशी बांको में कैसे जमा हो गया है.
१४- हमें शुरू से ही भीख मागने की आदत पद जाये , इसके लिए हमारे स्वाभिमानी बच्चो को स्कूल में ही कटोरा  पकड़ाकर  खरबों की लूट जारी है, मिड दे मील दे रहे है.
१५- हम काहिल हो जाए , इसके लिए नरेगा योजना  में  खरबों की लूट का पैसा कौन दे रहा है, हम गरीब इसे दे रहे है.
१६- राजस्व के नाम पर हर गली में शराब की दुकान खोली जा रही, औसत में यदि १०० रुपये की विक्री होती है तो सरकार  सिर्फ २ रुपये मिलते है, क्या गरीब को शराब परोसी जाती है, भारत में ३५००० शराब की अधिकृत दुकाने है, यह लूट का पैसा क्या गरीब दे सकता है,
१७- यदि हम गरीब  होते तो विदेशी यहाँ हर प्रकार की वास्तु फ्री में बेचने के लिए आते.

हमारा देश करीब एकदम नहीं है, इसे विदेशी शिकंजे में फंसाकर टी वि और अखबार के जरिये गरीब प्रचारित किया जाता है, जिससे हमारा रुपया १ डालर में ५० मिले क्योकि हमारे नेताओ का पैसा विदेशी बैंको मे डालर में जमा है. भारत के लोग हफ्ते में ९० घन्टा काम करते है, अमेरिका के लोग हफ्ते में ३० घंटा काम करते है, हमारे १ रुपये में ३ डालर मिलाना चाहिए, यह बहुत बड़ी साजिस है की हम आयात के नाम पर जो भी हथियार, उपकरण आदि खरीदते है, उसका ५० गुम दाम अदा करते है औए बाद में वह पैसा विदेशी खातो में जमे हो जाता है कमीशन के बतौर.

मैं जेल गया तब भी मेरे न्यूज चैनल ने मुझे सेलरी दी

    : इंटरव्यू (पार्ट-दो) : मुंतज़र अल ज़ैदी  
(इराकी पत्रकार) :

मुंतज़र अल ज़ैदी पिछले दिनों दिल्ली में थे. इराक में बुश पर जूता फेंककर दुनिया भर में चर्चित हुए ज़ैदी बेहद समझदार और तार्किक व्यक्ति हैं. न्यूज एक्सप्रेस के एडीटर (क्राइम) संजीव चौहान ने मुंतज़र अल ज़ैदी से कई सवाल किए और जै़दी ने सभी जवाब ऐसे दिए जिसे पढ़-सुनकर उनके प्रति प्यार बढ़ जाता है. पेश है इंटरव्यू का आखिरी

सवाल- दुनिया कह रही है मुंतज़र ने जूता कल्चर को जन्म दिया है...जो कि गलत है, ऐसा नहीं करना चाहिए था।
जबाब- अगर मैं, और मेरा जूता फेंकना गलत था, तो फिर इराक में बेकसूरों पर बम बरसाने वालों को क्या कहेंगे ?

सवाल- आपने बुश पर जूता फेंका। इसके बाद भारत में भी इस तरह की
जूता फेंकने की कई घटनाएं हुईं। एक पत्रकार ने तो भारत के गृहमंत्री पर
जूता फेंक कर मारा। यानि आपके द्वारा दिया गया जूता-कल्चर दुनिया फालो कर
रही है?

जबाब- नहीं। बिल्कुल मुझे फालो नहीं करना चाहिए। हर किसी पर जूता
फेकेंगे, तो जूते की मार की चोट कम हो जायेगी। जब तक आप पर, आपके देश और
आपके समाज पर कोई बम-गोली न बरसाये, तब तक जूता न उठायें। जो जूते के लायक
है, उसे जूता दें और जो गुलदस्ते के काबिल है, उसका इस्तकबाल गुलदस्ते से
करें।
सवाल-  आपने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बुश पर जूता फेंका, तो
आपके चैनल के आधिकारियों और आपके हमपेशा साथियों (जहां आप नौकरी करते थे)
की प्रतिक्रिया क्या थी? क्या आप नौकरी से बाहर कर दिये गये?

जबाब- सब खुश थे। देश खुश था। इराक के हमदर्द खुश थे। जब तक मैं जेल में
रहा उतने महीने (.....करीब नौ महीने) की मेरी तनख्वाह मेरे घर भिजवाई गयी।
और जब जेल से बाहर आया, तो पता चला कि न्यूज चैनल ने मुझे और मेरे परिवार
को रहने के लिए एक फ्लैट का भी इंतज़ाम कर दिया था।
सवाल- जूता कांड के बाद आप इराक के हीरो बन गये, फिर भी आपको
वीजा किसी अरब या यूरोपीय देश ने नहीं दिया, सिवाये भारत के? इसे क्या समझा
जाये? मुंतज़र अल ज़ैदी की मुखालफत या इन देशों पर अमेरिका का भय?
जबाब- मुझे किसी ने दिया हो वीजा न दिया हो। क्यों नहीं दिया? सबका निजी
मामला है। लेकिन भारत ने मुझे वीजा देकर साबित कर दिया, कि उसे किसी का डर
नहीं है। मुझे लगता है कि वाकई आज भी दुनिया में भारत ही सबसे बड़ा
लोकतांत्रिक देश है।
सवाल- कैसे-कैसे लगवा पाये भारत का वीजा? क्या क्या मशक्कत करनी पड़ी?
जबाब- दिल्ली में रहने वाले इमरान जाहिद साहब मेरे दोस्त हैं। उन्होंने
बात चलाई थी। मैं गांधी जी को करीब से छूना, देखना, उनसे बात करना चाहता
था। मेरी साफ मंशा, इमरान भाई और महेश साहब (भारतीय फिल्म
निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट) की कोशिशें कामयाब रहीं। और अब मैं गांधी और
आपके सामने हूं।
सवाल- हिंदुस्तान की सर-ज़मीं को छुए हुए दो दिन हो गये हैं, कल चले जायेंगे आप इराक ? यहां से हमवतन (इराक) क्या लेकर जा रहे हैं?
जबाब- जिंदादिल भारत की मिट्टी की खुश्बू, यहां के लोगों से मिला प्यार
और भारत की सर-ज़मीं पर जीया हर लम्हा, हिंदुस्तान की मेहमानवाजी अपने साथ
लेकर जा रहा हूं।
सवाल- भारत में गांधी जी की समाधि ही देखने की तमन्ना क्यों थी ?
कहने को दुनिया का अजूबा और प्यार का प्रतीक ताजमहल भी भारत में ही है।

जबाब- इराक ने कुर्बानियां दी हैं। गांधी ने कुर्बानी दी। वे आज़ादी के
नुमाईंदे और आइकॉन थे। उन्होंने अत्याचारों के खिलाफ जिस चिंगारी से आग
लगाई, वो देखिये (गांधी समाधी पर जल रही लौ की ओर इशारा करते हुए) आज भी जल
रही है। ताजमहल पर भी क्या ऐसी ही लौ जलती है?
सवाल- आप गांधी से प्रभावित दिखते हैं, ज़िंदगी में गांधी का सा कुछ किया भी है?
जबाब- जेल के भीतर ही तीन दिन तक अनशन पर बैठ गया था।
सवाल- द लास्ट सैल्यूट लिखने के पीछे क्या मंशा थी ?
जबाब- "द लास्ट सैल्यूट"  एक बेगुनाह पर अत्याचारों का सच है। बिना
मिर्च-मसाले के। वो सच जिसे भोगा पूरे देश ने,  लेकिन आने वाली पीढ़ियों के
पढ़ने को कागज पर इतिहास लिखा सिर्फ मैने (मुंतज़र अल ज़ैदी ने)।
सवाल- इराक और भारत में फर्क?
जबाब- इराक का मैं बाशिंदा हूं। भारत के बारे में पढ़ा-सुना है। सिर्फ
दो-तीन दिन ही रह पा रहा हूं यहां (हिन्दुस्तान की सर जमीं पर) । इराक में
अमेरिका का अत्याचार है, और भारत में अपना लोकतंत्र। आप खुद अंदाजा लगा
लीजिए दोनो देशों में । कौन पॉवरफुल है?
                                                                              (regard to vijay sharma)

28 मई 2011

मैंने देखा है सेलुलर जेल - काला पानी

विनायक दामोदर सावरकर
के जन्म दिवस 28-05-पर शत-शत नमन.....

सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर- जो काला पानी के नाम से कुख्यात थी
नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें ७ अप्रैल, १९११  सेलुलर जेलभेजा गया। उनके अनुसार यहां स्वतंत्रता सेनानियों को कड़ा परिश्रम करना पड़ता था। कैदियों को यहां नारियल छीलकर उसमें से तेल निकालना पड़ता था। 
साथ ही इन्हें यहां कोल्हू में बैल की तरह जुत कर सरसों व नारियल आदि का
तेल निकालना होता था। इसके अलावा उन्हें जेल के साथ लगे व बाहर के जंगलों
को साफ कर दलदली भूमी व पहाड़ी क्षेत्र को समतल भी करना होता था। रुकने पर
उनको कड़ी सजा व बेंत व कोड़ों से पिटाई भी की जाती थीं। इतने पर भी उन्हें
भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था। ।सावरकर ४ जुलाई, १९११ से २१ मई, १९२१ तक पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे।

शिक्षाकर्मियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त डीए

रायपुर. राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता (डीए)बढ़ाने की शिक्षाकर्मियों की अर्से से चली आ रही मांग गुरुवार को मान ली। अब डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षाकर्मियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त डीए मिलेगा। इससे उन्हें हर माह 400 से 600 रुपए तक लाभ होगा।शिक्षाकर्मियों को 46 फीसदी डीए मिल रहा था, जो बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया है। उन्हें इसके अलावा 5 प्रतिशत विशेष भत्ता तथा 15 प्रतिशत अंतरिम राहत भी मिलता है। अतिरिक्त डीए का लाभ 1 अप्रैल 2011 से मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के विशेष सचिव देवाशीष दास ने इसका आदेश जारी कर दिया है। मई का वेतन बढ़े हुए डीए के साथ मिलेगा।
चाहिए छठवां वेतनमान
शिक्षाकर्मी डीए बढ़ाए जाने से ज्यादा संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें छठवां वेतनमान चाहिए। छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और शालेय शिक्षाकर्मी संघ के वीरेंद्र दुबे का कहना है कि 10 फीसदी डीए की बढ़ोतरी अपर्याप्त है। शिक्षाकर्मियों के समान ही कार्य करने वाले शिक्षकों को 2006 से छठवां वेतनमान दिया जा रहा है।

चंद्रमा पर बड़ी मात्रा में पानी के सबूत


वैज्ञानिकों ने क्रिस्टल के बीच फंसे मैग्मा का अध्ययन किया
चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी पहले के अनुमानों से ज़्यादा हो सकती है. ये मानना है अमरीका के वैज्ञानिकों के एक दल का जिसने चंद्रमा से लाए गए पत्थरों का नए सिरे से अध्ययन किया है.
ज्वालामुखीय अवशेष या मैग्मायुक्त पत्थर अपोलो-17 अभियान के दौरान धरती पर लाए गए थे.
विज्ञान पत्रिका ‘साइंस’ में छपी शोध रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए चाँद से लाए गए उन मैग्मा अवशेषों का अध्ययन किया गया जो कि शीशे जैसे पत्थर या क्रिस्टल के बीच फंसे हुए हैं.
उन अवशेषों में अब तक के अनुमानों से 100 गुना ज़्यादा पानी के अंश पाए गए हैं.
इस अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों की राय है कि एक समय चंद्रमा पर कैरीबियन सागर जितना पानी रहा होगा.

उत्पत्ति के सिद्धांत पर सवाल

ये मान्य सिद्धांत है कि चांद की सतह पर ज़्यादातर पानी बर्फ़ीले धूमकेतुओं या जलीय क्षुद्र ग्रहों से आया होगा. लेकिन वहाँ सतह के भीतर कितना ज़्यादा पानी हो सकता है, उसका सही अंदाज़ा ताज़ा अध्ययन से ही लगाना संभव हो पाया है.
अपोलो-17 अभियान के दौरान चंद्रमा की सतह पर दिखी लाल मिट्टी
इस नई मिली जानकारी से चंद्रमा की उत्पत्ति को लेकर नए सवाल पैदा होते हैं.
अभी सर्वमान्य सिद्धांत ये है निर्माण के दौरान धरती की मंगल ग्रह के आकार के किसी पिंड की टक्कर हुई होगी. इस टक्कर के बाद दूर छिटकी पिघली चट्टानों से अंतत: चंद्रमा का निर्माण हुआ होगा.
ऐसे में तो निर्माण के दौरान से ही चंद्रमा की सतह सूखी होनी चाहिए थी, जबकि ताज़ा अध्ययन से पता चला है कि किसी समय चंद्रमा पर बड़ी मात्रा में पानी मौजूद था.
अध्ययन से जुड़े मुख्य वैज्ञानिक कार्नेगी संस्थान के डॉ. एरिक हॉरी के अनुसार चंद्रमा की उत्पत्ति के मान्य सिद्धांतों के समर्थन में बहुत सारे सबूत भी मौजूद हैं, जैसे- धरती पर पाए जाने वाले कई तत्व चंद्रमा पर भी हैं. लेकिन इन बातों का चंद्रमा पर मौजूद पानी के स्तर से साम्य नहीं हो पा रहा है.
डॉ. हॉरी के अनुसार, “मैं समझता हूँ टक्कर वाला चंद्रमा की उत्पत्ति का सिद्धांत सही है, लेकिन उत्पत्ति की प्रक्रिया से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें अब भी हमारी समझ से बाहर हैं

25 मई 2011

जंग की बलिवेदी पर वर्दी लहूलुहान


एडिशनल एसपी राजेश पवार , आरक्षक होमेंद्र साहू , कृष्ण कुमार निर्मलकर , संतोष कुमार ध्रुव , भीष्म कुमार यदु, एसपीओ किशोर कुमार, देवलाल नेताम, और गौरव मरकाम को श्रद्धांजलि , इसके साथ ही गरियाबंद के उड़ीसा सीमा पर हुए नक्सली हमले में अपनी शहादत देने वालों की ओर से एक सवाल .....
हम भले ही न हों इस दुनिया में लेकिन आखिर कब तक यूँ ही ख़त्म होता रहेगा इन्सान , हम भी किसी के बेटे है..किसी के पिता ओर किसी के मांग का सिंदूर.. कब तक इस जंग की बलिवेदी पर वर्दी लहूलुहान होती रहेगी..कब तक ? आखिर कब तक..?
कहाँ गए मानवाधिकार की बात करने वाले ठेकेदार..समझ लो हम भी मानव ही हैं..

24 मई 2011

आतंकी से बड़ा खतरा आईएसआई! फिरौती नहीं मिलने पर की हत्‍या

(फोटो कैप्शन: आईएसआई प्रमुख शुजा पाशा )
पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की हरकतें मुल्‍क के लिए खतरा बन सकती हैं। दुनिया भर में कुख्‍यात यह एजेंसी अब चौतरफा घिर रही है। अफगानिस्‍तान सरकार ने कहा है कि तालिबान सरगना मुल्‍ला उमर को आईएसआई ले गई है। अमेरिकी कोर्ट में आतंकी डेविड हेडली ने कहा है कि आईएसआई ने मुंबई में हमला कराने में लश्‍कर की मदद की। अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन पाकिस्‍तान में जहां छिपा था, वह जगह भी आईएसआई का ही अड्डा बताया जाता है। और तो और, मुल्‍क में भी आईएसआई हत्‍या, फिरौती जैसे धंधे में लगी है। मंगलवार को ही मुजफ्फराबाद के एक युवक की फिरौती नहीं मिलने पर आईएसआई द्वारा हत्‍या किए जाने की खबर आई है।
आईएसआई के बारे में अमेरिकी कोर्ट में हेडली के कबूलनामे (पूरी खबर पढ़ने के लिए रिलेटेड आर्टिकल के लिंक पर क्लिक करें) से पाकिस्‍तान के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा है। भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत और अमेरिका को मिलकर पाकिस्‍तान पर शिकंजा कसना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी में घुसपैठ है। भारत को इस बात पर जोर देना चाहिए कि अमेरिका इन सूचनाओं को सार्वजनिक करे।

बीजेपी ने भी आज संवाददाता सम्‍मेलन में कहा कि अब पाकिस्तान पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। पार्टी नेता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि पाकिस्‍तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है और यह दुनिया भर के लिए खतरा साबित हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद यह साबित हो गया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों का स्वर्ग बन चुका है। पाकिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों के नेवल बेस पर हमले के बाद यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का जखीरा सुरक्षित है?

शिकागो कोर्ट में डेविड हेडली ने 26/11 हमले के आरोपी आतंकवादी संगठन लश्‍कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्‍मद के पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से रिश्‍ते होने की बात कबूल की है। हेडली के इस कबूलनामे से आईएसआई और पाकिस्‍तानी सरकार एक बार फिर बेनकाब हो गए। दरअसल आईएसआई एक खुफिया एजेंसी है और इसका काम खुफिया जानकारियां जुटाकर सेना और सरकार को देना है जिससे देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। लेकिन हेडली के कबूलनामे से साफ हो गया कि आईएसआई अपनी मुख्‍य भूमिका से भटक गया है।

पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठनों का मददगार होने के साथ आईएसआई के अधिकारियों पर अपहरण कर फिरौती वसूलने के भी आरोप लगते रहे हैं। आईएसआई अधिकारियों ने मुजफ्फराबाद के निवासी मोहम्‍मद सरवर के बेटे डॉ. रिजवान को बीते 7 मई को उसके घर से ही अगवा कर लिया और 23 मई को उसकी हत्‍या कर दी गई। हालांकि रिजवान के खिलाफ कोई मामला भी दर्ज नहीं किया गया और उसे आईएसआई के ‘प्रताड़ना शिविर’ में रखा गया। स्‍थानीय पुलिस ने रिजवान को रिहा करने के एवज में उसके घरवालों से 60 हजार रुपये मांगे थे। घरवाले हालांकि इस पैसे के इंतजाम में जुटे भी थे लेकिन तभी खबर आई कि निर्दोष रिजवान को मौत के घाट उतार दिया गया है।

आतंकवादियों ने पाकिस्‍तान के विभिन्‍न इलाकों में सुरक्षा बलों से जुड़े कई अहम ठिकानों पर हमले किए हैं। यहां तक कि पाकिस्‍तानी सेना के मुख्‍यालय पर भी हमला हुआ था जिसमें आतंकियों ने कई अधिकारियों को 24 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इसमें एक ब्रिगेडियर और एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत कई लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह की भयंकर चूक और लापरवाही होने के बावजूद किसी ने इसे चूक या खुफिया एजेंसी की नाकामी नहीं माना है।

हालां‍कि ऐबटाबाद की घटना के बाद आईएसआई को दुनिया की सर्वश्रेष्‍ठ खुफिया एजेंसी बताने की कोशिश की जा रही है। जबकि इस घटना ने पाकिस्‍तानी सेना की चौकसी और उनके खुफिया एजेंसियों की पोल खोल कर रख दी है। कई लोग आईएसआई को दुनिया की टॉप टेन खुफिया एजेंसियों में दूसरे या तीसरे स्‍थान पर रखते हैं। चोटी की 10 उम्‍दा खुफिया एजेंसियों में अमेरिका की सीआईए, ब्रिटेन की एमआई-6, इजराइल की मोसाद, जर्मनी की बीएनडी, रूस की एफएसबी, चीन की एमएसएस, फ्रांस की डीजीएसई, भारत की रॉ और ऑस्‍ट्रेलिया की एएसआईएस के नाम शामिल हैं।
पाकिस्‍तान के पश्चिमोत्‍तर प्रांत से सांसद और अवामी नेशनल पार्टी के नेता अफरसियाब खटक ने आईएसआई को तालिबान का संरक्षक करार दिया है। विकीलीक्‍स के खुलासे के मुताबिक खटक ने साल 2009 में अमेरिकी अधिकारी लिन ट्रेसी से बातचीत में कहा था कि स्‍वात घाटी से तालिबान को खदेड़े जाने के बाद आईएसआई ने ही उन्‍हें पनाह दी थी। खटक ने यह भी कहा कि पाकिस्‍तानी सेना अल कायदा के करीबी माने जाने वाले आतंकी संगठन हक्‍कानी नेटवर्क की मदद करते रहे हैं। पाक सेना ने तालिबान के नेताओं मुल्‍ला नजीर और हाफिज गुल बहादुर को भी संरक्षण दिया है।
आईएसआई अपने मुल्‍क में खुफियागीरी में लगातार नाकाम साबित हुई है। इसका ताजा सुबूत कराची के नौ‍सैनिक अड्डे पर हुए आतंकी हमले के रूप में आया है। ऐसे में यह एजेंसी मुल्‍क की बेहतरी में किसी भी तरह मददगार साबित नहीं हो रही है। एक ओर, जहां इसकी नाकामी के चलते आतंकी पाकिस्‍तानी हुक्‍मरान को हिला सकते हैं तो दूसरी ओर, इसकी करतूतों के चलते अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पाकिस्‍तान सरकार को मुश्किल झेलना पड़ सकता है।
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आपकी बातआईएसआई का असली चेहरा सामने आने के बाद पाकिस्‍तान सरकार पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है। हालांकि भारत पहले से ही 26/11 मामले में आईएसआई की भूमिका से जुड़े सबूत देता आया है। क्‍या आईएसआई के अधिकारी आतंकियों से भी खतरनाक हैं? क्‍या ऐसे खुलासे के बाद अमेरिका को पाकिस्‍तान से रिश्‍ते तोड़ लेने चाहिए? भारत की अगली रणनीति क्‍या होनी चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखकर दुनियाभर के पाठकों से शेयर करें। किसी भी आपत्तिजनक टिप्‍पणी के लिए पाठक खुद जिम्‍मेदार होंगे।

बहुमूल्य धातुओं ने लगाई छलांग


बहुमूल्य धातुओं ने आज फिर छलांग लगाई और ऊंचाई पर पहुंच गए। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के संकेतों से दोनों में आज तेजी देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में सोना-चांदी सटोरियों और डीलरों की लिवाली से मजबूत हुए। चांदी में 1,100 रुपए की जबर्दस्त बढ़त हुई और वह 54,300 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। सोना 110 रुपए प्रति दस ग्राम की बढ़कर 22,690 रुपए हो गया। शादियों के सीजन के कारण भी इसकी मांग बढ़ी।बाज़ार में आज तेजी की अवधारणा थी और दोनों ही बहुमूल्य धातुएं महंगी हो गईं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने-चांदी के दामों में मजबूती रही और इसका असर घरेलू बाज़ार पर भी पड़ा। यूरोप के कर्ज संकट का असर सोने की कीमतों पर पड़ा और इसकी मांग बढ़ गई।

kranti

17 मई 2011

पाकिस्तान में नहीं, महाराष्ट्र के थाणे में रहता है भारत का मोस्ट वांटेड अपराधी!

मुंबई. भारत ने हाल ही में पाकिस्तान को जो पचास खूंखार आतंकियों की सूची सौंपी है उनमें से एक वजाहुल कमर खान पाकिस्तान में नहीं बल्कि भारत में रह रहा है। कमर महाराष्ट्र के थाणे में वागले एस्टेट इलाके में अपनी बीमार मां, पत्नी और पांच बच्चों के साथ रहता है। कमर के परिजनों का कहना है कि वो कभी पाकिस्तान गया ही नहीं है। कमर खान 2003 में हुए मुलुंद ट्रैन ब्लास्ट मामले में आरोपी है और फिलहाल जमानत पर रिहा है। पाकिस्तान को सौंपी गई सूची में उसका नाम खान वजाहुल कमर लिखा हुआ है हालांकि फिलहाल जमानत पर रिहा खान जमानत की शर्तों का पालन करते हुए अपने आप को नियमित रूप से कोर्ट के समक्ष पेश करता है।

खान को एटीएस ने 10 मई 2010 को मुंबई के कुर्ला इलाके से गिरफ्तार किया था। खान के परिवार का कहना है कि वो कभी पाकिस्तान गया ही नहीं है। धमाके में नाम आने के बाद से ही वो फरार था और उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एक साल तक छुप कर रहने के बाद वो वापस मुंबई आ गया और धारावी इलाके में व्यापार करने लगा।
वहीं पुलिस ने खान पर मुलुंद धमाको में शामिल होने से अलग तीन अन्य आतंकी घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। जिन चार आतंकी वारदातों का खान को आरोपी बनाया गया है उनमें 16 लोगों की मौत हुई और 120 से अधिक घायल हुए।
खान पर फिलहाल गैर कानूनी रूप से हथियार रखने और आतंकी वारदातों में शामिल होने के मामले चल रहे हैं। इन मामलों की सुनवाई संयुक्त रूप से पोटा की विशेष अदालत में हो रही है।
वहीं भारत में रह रहे व्यक्ति की पाकिस्तान से मांग करने के बाद शर्मनाक स्थिति में पड़ी केंद्र सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जांच में 50 मोस्ट वांटेड अधिकारियों की सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को भी शामिल किया जाएगा और यह पता किया जाएगा कि 2010 में भारत में गिरफ्तार किया गए व्यक्ति का नाम मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में कैसे आ गया। जांच में उन अधिकारियों की पहचान भी की जाएगा जिनकी गलती के कारण ऐसा हुआ।
एक सूत्र के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं कट-पेस्ट का काम हुआ है। हम यह पता लगाएंगे की यह गलती कहां हुई।
गौरतलब है कि खान वजाहुल कमर का नाम पाकिस्तान से मांगे गए 50 आतंकियों की सूची में 41वें नंबर पर शामिल है। मार्च में भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच हुई वार्ता के दौरान यह सूची पाकिस्तान को सौंपी गई थी। इसमें लश्करे तैयबा के सरगना हाफिज सईद और आतंकी जकी-उर-रहमान लखवी का भी नाम है।
वहीं गृह मंत्रालय ने खान के मामले में महाराष्ट्र पुलिस से भी रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में खान के मामले की मौजूदा स्थिति, उसके रहने के स्थान और पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी गई है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान को सौंपी गई आतंकियों की सूची को मुंबई पुलिस, एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरौ) की सहमति के बाद बनाया गया था।


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सुलभ शौचालय में दारू का स्टॉक

रायपुर। सुलभ शौचालय परिसर को दारू के गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रहे पालसिंह ठाकुर को आबकारी विभाग ने मंगलवार तड़के गिरफ्तार किया। उसके पास से 41 बोतल शराब जब्त की गई, जिसे उसने कैंपस में पड़ी रेत में छिपा कर रखा था।
नए आबकारी एक्ट के अनुसार जब्त शराब की मात्रा पांच लीटर से ज्यादा होने की वजह से उसे अदालत से जमानत नहीं मिली। न्यायिक हिरासत में उसे जेल भेज दिया गया। विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि पालसिंह शराब की अवैध बिक्री में लगा हुआ है। पर शराब का स्टॉक कहां पर रखा जाता है, किसी को पता नहीं था।
मंगलवार को सुबह चार बजे से आबकारी विभाग की टीम गुढिय़ारी स्थित उसके मकान के आसपास मंडरा रही थी। सुबह करीब साढ़े पांच बजे टीम को कुछ लोग सुलभ शौचालय परिसर से शराब की बोतल लेकर निकलते दिखे। इसकी पुष्टि होते ही आबकारी विभाग ने छापेमारी की और रेत में छिपाई गई शराब की बोतलों को जब्त किया।

‘अगर मैं आईसीसी अध्यक्ष बना तो खत्म कर दूंगा भारत का वर्चस्व!’

अगर मैं आईसीसी

अध्यक्ष बना तो

खत्म कर दूंगा

भारत का वर्चस्व!’

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान टोनी ग्रेग आईसीसी में भारत के बढ़ते दबदबे को लेकर खासे परेशान हैं। ग्रेग की माने तो वे अगर आईसीसी के अध्यक्ष बने तो उनका शीर्ष एजेंडा आईसीसी में भारत के दबदबे को खत्म करना होगा। साथ ही उनका एक अन्य मुद्दा आईपीएल के लिये विंडो देने की सलाह को खारिज करना भी होगा।
एक इंटरव्यू में ग्रेग ने कहा कि आईसीसी पर भारत का दबदबा है। ऐसे में भारत के वर्चस्व को खत्म कर सबसे पहले आईसीसी को रास्ते पर लाने की कोशिश करनी होगी। भारतीय क्रिकेट के कर्ताधर्ता कुछ देशों को अपने इशारों पर चलाते हैं और वोट हासिल कर लेते हैं। जिससे आईसीसी दबाव में भारत के सामने झुक जाता है।
उन्होंने कहा कि आईसीसी में भारत के वर्चस्व को खत्म करना काफी मुश्किल होगा, लेकिन फिर भी इसे ठीक करना होगा।
ग्रेग ने कहा कि देश दुनिया के तमाम क्रिकेटर बहुत ज्यादा क्रिकेट खेल रहे हैं। ऐसे में भारत की घरेलू टी20 लीग को विंडो देना हास्यास्पद होगा। इसमें दो महीने का वह समय कम हो जायेगा जिसमें वे दुनिया भर में क्रिकेट खेल सकते हैं।